दहेज के खिलाफ खड़े होते युवा

फीचर साहित्य

अजय भट्टाचार्य
दहेज़
प्रथा एक सामाजिक बुराई होते हुए भी परंपरा के कंधे पर सवार होकर हमारे बीच विद्यमान है। पिछले लंबे समय से इस कुरीति के खिलाफ सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं के स्तर पर काम चलता रहा है जिसका परिणाम यह है कि आज का युवा दहेज़ से ज्यादा अपने जीवनसाथी की काबिलियत को महत्व दे रहा है। पिछले दिनों राजस्थान के

सीकर. राजस्थान में अब युवा दहेज जैसी सामाजिक बुराई के खिलाफ खड़े होने लग गये हैं. पिछले कुछ समय में राजस्थान के विभिन्न इलाकों से ऐसी कई खबरें सामने आई हैं जब दूल्हा और दुल्हन ने दहेज प्रथा के खिलाफ आवाज उठाई है। ऐसा ही एक और उदाहरण सामने आया है शेखावाटी इलाके के सीकर जिले के डालमास से जहाँ दूल्हे ने वधू पक्ष की ओर से टीके की रस्म के तौर पर दिये जा रहे पांच लाख रुपये लौटाकर अनूठा उदाहरण पेश किया है। डालमास गांव निवासी महेंद्र सिंह शेखावत के पुत्र देवेंद्र सिंह शेखावत का विवाह चूरू जिले के रतनगढ़ के फ्रांसा गांव निवासी बजरंग की राठौड़ निवासी सोनू कंवर के साथ हुआ है। बीते रविवार 28 नवंबर को हुये इस विवाह में वधू पक्ष की ओर से दूल्हे को टीके की रस्म में 5 लाख रुपये भेंट किये गये। लेकिन दूल्हे देवेन्द्र सिंह ने दहेज रूपी इस भेंट को लेने से मना कर दिया। दूल्हे ने आदर के साथ ये कहते हुये टीके के रुपये नहीं लिये कि वह इस बुराई को नहीं अपनाना चाहता है। वह खुद मेहनत कर कमाने में विश्वास करता है। दूल्हे ने कहा कि वे अपने हाथों को पवित्र रखना चाहता है लिहाजा वह इस रकम को हाथ भी नहीं लगायेगा। वह अपनी मेहनत पर विश्वास करता है। दूल्हे और उसके परिजनों को भावनायें देखकर वधू पक्ष के लोग भावुक हो गये। उन्होंने कहा कि समाज की पुरानी भूलों को नई पीढ़ी सुधारने का प्रायस कर रही है इससे बड़ी बात कोई हो नहीं सकती। दूल्हे और उनके पिता ने यह पैसे लेने से इनकार कर समाज में एक मिसाल पेश की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अन्य लोग भी दूल्हे और उसके पिता से प्रेरणा लेकर समाज सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठायेंगे। इससे पहले पश्चिमी राजस्थान में भी एक शादी में दुल्हन ने अपने पिता से अनूठी मांग करके चौंका दिया था। बाड़मेर में किशोर सिंह कानोड़ की बेटी अंजलि कंवर की शादी थी। अंजलि कंवर ने अपने पिता से कहा कि उसे दहेज नहीं चाहिये। वे दहेज में जितनी राशि उसे देना चाहते हो वह समाज की बेटियों के लिए गर्ल्स हॉस्टल के निर्माण के लिए दे दें। इस पर पिता ने बेटी के सपने को पूरा करने के 75 लाख रुपये गर्ल्स हॉस्टल के लिये भेंट कर दिये। अंजलि कंवर की शादी प्रवीण सिंह पुत्र मदन सिंह भाटी रणधा के साथ हुई है। राजस्थान में राजपूत समाज में पहली बार किसी बेटी ने दहेज में बेटियों की शिक्षा के लिए छात्रावास की अनोखी मांग रखी।

दरअसल दहेज जैसी कुरीति से निपटने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा के साथ-साथ अच्छे संस्कार भी दें। विवाह समारोह में दिखावे से बचें और ‘अपनी बेटी को ही तो दे रहे हैं’ की ग्रंथि से बाहर आयें। हिंदू मनीषा में शादी को भी जीवन के चार आश्रमों में दूसरे गृहस्थ आश्रम के लिए अनिवार्य कहा गया है। यदि हम दाम्पत्य जीवन को आश्रम की उपमा से सुशोभित करते हैं तो यह तभी संभव है जब उसमें शांति हो। विडंबना यह है कि अब भी हमारे समाज में दहेज मांगने वाले लोग मौजूद हैं जो ‘हमें कुछ नहीं चाहिये, आप अपनी बेटी को कुछ देते हैं तो हम मना भी नहीं करेंगे।‘ कहकर दहेज लेते हैं। राजस्थान के युवाओं ने वह राह दिखाई है जिस पर हर किसी को ध्यान देना चाहिये और अपने जीवन में भी उस राह पर चलने का संकल्प करना चाहिये।
(लेखक देश के जाने माने पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

Leave a Reply

Your email address will not be published.