आस्था में अवसर !

उत्तर प्रदेश लेख

अजय भट्टाचार्य
कोरोनाकाल
से दिल्लीशाही ने एक नारा दिया कि ‘आपदा में अवसर’ तलाशें और आत्मनिर्भर बनें। अब धर्मस्थलों के आधार पर आजीविका चलाने वाले सफेदपोश मठाधीशों, नौकरशाहों, नेताओं ने आपदा को बदलकर ‘आस्था’ कर दिया और ‘आस्था में अवसर’ भी तलाश लिया। अयोध्या में जमीनों को लेकर जो गोरखधंधा उजागर हुआ है वह इसी ‘आस्था में अवसर’ के गर्भ से उत्पन्न हुआ है। चुनाव की जिस फसल को अयोध्या में रामजन्मभूमि मंदिर निर्माण के जरिये काटने की राजनीतिक चाल चली गई थी/है, जमीन घोटाले उसमें रोड़ा बनकर ऊभरे हैं।

रामजन्‍मभूमि क्षेत्र में जमीन की खरीद-फरोख्‍त में फर्जीवाड़ा फिर सुर्ख़ियों में है। रामजन्मभूमि क्षेत्र से पांच किलोमीटर की परिधि में भाजपा नेताओं और अफसरों द्वारा जालसाजी कर जमीन की जबरदस्त बंदरबाँट की गई है। भारतीय जनता पार्टी के विधायकों, उनके रिश्तेदारों सहित उनके मेयर ने जमीनें खरीदी हैं। अयोध्या में रामजन्‍मभूमि पर मंदिर निर्माण की आड़ में किस तरह से दो करोड़ की जमीन पांच मिनट के अंदर साढ़े सोलह करोड़ में खरीदी गई, यह बात पुरानी हो चुकी है। भ्रष्‍टाचार में डूबे ट्रस्‍ट पदाधिकारियों सहित भाजपा नेताओं का राजफाश हुआ तो आरोप लगाने वालों पर ही तमाम मुकदमे लाद दिए गए।

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने एक रिपोर्ट में दावा किया है कि अयोध्या के डिविजनल कमिश्नर और डीआईजी के रिश्तेदारों सहित कई आला अधिकारी राम मंदिर निर्माण स्थल के 5 किमी के दायरे के भीतर जमीन खरीदी की है, जो हितों के टकराव का मामला है। वहीं इसी जमीन पर विधायक, महापौर और राज्य ओबीसी आयोग से सदस्यों की ओर से भी जमीन खरीदी गई है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एक विवादित महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट द्वारा यह सभी जमीन खरीदी की गई है। यह सभी जमीन औने-पौने दामों में खरीदी गई है। मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भूमिका भी कटघरे में है। चुनावी साल में मामला सामने आने के बाद सत्ता के गलियारों में हड़कंप मच गया है। अयोध्या में जमीन खरीदी मामले में फर्जीवाड़े की खबर छपने के बाद योगी सरकार ने जांच के निर्देश दिए हैं। सरकार की ओर से सात दिनों में पूरी रिपोर्ट आला अधिकारियों को देने के लिए कहा गया है। भाजपा से जुड़े नेताओं को इस पर कुछ भी बयान देने पर मनाही की गई है।

नया मामला सामने आने के बाद आम आदमी पार्टी फिर जोश में है। इस वर्ष की शुरुआत में आप नेता व राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने जब अयोध्या रामजन्मभूमि निर्माण ट्रस्ट के संपत राय पर सवाल उठाये थे तब विश्व हिंदू परिषद, भारतीय जनता पार्टी और ऐसे तमाम नेता, विधायक-मंत्री आदि कह रहे थे कि संजय सिंह के ऊपर मानहानि का मुकदमा करेंगे। अब आप सांसद संजय सिंह ने इसी के साथ योगी सरकार के जांच पर भी सवाल उठाया है और कहा है कि सारे अधिकारियों के खिलाफ जांच कराकर इनको जेल में भेजना चाहिए। इन सब की जांच हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआईटी बनाकर और सीबीआई के द्वारा कराई जानी चाहिए। यह एक बड़ा भ्रष्टाचार का मामला है, जिसमें खुद अधिकारी, विधायक और भाजपा के नेता शामिल है। अब यह मामला टूल पकड़ता उससे पहले आयकर विभाग के मुंबई में बैठे अधिकारियों को सपना आया और पण मसाले से जुड़े एक व्यवसाई के कानपुर, कन्नौज और मुंबई स्थित ठिकानों पर छापे मारी कर दी।
(लेखक देश के जाने माने पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

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