तराई की लड़ाई में फंसी टेनी पर कार्रवाई

उत्तर प्रदेश फीचर

अजय भट्टाचार्य
लखीमपुर
कांड के खलनायक पर एसआईटी की रिपोर्ट के बाद उत्तर प्रदेश में चुनावी घमासान से पहले दिल्ली से लेकर लखनऊ तक केंद्रीय गृह राज्य मंत्री और खीरी के सांसद अजय मिश्रा टेनी के इस्तीफे की मांग ने जोर पकड़ लिया है। टेनी को लेकर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बसपा मोदी और योगी सरकार पर हमलावर है। कल संसद से विजय चौक तक कांग्रेस नेता राहुल गाँधी की अगुवाई में 17 दलों के नेता जुलुस में शामिल हुए। दूसरी तरफ भाजपा हाई कमान ने टेनी के इस्तीफे को लेकर गजब की चुप्पी साध रखी है। कारण यह है कि लखीमपुर से सटे अन्य जिलों की कुल 42 सीटों में भाजपा पिछले चुनाव में 35 सीटें जीती थी। इसके अलावा उत्तर प्रदेश का तराई क्षेत्र किसान आन्दोलन के चलते सरकार से नाराज है। टेनी का असर आस-पास के क्षेत्रों की ब्राह्मण राजनीति पर भी है और भाजपा पहले से ही ब्राह्मणों का गुस्सा झेल रही है। ऐसे में चाहकर भी टेनी को फ़िलहाल मंत्री बनाये रखना उसकी मजबूरी है।

बताया जा रहा है कि चुनाव से पहले भाजपा आलाकमान टेनी को हटाकर किसी भी तरह का खतरा मोल नहीं लेना चाहता है। भाजपा को पता है कि अजय मिश्रा टेनी का प्रभाव तराई इलाकों में है। ऐसे में अगर भाजपा हाई कमान उनपर कार्रवाई करता है, तो इन इलाकों में सीटों पर असर पड़ सकता है। हालांकि यह पहला मामला नहीं है, जब भाजपा हाईकमान किसी रसूखदार नेता पर कार्रवाई करने को लेकर पेशोपेश में है। इससे पहले भी उप्र भाजपा के कई नेताओं पर कार्रवाई को लेकर पार्टी हाईकमान की किरकिरी हो चुकी है। उन्नाव के विधायक विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर बलात्कार का आरोप लगा, तो पुलिस जांच बैठा दी। इस दरम्यान कुछ दिनों के भीतर ही पीड़िता के पिता की रहस्यमय मौत हो गई, जिसके बाद इस मामले ने तूल पकड़ लिया। सेंगर के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान में लेकर जब मामले की सुनवाई की और सरकार को फटकार लगाई, इसके बाद भाजपा ने कुलदीप सिंह सेंगर को पार्टी से निलंबित किया। इस मामले में सेंगर को सजा हो गई है और फ़िलहाल वह जेल में है।

दूसरा मामला उप्र के प्राथमिक शिक्षा राज्यमंत्री सतीश द्विवेदी से जुड़ा है। द्विवेदी के भाई पर इसी साल मई में आरोप लगा कि आर्थिक कमजोर तबके (ईडब्ल्यूएस) के कोटे से सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नौकरी हासिल कर ली, जिसके बाद विपक्ष ने सरकार पर हमला बोल दिया। सपा ने इस मुद्दे पर मंत्री के ऊपर आरोप लगाया और निष्पक्ष जांच होने तक इस्तीफा देने की मांग की। काफी किरकिरी होने के बाद सतीश द्विवेदी के भाई ने खुद नौकरी से इस्तीफा दे दिया। तब कहीं यह मामला शांत हुआ। जहाँ तक लखीमपुर खीरी कांड की बात है तो जिले में 3 अक्टूबर को हुए तिकुनिया हिंसाकांड मामले में मुख्य आरोपी केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा की जमानत सत्र न्यायालय द्वारा ख़ारिज कर दी गई है।

जमानत के लिए दाखिल की गई अर्जी के कागजों में खामी के चलते कोर्ट ने प्रार्थना पत्र को अस्वीकार कर दिया। अब आशीष मिश्रा को फिर से जमानत के लिए कोर्ट में अर्जी दाखिल करनी होगी। साथ ही कोर्ट ने तिकुनिया हिंसा में शामिल पांच अन्य आरोपी अंकित दास, शिवनंदन, लतीफ, शेखर और सत्यम की जमानत अर्जी को भी खारिज कर दिया है। इस मामले में पुलिस की उस वक्त किरकिरी हो गई जब एसआईटी ने पूरे प्रकरण को हत्या की साजिश बताया और गंभीर धाराएं जोड़ दीं। पुलिस ने आशीष मिश्रा पर धारा 307 की जगह 279, 326 की जगह 338 और धारा 341 की जगह 304 A लगाया था। एसआईटी ने कहा कि भादवि की धारा 279, 338 और 304ए की जगह 307, 326, 34 और आर्म्स एक्ट की धारा 3/25/30 लगायी जाए। भादवि की धारा 307 जान से मारने का प्रयास, 326 – खतरनाक आयुधों (डेंजरस वेपन) या साधनों से गंभीर आघात पहुंचाना, 34 – कई व्यक्तियों के साथ मिलकर एक जैसा अपराध करना और आर्म्स एक्ट की धारा 3/25/30 लाइसेंसी हथियार का गलत प्रयोग करना है।
(लेखक देश के जाने माने पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

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