कौन है महाराष्ट्र की मदर टेरेसा? पंद्रह सौ बच्चों की इस मां को मिला पद्मश्री पुरस्कार

मुंबई राष्ट्रीय

विजय यादव/न्यूज़ स्टैंड18
मुंबई। कभी ट्रेन में भूख मंगाकर पेट की आग बुझाने वाली एक 73 साल की बुजुर्ग महिला को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा गया। इतना ही चिता की आग से पेट की आग बुझाने वाली यह देवी आज 1500 बच्चों की मां हैं।
महाराष्ट्र के वर्धा जिले की सिंधु ताई सकपाल कभी खुद बेसहारा बन भीख मांग कर जीवन बिताती थी आज महाराष्ट्र में उनके 6 अनाथ आश्रम हैं, जहां कोई बच्चा खुद को अनाथ नहीं मानता।
इनके जीवन की कहानी बड़ी रोचक और दर्दनाक है। सिंधु ताई का जन्म 14 नवंबर 1948 को वर्धा जिले के पिंपरी मेघे गांव में हुआ था। 10 साल की ही उम्र में एक 20 साल के युवक के साथ उनका विवाह कर दिया गया। विवाह के बाद जब वह गर्भवती हुई तो इनके पति ने पेट पर लात मारकर घर से निकाल दिया।
इस कम उम्र की मां ने गऊशाला में एक बेटी को जन्म दिया। जन्म के बाद नाल भी इन्होंने खुद अपने हाथों से काटा। खुद बेघर होने की वजह से बेटी को रेलवे स्टेशन पर लावारिश छोड़ दी। इसके बाद ट्रेन में भीख मांग कर गुजरा करने लगी।कुछ ही दिनों बाद इन्हे स्टेशन पर एक लावारिस बच्चा मिला। इन्हे अपनी बेटी के इसी तहर छोड़ने की याद ताजा हो गई। आंखे भर आई।
इसके बाद इस मां उस बच्चे को सहारा दिया और यहीं से इनके जीवन का बदलाव शुरू हो गया। आज 6 संस्थाएं चलाने वाली सिंधु ताई के पास गोद लिए बच्चों से 150 से अधिक बहुएं और 300 के करीब दामाद हैं।

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