उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में चौरी-चौरा घटना पर आधारित नाटक होंगे

उत्तर प्रदेश

डॉ दिलीप अग्निहोत्री

लखनऊ। कोई भी कला सामाजिक सरोकार से जुड़ कर ही सार्थक होती है। राज्य ललित अकादमी द्वारा आयोजित कला रंग महोत्सव के माध्यम से यही सन्देश दिया गया। इसमें राष्ट्र की महान विभूतियों का स्मरण किया गया। साथ ही भारतीय लोक कलाओं की समृद्ध विरासत को भी उजागर किया गया। 

 यहां महात्मा गांधी व लाल बहादुर शास्त्री के विचारों पर आधारित चित्रकला मूर्तिकला प्रतियोगिता और लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर एकता दिवस विषयक चित्रकला मूर्तिकला प्रतियोगिता के प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चौरी-चौरा जनआंदोलन की शौर्यगाथा को शताब्दी वर्ष के तहत सामने लाने का प्रयास किया है। प्रदेश के सभी जिलों में चौरी-चौरा घटना पर आधारित नाटक होंगे। विश्व संवाद केंद्र के प्रमुख अशोक सिन्हा ने चौरी-चौरा जन आंदोलन के राष्ट्रभाव का उल्लेख किया। कहा कि कला संस्कृति समाज को जोड़ती है। महोत्सव में चित्रकारों ने चौरी- चौरा घटना पर आधारित चित्रों की रचना की।

सन्यास व समाज सेवा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सन्यास के साथ समाज सेवा का नया अध्याय लिखा है। उनके विकास व आपदा प्रबंधन मॉडल की चर्चा दुनिया में है। विकसित देश भी इस मॉडल से  प्रेरणा ले रहे है। समारोह में वर्चुअल माध्यम में संन्यास से औद्योगिक क्रान्ति की ओर विषयक अखिल भारतीय चित्रकार शिविर व प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरित हुए।

यह आयोजन कोरोना त्रासदी से संघर्ष में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के योगदान को उजागर करने के उद्देश्य से अकादमी द्वारा पिछले वर्ष जुलाई में हुआ था। इस शिविर में उनचास कलाकारों ने  कलाकृतियों का सृजन किया था।  इनमें से समिति द्वारा चयनित पांच कलाकारों को पुरष्कृत किया गया।

डॉ दिनेश शर्मा ने दिए पुरष्कार

उप मुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा ने विजेताओं को पुरष्कृत किया। उन्होंने कहा कि के माध्यम से  एक मंच पर इतने कलाकार एकत्र हुए है। वर्तमान सरकार में कला और कलाकारों की उन्नति का मार्ग प्रशस्त हो रहा है। हमारा प्रदेश साहित्य संगीत और कला से परिपूर्ण प्रदेश है।

अलग अलग अंचल में अलग अलग कलाएं हैं। अकादमी के इस आयोजन में आकर अनेक चित्र कृतियों में कलाकारों के उकेरे भाव देखने को मिले, अकादमी का कार्य उल्लेखनीय है। विशिष्ट अतिथि अवध प्रांत के संगठन मंत्री घनश्याम शाही ने आयोजन पर कहा कि संवेदनशील कलाकारों ने कोरोना काल की अनुभूतियों को भी अपनी दृष्टि से कृतियों में उतारा है।

इससे पहले अकादमी के सचिव डा.यशवंत ठाकुर ने अकादमी की गतिविधियों से परिचित कराया। अकादमी के अध्यक्ष सीताराम कश्यप व उपाध्यक्ष गिरीशचन्द्र मिश्र ने अतिथियों व कलाकारों का आभार व्यक्त किया। तीन दिनों में कुल एक सौ एक कलाकारों को पुरस्कृत व सम्मानित किया गया। साथ ही आज सम्पन्न हुए चित्रकार शिविर के कलाकारों को प्रमाण पत्र प्रदान किये। इस अवसर पर डॉ दिनेश शर्मा ने प्रतियोगिताओं व चौतीसनवीं प्रदर्शनी के तीन कैटलाॅग का विमोचन का विमोचन किया।

लॉक डाउन व पर्यावरण

कोरोना काल में हुए लॉक डाउन ने यातायात को पूरी तरह बंद कर दिया था। इसका प्रभाव पर्यावरण पर भी परिलक्षित हुआ था। विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में लाॅकडाउन अवधि में बदलता पर्यावरण विषयक कला प्रतियोगिता का आयोजन पिछले वर्ष  जून में हुई थी।

अकादमी संस्कार भारती और राष्ट्रीय कला मंच,अवध प्रान्त के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस प्रतियोगिता से चयनित कृतियों में से प्रत्येक क्षेत्र से पांच कलाकारों को प्रतीक चिन्ह व प्रमाण पत्र प्रदान किये गये। 

आकर्षक प्रदर्शनी

लाल बारादरी भवन की दीर्घा में जारी चौतीसनवीं राज्य स्तरीय प्रदर्शनी की कृतियों और छतर मंजिल परिसर में लगी प्रतियोगिताओं की पुरस्कृत कृतियों के साथ ही आगरा,झांसी, वाराणसी,प्रयागराज, बस्ती,अयोध्या, कानपुर, बरेली,सहारनपुर और राजधानी लखनऊ की संस्थाओं द्वारा आयोजित कृतियों की प्रदर्शनी को देखने कलाकार और कलाप्रेमी बराबर आते रहे। लाल बारादरी भवन कलादीर्घा  छतर मंजिल मे लगी प्रदर्शनियों की कई कृतियां आकर्षण की केंद्र रही। इसमें मूर्तिशिल्प शिविर और चित्रकार शिविर की कृतियां भी प्रदर्शित थीं।

लोक संगीत संध्या छतर मंजिल परिसर में  आयोजित की गई। जिसमें लखनऊ के लोक गायक मगन मिश्र ने स्तुति गीत से प्रारम्भ करके कई मधुर लोक गीत अपने दल के साथ सुनाए। इसी तरह लखनऊ के ध्रुव ने भी श्रवणीय लोक गीत पेश किये। गोण्डा की उर्मिला पाण्डेय के दल की नृत्य  प्रस्तुतियां भी प्रदेश के रीति-रिवाजों, संस्कारों और परम्पराओं को दर्शाने वाली दर्शकों के लिए मनोहारी रहीं।

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