पेट की आग बुझाने के लिए बेटी की साइकल बेच दी फिर भी आग नहीं बुझी तो पूरा परिवार जहर पी लिया

राष्ट्रीय

न्यूज़ स्टैंड18 नेटवर्क
बडोदरा। पेट की भूख किस स्थिति में पहुंचा देगी शायद ही कोई समझा हो। बडोदरा के एक व्यापारी को लॉक डाउन के चलते घाटा हुआ तो उसने कारोबार को खड़ा करने के लिए कर्ज ले लिया। घाटा आगे भी जारी रहा तो ब्याज चुकाने के लिए घर बेच दिया। मुसीबत का इतने से ही मन नहीं भरा उसने परिवार की भूख मिटाने के लिए बेटी की सायकल 500 रुपए में बिकवा दी। आखिर इस पापी पेट की तपन कम ना हुई तो उसने जहर पी लिया।
यह घटना उस गुजरात की है जहां के लोग देश में अच्छे कारोबारी के रूप में अपनी पहचान रखते हैं। यहां के बडोदरा मे नरेंद्र सोनी (68) के परिवार में कुल 6 सदस्य थे। पत्नी दीप्ति, बेटा भाविन, बहू उर्वशी, बेटी रिया और 4 साल का पोता पार्थ। पिछले कुछ समय से यह परिवार घाटे में चल रहे कारोबार को लेकर बहुत परेशान था। इनका बडोदरा मे इमिटेशन ज्वेलरी का कारोबार था। यह धंधा जब नहीं चला तो उन्होंने प्लास्टिक का कारोबार शुरू किया। यहां भी इन्हे घाटा लगा। धंधे से टूटी पूंजी को सही करने के लिए कर्ज लिया। तब कोई सफलता नहीं मिली। आखिर में नरेंद्र ने 25 लाख रुपए में अपना मकान बेच दिया। इसके बाद किराए के घर में रहने लगे।

रसोई की खर्च के साथ अब हर महिने किराए की भी समस्या सामने आ गई। फिर अपनी मोपेड बेच दी। एक घर में राशन के लिए इन्होंने बेटी की सायकल 500 रुपए में बेच दी। आखिर में जहर पीकर जान देने का फैसला किया और 4 साल के मासूम पोते के साथ सभी ने कोल्ड्रिंक्स में जहर मिलाकर पी लिया।
कीटनाशक पीने से जब पोते की हालत बिगड़ने लगी तब घर दूसरे सदस्य चीखने चिल्लाने लगे। आवाज सुनकर पड़ोस के लोग घर में पहुंचे। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पड़ोसियों ने तत्काल अस्पताल पहुंचाने के लिए लोडिंग टैम्पो का सहारा लिया। पोता पार्थ अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया।
खबर लिखे जाने तक नरेंद्र, बेटी रिया (17) और पोते पार्थ की मौत हो गई थी। बाकी बहू उर्वशी, बेटे भाविन और पत्नी दीप्ति का अस्पताल में इलाज चल रहा है। पुलिस मामले की आगे छानबीन कर रही है।

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