कोरोना संक्रमण मे सार्वजनिक शौचालय की बड़ी भूमिका

राष्ट्रीय

स्लम बस्तियों मे बढ़ते कोरोना मरीज

मुंबई. कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या मे स्लम के पब्लिक शौचालयों की बढ़ी भूमिका है। स्लम इलाकों मे लोग सार्वजनिक शौचालयों का उपयोग करते हैं। परिस्थिती भयावह होने के बाद भी मनपा की ओर से झोपड़पट्टियों के कॉमन शौचालयों को डेली सेनिटाइज़ नही किया जा रहा है। मुंबई की आधी जनसँख्या घनी झोंपड़ियों मे रहता है। धारावी संक्रमण इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।

पश्चिम उपनगर की क्रांतिनगर झोपड़पट्टी मे पिछले दिनों दो मरीज (चाचा-भतीजा) कोरोना पॉजिटिव पाये गये थे। इसके बाद यह संख्या लगातार बढ़ने लगी, जो आज इस क्षेत्र मे 40 की संख्या को क्रास कर रही है। स्थानीय लोगों कहना है कि हम 24 घंटे भले ही अपने घरों मे बने रहें, लेकिन सुबह शाम पब्लिक टॉयलेट मे ही जाना पड़ता है। वहां साफ सफाई की कोई व्यवस्था नही है। लोग आज भी गुटखा खाकर शौचालय की दिवारों पर थूक रहे हैं।

कांदिवली की सबसे बड़ी झोपड़पट्टी क्रांतिनगर सबसे घनी आबादी वाली बस्ती है। इससे सटकर गोकुलनगर, गांधीनगर मे भी कोरोना पैर पसारने लगा है। गांधीनगर मे स्थानीय समाज सेवियों द्वारा शुरुआती दौर मे सेनिटाइजेशन किया गया था। लेकिन आज स्थिति ठीक नहीं है। कांग्रेस के पंकज राय व समाजसेवी जगरनाथ वर्मा ने दो से तीन बार सेनिटाइज़ किया था। जगरनाथ वर्मा का कहना है कि यहां के पब्लिक टॉयलेट को रोजाना सेनिटाइज़ करने की जरूरत है। उन्होने बताया कि इस संबंध मे हम स्थानीय विधायक से बात कर रहे हैं।

आप्पापाड़ा के सुनिल शुक्ला व करियाप्रसाद यादव का कहना है कि स्लम इलाकों मे अभी भी 95 प्रतिशत लोग सार्वजनिक शौचालय का उपयोग करते हैं, जहां सफाई की कोई व्यवस्था नही है।

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