गरीबों के साथ दिखावे का छलावा

राजनीति लेख

अजय भट्टाचार्य
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दो तस्वीरें हैं एक तस्वीर एक साल पुरानी है जब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की मेजबानी बांकुरा- I के चतुरडीही गाँव आदिवासी बिभीषण हांसदा ने की थी और भाजपा ने अमित शाह के इस आदिवासी प्रेम का धुआंधार प्रचार किया था। अब हांसदा ने भाजपा पर अपनी मधुमेह रोगी बेटी रचना को मुफ्त दवाओं के साथ इलाज में मदद करने के अपने वादे से मुकरने का आरोप लगाया है। दूसरी तस्वीर पिछले सोमवार की है जब खंड विकास अधिकारी के नेतृत्व में राज्य सरकार के अधिकारियों की एक टीम ने गरीब किसान को उसके लिए दवाएं और इंसुलिन उपलब्ध कराई ताकि उसकी बेटी का इलाज हो सके।


हंसदा का आरोप है कि उन्हें पिछले चार महीनों से कोई मदद नहीं मिली और उन्होंने भाजपा नेताओं पर पार्टी के विधानसभा चुनाव में हार के बाद शांत होने का आरोप लगाया। हंसदा की दुर्दशा पर कोलकाता के एक अंग्रेजी अख़बार ने खबर प्रकाशित की थी। मगर स्थानीय भाजपा नेताओं ने उपेक्षा के आरोपों से इनकार किया था और कहा था कि जैसे ही कोविड की स्थिति में सुधार होगा, लड़की को एम्स दिल्ली ले जाया जाएगा। बहरहाल अब राज्य स्वास्थ्य विभाग ने हंसदा की लड़की के इलाज के लिए पहल शुरू कर दी है। खंड विकास अधिकार अंजन चौधरी के अनुसार “लड़की (रचना) को मधुमेह है और उसे हर महीने 5,000 रुपये के इंसुलिन की जरूरत होती है। हमने उसे दो महीने के लिए दवाएं दी हैं और परिवार को स्थानीय स्वास्थ्य कर्मचारियों को उनकी जरूरतों के बारे में सूचित करने के लिए कहा गया है। अब हंसदा वास्तव में खुश है कि सरकारी अधिकारियों ने उसकी बेटी के लिए दवा और इंसुलिन उपलब्ध कराया। बेटी के इलाज के लिए हर महीने 5,000 रुपये खर्च करना उसके लिए बहुत मुश्किल है। हंसदा महीने में बमुश्किल केवल 10,000 रुपये ही कमा पाते हैं। शाह ने पिछले साल बांकुड़ा का दौरा किया था और विधानसभा चुनाव से पहले भगवा पार्टी के आदिवासी आउटरीच के हिस्से के रूप में हंसदा के घर पर खाना खाया था।


हंसदा की तरह ही उत्तर 24-परगना में एक गरीब राजवंशी परिवार के सदस्यों ने भी बंगाल भाजपा पर विधानसभा चुनाव से पहले झूठे वादे करने का आरोप लगाया। बशीरहाट के शिभाती-संग्रामपुर गांव में भाइयों जॉयदेब मंडल और कालीपाड़ा मंडल और उनके परिवार के सदस्यों ने आरोप लगाया कि पार्टी ने घर की एक छोटी बेटी के इलाज में मदद करने के वादे से भी मुंह मोड़ लिया, जो ठीक से बोल नहीं सकती। मंडल परिवार ने 4 जनवरी को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय के लिए दोपहर के भोजन की मेजबानी की थी। विधानसभा चुनावों से पहले इस तरह का लंच राज्य के दलित समुदायों के लिए भाजपा के सामाजिक आउटरीच कार्यक्रमों का हिस्सा था। मंडल को राय के लिए ऐसा ही एक लंच आयोजित करने का मौका मिला। मंत्री और अन्य नेताओं ने उन्हें एक अच्छा जीवन, एक घर, बेटी के लिए नौकरी और उसकी आवाज की समस्या को ठीक करने के लिए चिकित्सा सहायता का आश्वासन दिया। लेकिन भाजपा चुनाव हार गई और उसके बाद से किसी नेता ने इस परिवार से संपर्क नहीं किया। हम अपनी 21 वर्षीय बेटी प्रियंका के लिए चिकित्सा सहायता के लिए सबसे अधिक उत्सुक थे, जिसे बचपन से ही वोकल कॉर्ड की समस्या है। वह एक स्नातक है। प्रियंका के माँ-बाप खेत मजदूर हैं और बमुश्किल 6,000 रुपये प्रति माह कमा पाते हैं। कालीपाड़ा की पत्नी चंपा मंडल ने राय के लिए अपने मानकों के अनुसार पनीर, ढोका और नोलन गुरर पेयेश सहित शानदार भोजन पकाया। प्रियंका ने कहा कि वे राज्य सरकार द्वारा दिए गए राशन और समर्थन पर जीवित हैं। भाजपा के बशीरहाट जिलाध्यक्ष और मंत्रीजी के भोज के संयोजक तारक घोष कहते है यह परिवार हमारी पार्टी का समर्थक है, लंच के बदले कोई वादा नहीं किया गया था। वैसे यह भी सच है कि इसी तरह की भोजन कूटनीति के जरिये भाजपा ने इलाके में आदिवासी और दलित समुदाय के मतदाताओं का समर्थन जुटाने की कोशिश की थी। लेकिन चुनाव परिणामों ने उनकी चाल का खुलासा कर दिया।
(लेखक देश के जाने माने पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

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