देवेगौडा-मोदी शिष्टाचार भेंट के निहितार्थ

राजनीति लेख

अजय भट्टाचार्य
पिछले
हफ्ते जनता दल सेक्युलर के संरक्षक और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौडा ने दिल्ली जाकर वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ‘शिष्टाचार’ भेंट की थी। राजनीति में धुर विरोधी दलों के नेताओं के बीच प्राय: इस तरह की ‘शिष्टाचार’ भेंटें होती रहती हैं।

इस मुलाकात के बाद देवेगौड़ा ने कर्नाटक के मांड्या में एक संवादाता सम्मेलन किया और बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए उनका सम्मान तब कई गुना बढ़ गया, जब उन्होंने लोकसभा से इस्तीफा देने की उनकी इच्छा ठुकरा दी। देवेगौड़ा ने उक्त घटना को याद करते हुए कहा कि, ‘‘मैंने उनसे कहा था कि अगर आप 276 सीटें जीतते हैं तो मैं इस्तीफा दे दूंगा। आप दूसरों के साथ गठबंधन करके शासन कर सकते हैं, लेकिन अगर आप अपने दम पर 276 सीटें जीतते हैं, तो मैं (लोकसभा से) इस्तीफा दे दूंगा।’ उन्होंने कहा कि भाजपा अपने दम पर सत्ता में आई, जिसके बाद उन्हें अपने किए वादे को पूरा करने की इच्छा हुई। जीत के बाद, मोदी ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था।

समारोह समाप्त होने के बाद, उन्होंने मोदी से मिलने का समय मांगा, जिसके लिए वह सहमत हो गए। जब उनकी कार संसद के बरामदे में पहुंची तो प्रधानमंत्री मोदी खुद वहां उनका स्वागत करने पहुंचे। देवेगौड़ा ने कहा, ‘‘मुझे तब घुटने में दर्द था, जो अभी भी है। वह जिस भी तरह के व्यक्ति हों, उस दिन जब मेरी कार वहां पहुंची, मोदी खुद आए, मेरा हाथ पकड़कर मुझे अंदर ले गए। यह व्यवहार उस व्यक्ति के लिए था, जिसने उनका (मोदी) इतना विरोध किया था।“ अब अचानक सात साल बाद देवेगौडा को पता चला कि वे मोदी के प्रशंसक हैं! कारण? क्योंकि कर्नाटक में 20 सीटों के एमएलसी चुनाव का प्रचार चल रहा था जिसके लिए कल यानि 10 दिसंबर को मतदान भी हो गया। जिन 20 सीटों के लिए मतदान हुआ इनमें बीदर, गुलबर्गा, बीजापुर, बेलगाम, उत्तर कन्नड़, धारवाड़, रायचूर, बेल्लारी, चित्रदुर्ग, शिमोगा, दक्षिण कन्नड़, चिकमगलूर, हसन, तुमकुर, मांड्या, बैंगलोर, बैंगलोर ग्रामीण, कोलार, कोडागु और मैसूर शामिल हैं।

जिन सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें समाज कल्याण मंत्री और सदन के नेता कोटा श्रीनिवास पुजारी, उपाध्यक्ष एम.के. प्रणेश, विपक्ष के नेता एस.आर. पाटिल, पूर्व अध्यक्ष के प्रतापचंद्र शेट्टी, वरिष्ठ कांग्रेस नेता के.सी. कोंडैया, भाजपा, कांग्रेस और जद (एस) के मुख्य सचेतक महंतेश कवाटागीमठ, एम. नारायणस्वामी और अप्पाजी गौड़ा, के नाम शामिल हैं। कांग्रेस के श्रीनिवास माने का कार्यकाल भी 5 जनवरी को समाप्त हो रहा है। वह हंगल से उपचुनाव में विधानसभा के लिए चुने गए हैं। चुनावों को भाजपा के लिए 75 सदस्यीय सदन में बहुमत हासिल करने के एक बड़े अवसर के रूप में देखा जा रहा है, यह हंगल और सिंदगी विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनावों के कड़वे अनुभव भाजपा को मिल चुके हैं। वर्तमान में, उच्च सदन में भाजपा के 32सदस्य, कांग्रेस के 29 सदस्य और जनता दल (सेक्युलर) के 12 सदस्य, एक निर्दलीय सदस्य और अध्यक्ष हैं। सदन से सेवानिवृत्त होने वाले 25 सदस्यों में से अधिकतम कांग्रेस (13) से हैं, जिसने भाजपा से हंगल विधानसभा क्षेत्र को छीन लिया, उसके बाद भाजपा (6), जद (एस) (5) सदस्य और एक निर्दलीय हैं।

इन चुनावों की घोषणा के बाद जद (एस) नेता एचडी कुमारस्वामी ने भाजपा के साथ गठबंधन से इनकार करते हुए कहा था कि यह निर्णय 2023 के विधानसभा चुनाव की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी या भविष्य में अन्य दलों के साथ कोई गठबंधन नहीं है। इसके बाद दिल्ली में मोदी और एचडी देवेगौड़ा के बीच ‘शिष्टाचार’ भेंट ने विधान परिषद चुनावों के लिए दोनों दलों के बीच किसी तरह की समझ की अफवाहों को तेज कर दिया था। 14 दिसंबर को एमएलसी चुनाव के परिणाम आएंगे तभी देवेगौड़ा-मोदी शिष्टाचार भेंट का मतलब भी समझ में आयेगा।
(लेखक देश के जाने माने पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

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