क्या बिल से बाहर निकलेंगे परमबीर!

फीचर मुंबई

अजय भट्टाचार्य
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क्या यह मान लिया जाये कि आज मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह बिल (गड्ढे) से बाहर आएंगे! उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर संरक्षण की मांग की है। गत 22 जुलाई को मुंबई के मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन ने परमबीर सिंह के अलावा पांच अन्य पुलिसकर्मियों और दो अन्य लोगों के खिलाफ एक बिल्डर से कथित तौर पर 15 करोड़ रुपये मांगने के आरोप में केस दर्ज किया था। आरोप है कि आरोपियों ने एक-दूसरे की मिलीभगत से शिकायतकर्ता के होटल और बार के खिलाफ कार्रवाई का डर दिखाकर 11.92 लाख रुपये की उगाही की थी। इस मामले की जांच मुंबई पुलिस की अपराध शाखा कर रही है. उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद से उनका कोई सुराग पुलिस के पास नहीं है। परमबीर सिंह ने मुंबई के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख पर भ्रष्टाचार और जबरन वसूली का आरोप लगाया था। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लिखे पत्र में उन्होंने देशमुख पर हस्तक्षेप करने और हर महीने 100 करोड़ रुपये तक की जबरन वसूली करने के लिए पुलिस का उपयोग करने का आरोप लगाया था। उन्होंने मुकेश अंबानी बम मामले में जांच धीमी होने पर पद से हटाए जाने के कुछ दिनों बाद यह पत्र लिखा था। मगर घटनाक्रम कुछ ऐसे बदले हैं कि अब परमबीर ही भागे-भागे नजर आ रहे हैं। जबकि देशमुख धन शोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय में पेश हो चुके हैं और फ़िलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
पिछले दिनों परमबीर की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह को फिलहाल संरक्षण नहीं मिलेगा, जब तक ये बताया नहीं जाएगा कि वो कहां हैं? क्या आप देश में हैं? देश से बाहर हैं? सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय किशन कौल ने कहा – आप किसी जांच में शामिल नहीं हुए हैं. आप सुरक्षा आदेश मांग रहे हैं। हमारा शक गलत हो सकता है लेकिन अगर आप कहीं विदेश में हैं और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इंतजार कर रहे हैं तो हम इसे कैसे दे सकते हैं? सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 22 नवंबर को बताएं कि परमबीर कहां हैं। इस पूरे मामले पर परमबीर की ओर से कहा गया कि अगर मुझे सांस लेने की इजाजत मिले तो मैं गड्ढे से बाहर आ जाऊंगा। आज यानी 22 नवंबर को इस मामले में अगली सुनवाई है और सबकी निगाह उस गड्ढे पर है जहाँ परमबीर सिंह बिल बनाकर छिपे हुए हैं।
इससे पहले मुंबई की एक अदालत ने परमबीर सिंह को भगोड़ा क्रिमिनल घोषित करने की अनुमति दे दी थी। जिसके बाद अब मुंबई पुलिस उन्हें वांछित आरोपी घोषित कर सकती है और मीडिया सहित सभी संभावित स्थानों पर भगोड़ा घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। जानकारी के मुताबिक यदि परमबीर सिंह 30 दिनों में कानून के सामने नहीं आते हैं, तो मुंबई पुलिस उनकी संपत्तियों को कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू कर सकेगी। महत्वपूर्ण यह भी है कि 100 करोड़ रूपये वसूली मामले में परमबीर अदालत में हलफनामा दे चुके हैं कि उनके पास इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि देशमुख ने 100 करोड़ रूपये की वसूली का लक्ष्य दिया था। इसके अलावा मुकेश अंबानी के आवास एंटेलिया मामले में भी परमबीर की भूमिका की जाँच होने की पूरी संभावना है जिसमें परमबीर के चहेते अफसर सचिन वझे सहित कई पुलिस अधिकारी सलाखों के पीछे हैं।
(लेखक देश के जाने माने पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

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