बंगाल भाजपा ने विधानसभा चुनाव की गलती सुधारी

फीचर राजनीति

अजय भट्टाचार्य
विधानसभा
चुनाव नतीजों से सीख लेकर कोलकाता नगरनिगम चुनाव की उम्मीदवारी देने में भाजपा ने बाहरियों को ठेंगा दिखा दिया है। 294 सीटों वाली बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने तृणमूल सहित अन्य दलों से पार्टी में शामिल हुए लोगों को 140 सीटों पर उम्मीदवारी दी थी। खबर है की इस बार तृणमूल के एक पूर्व विधायक के बेटे सहित कई बाहरी उम्मीदवारों ने भाजपा का दरवाजा खटखटाया था मगर भाजपा ने कोई भाव नहीं दिया। इस बार केएमसी की 144 सीटों में भाजपा ने 40 साल से कम उम्र वाले 48 पार्टी उम्मीदवारों को टिकट दिया है। 50 से अधिक महिला और 9 अल्पसंख्यक उम्मीदवार भाजपा की सूची में शामिल हैं। गैंगस्टर गोपाल तिवारी की पत्नी कामिनी तिवारी को वार्ड 24 से उम्मीदवारी को अपवाद माना जा सकता है। गोपाल पहले तृणमूल में ही था। उसे 2015 में एक पुलिस वाले पर गोली चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

भाजपा ने प्रत्याशियों की सूची में बाहरी उम्मीदवारों की स्पष्ट अनुपस्थिति ने विधानसभा चुनाव तक अपनी रणनीति में एक बड़ा बदलाव किया, जिसमें भाजपा ने 294 सीटों वाले सदन के लिए 140 से अधिक बाहर से आये नेताओं को मैदान में उतारा था। इस कदम ने न केवल पार्टी के भीतर कई वर्गों को नाराज कर दिया था, बल्कि मतदाताओं ने भी इसे काफी हद तक खारिज कर दिया था। चुनाव में सबसे ज्यादा बाहरी भाजपाई ही हारे थे। पहले से ही कमजोर पार्टी संगठन में और असंतोष को रोकने के लिए यह एक कदम उठाया गया। राज्य के उपाध्यक्ष और कलकत्ता निकाय चुनाव प्रबंधन समिति के प्रभारी प्रताप बनर्जी कहते हैं कि हम जमीनी स्तर से अपने कार्यकर्ताओं को (कलकत्ता निकाय चुनावों के लिए) उम्मीदवार के रूप में उतारने में सक्षम हैं। पार्टी के कई नेताओं ने कहा कि बाद में कलकत्ता सूची अनगिनत कार्यकर्ताओं और नेताओं के लिए एक महत्वपूर्ण जैतून की शाखा थी, जो पहले तृणमूल से भाजपा में आये लोगों के आगे भाजपा के “समर्पण” से कड़वी थी। वैसे यह भी सच है कि विधानसभा चुनावों में कोलकाता और उसके पड़ोस की विधानसभा सीटों पर भाजपा का खाता भी नहीं खुल पाया है। तृणमूल के 60-प्रतिशत की तुलना में केएमसी के तहत क्षेत्र में भाजपा मुश्किल से 20 प्रतिशत मिले थे। फ़िलहाल 144 सदस्यीय कोलकाता नगर निगम में तृणमूल के 133 पार्षद हैं। भाजपा के 9 पार्षद हैं।

पार्टी ने बाहरियों को टिकट देने से इसलिये भी परहेज किया कि जीतने के बाद वे तृणमूल में वापस जा सकते हैं। इसीलिये एक पूर्व विधायक के बेटे सहित तृणमूल के कम से कम दो नेताओं ने इस बार ममता द्वारा इनकार किए जाने के बाद टिकट के लिए भाजपा से संपर्क किया, लेकिन पार्टी द्वारा उन्हें भाव नहीं किया गया। भाजपा ने अपने तीन विजयी उम्मीदवारों को बरकरार रखा है। भाजपा के राज्य मुख्यालय 6 मुरलीधर सेन लेन में विफल उम्मीदवारों के कम से कम तीन विरोध प्रदर्शन हुए, लेकिन 2015 में पिछले निकाय चुनावों के लिए सूची जारी होने के बाद विरोध प्रदर्शनों की तुलना में कम रहा।
(लेखक देश के जाने माने पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

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