अबकी बारी मथुरा की तैयारी…!

फीचर राजनीति

अजय भट्टाचार्य
उत्तर प्रदेश
में जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद को भी हवा दी जा रही है। बीते बुधवार को उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने एक ट्वीट दागा था कि, “अयोध्या, काशी भव्य मंदिर निर्माण जारी है, मथुरा की तैयारी है। जय श्रीराम, जय शिवशम्भू, जय श्री राधेकृष्ण। ” मथुरा भगवान श्रीकृष्ण का जन्म स्थान है। मौर्य ने ट्वीट करने के बाद कहा कि ये चुनाव नहीं आस्था का विषय है। इसके बाद से ही चरणबद्ध ढंग से यह मामला धीरे-धीरे राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लाने की कोशिश जारी है।

इस बीच हिंदू महासभा ने बाबरी विध्वंस की बरसी पर शाही ईदगाह जाकर सांकेतिक जलाभिषेक करने की घोषणा कर दी। मामला गरमाते ही बड़े नेताओं ने चुप्पी साध ली। दो दिन पहले तक लगातार ट्वीट कर रहे मौर्या का भी ट्वीट आना बंद हो गया। इधर मथुरा पुलिस जब इस मुद्दे पर कानून व्यवस्था बिगड़ने को लेकर पहले ही सचेत हुई तो हिंदू महासभा के तेवर ठन्डे पड़ गये। अब दिल्ली में सांकेतिक जलाभिषेक किया जाएगा। हिंदू महासभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष राज्यश्री चौधरी द्वारा जारी एक वीडियो संदेश में कहा है कि मथुरा प्रशासन ने कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की संभावना जाहिर करते हुए शाही ईदगाह पर जाने की अनुमति नहीं दी है, जिस वजह से यह काम अब दिल्ली में किया जाएगा।
मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह के बीच चल रहे विवाद का मामला कोर्ट में है। मामले को लेकर दायर याचिका में मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि के बाद बने ईदगाह को हटाने की मांग की गई है। मथुरा श्रीकृष्ण विराजमान सिविल वाद के संबंध में दाखिल की गई अपील को जिला न्यायाधीश ने 16 अक्टूबर को स्वीकार किया था। इधर अपने विवादित बडबोलेपन के कारण चर्चा में रहने वाली अभिनेत्री कंगना रनौत भी इस विवाद में कूदीं और बांके बिहारी के दर्शन करने के इस मुद्दे पर ग्लेमर का तड़का लगा दिया। जबकि उन्नाव के पंडित दीनदयाल स्पोर्ट्स स्टेडियम में दो दिवसीय सांसद खेल प्रतियोगिता के समापन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल उन्नाव से भाजपा सांसद साक्षी महाराज ने दावा करते हुए कहा कि अयोध्या-काशी की तर्ज पर मथुरा में भी भव्य मंदिर का निर्माण होगा। उन्होंने मथुरा मंदिर के नव निर्माण को लेकर मौर्य के बयान हृदय की गहराई से स्वागत किया। बोले, ”आयोध्या व काशी का निर्माण तो ही रहा है. अकेला मथुरा रह गया है, हम लोग हिंदू और मुस्लिम भाई बैकर बीच का हल निकाल लेंगे। इसे राजनीति दृष्टि से नहीं देखना चाहिए। राजनेता शब्दों की कलाकारी में इतने माहिर होते हैं कि राजनीति करके भी कहते हैं इसमें राजनीति न देखें। फिर यह तो पूछा ही जाना चाहिये कि सबकी आस्था-विश्वास-भक्ति चुनाव के समय ही क्यों हिलोरें मारने लगती है। रनौत भी शब्दों की बाजीगरी कर गईं कि वह किसी पार्टी की सदस्य नहीं हैं, लेकिन जरूरत पड़ी तो राष्ट्रवादी विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए राष्ट्रवादी पार्टी के लिए चुनाव में प्रचार करेंगी। अब भाजपा से बड़ी कोई राष्ट्रवादी पार्टी है क्या? यह अलग बात है कि भाजपा का सारा राष्ट्रवाद फर्जीवाड़े पर टिका है। नेता सुभाष से लेकर भगत सिंह तक के नाम पर जिस राष्ट्रवाद की अलख भाजपा जगाना चाहती है उनके वामपंथ को कोसना उसका पुराना शगल रहा है।

अब यह समझना जरुरी है कि मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि की आड़ में सियासी आस्था क्यों कुलांचें भर रही है। दरअसल भगवान कृष्ण की बाल लीला स्थली रही मथुरा-वृंदावन ब्रज क्षेत्र में आता है जिसमें मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, हाथरस, मैनपुरी, एटा और बुलंदशहर जिले शामिल हैं। इनमें मथुरा की पांच सीटों में चार पर भाजपा का कब्जा है। जबकि आगरा की सभी नौ सीटें भाजपा के खाते में हैं। फिरोजाबाद की पांच में चार, मैनपुरी की चार में एक, एटा की चार में एक, हाथरस की तीन में दो और बुलंदशहर की सभी सात सीटें भाजपा के खाते में हैं। मतलब कुल 37 सीटों में भाजपा 28 सीटों पर काबिज है। बदले हुए राजनीतिक हालात में इन सभी सीटों पर अपना वर्चस्व बरकरार रखना सत्तारूढ़ भाजपा के लिए बड़ी चुनौती है। इसलिए ब्रज क्षेत्र के विस्तारकों की बैठक में प्रदेश उपाध्यक्ष विजय बहादुर पाठक ने कहा था कि पार्टी ब्रज क्षेत्र की सभी विधानसभा सीटों पर विस्तारक उतारेगी। इनको 150 दिन तक अपने विधानसभा क्षेत्र में ही प्रवास करके मिशन 2022 के लिए तैयारी करनी होगी। इसलिये मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर माहौल तैयार किया जा रहा है।
(लेखक देश के जाने माने पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

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