महाभारत मे भीष्म का किरदार निभाने वाले मुकेश खन्ना से खास बातचीत

मनोरंजन राष्ट्रीय

हस्तिनापुर के दुर्योधन से आजका दुर्योधन ज्यादा दुष्ट- भीष्म 

घर का हर बुजुर्ग गंगापुत्र से ज्यादा विवश है 

लॉकडाउन मे शकुनी के भान्जों घर से बाहर मत निकलो 

विजय यादव

मुंबई. आज का शकूनी महाभारत के शकूनी से ज्यादा काइयां और हस्तिनापुर के दुर्योधन से आजका दुर्योधन ज्यादा दुष्ट हो गया है। यह बेवाक शब्द हैं महाभारत सीरियल मे भीष्म पितामह की भूमिका निभाने वाले प्रसिद्ध अभिनेता मुकेश खन्ना के। एक खास बातचीत मे उन्होने ने कहा कि हर घर के एक कोने मे बैठा बुजुर्ग भी भीष्म की तरह है। जो तब के गंगापुत्र से ज्यादा विवश है। दूरदर्शन पर महाभारत का दुबारा प्रसारण चल रहा है, जिसे एक बार फिर देश-विदेश मे खासी लोकप्रियता मिल रही है। वर्तमान प्रसारण मे भीष्म पितामह कुरुक्षेत्र मे बाणो की शय्या पर पड़े हैं। 

जब भीष्म से पूछा गया कि महाभारत काल व आज की राजनीति मे क्या फर्क देखते हैं? तो उन्होने जवाब मे कहा कि आज की राजनीति ज्यादा विकट हो गई है। भीष्म पितामह चाहते तो धृतराष्ट्र को बलपूर्वक हटा कर सत्ता पर काबिज हो सकते थे। वह चाहते तो दुर्योधन को द्युत क्रीडा से भी रोक देते, लेकिन वे अपने वचन से बंधे थे। धृतराष्ट्र पुत्रमोह मे सबकुछ करते चले गये, इसके बाद भी पितामह हस्तिनापुर की सुरक्षा मे लगे रहे। मेरा कहने का तात्पर्य यह है कि बगैर पावर के वह देश की सुरक्षा करते रहे, जबकि आज के नेताओं को कुछ करने से पहले सत्ता का पावर चाहिए। जब तक यह पावर मे नही आयेंगे तबतक जनता की सेवा नही करेंगे। जो नेता विपक्ष मे है वह सिर्फ झगड़ा करेगा। आज विपक्ष सिर्फ विरोध करने के लिये है। 

उन्होने आगे कहा कि सत्ता मे बैठा दल सच भी कह रहा हो तब भी विपक्ष सही नही कहेगा। क्योंकि उसे सिर्फ विरोध करना है। आज के नेता देशहित मे नही बल्कि पार्टी हित मे काम कर रहे हैं। पितामह कहते थे कि चाहे जो जीते लेकिन हारेगा हमारा हस्तिनापुर। आज यह बात नही है। आजका नेता यह नही सोचता की भले ही कोई जीते नुकशान तो हमारे हिन्दूस्तान का ही होगा। 

भीष्म पितामह सबकुछ जानते हुये भी अपना वचन निभाने के लिये दुर्योधन का साथ दिया क्या आज की राजनीति मे संभव है? इसके जवाब मे उन्होने कहा भीष्म इनविन्सिबल वारियर्स थे। एक अपराजय योद्धा होते हुये भी उन्होने पिता को दिये वचन को निभाते रहे जो आज संभव नही है। आज के युग मे वह गंगापुत्र नही मिलेगा। 

भीष्म के आलावा शक्तिमान के रुप मे भी आपको खूब ख्याति मिली दोनो मे आप किसे सबसे ज्यादा पसंद करते हैं? हमे दोनो पसंद रहे। हां यह सच है की पितामह के चरित्र मे हमे ज्यादा स्कोप मिला है। दोनो करेक्टर इनविन्सिबल है जिसे कोई मार नही सकता। वैल्यू वाइज मै शक्तिमान को ज्यादा महत्व देता हूं। आज तीस साल के बाद भी मेरी इमेज पितामह वाली ही है। आज भी कार्यक्रमों मे मै लोगों को आयुष्मान बोलता हूं। एक बार हमने डा. अब्दुल कलाम को भी आयुष्मान कहा था। 

वर्तमान हालात पर एक आखिरी सवाल है, क्या कोरोना के रुप मे मनुष्य को प्रकृति का दंड मिल रहा है? उन्होने इसके जवाब मे कहा कि इसे दो तरिके से देखा जा सकता है। जैसा की ट्रम्प इसे चाईनिज वायरस कह रहे हैं। दुनिया भी यही मान रही है। अगर चीन ने इसे लैब मे बनाया है तो इसका परिप्रेक्ष्य अलग हो जाता है। वहीं इसे प्राकृतिक माना जाय तो इससे सबसे ज्यादा फायदा प्रकृति को हुआ है। अरबो-खरबो खर्च कर मनुष्य जो गंगा साफ नही कर सका था वह महिने भर मे निर्मल हो गई। पंजाब से हिमालय दिख रहा है। ओजोन लेअर मे बढोत्तरी हो रही है। उन्होने आगे कहा कि जैसे हमारा कम्प्यूटर हैंग होने लगता है तो हम रिफ्रेस करते हैं उसी तरह आज कोरोना के बहाने प्रकृति भी खुद को रिफ्रेस कर रही है। मेरा तो सुझाव है जैसे हम योग दिवस मनाते हैं उसी तरह साल मे एक महिने  लॉकडाउन डे मनाये। कोई कहेगा अर्थ व्यवस्था को नुकशान होगा। मेरा मानना है जब स्वस्थ रहोगे तभी तो अर्थ (धन) का उपयोग करोगे। 

अंत मे मेरा यही कहना है कि लॉकडाउन का उल्लंघन करने वाले शकुनी के भान्जों अभी भी समय है घरों मे बैठ जाओ। अनावश्यक बाहर मत निकलो वरना शक्तिमान तुम्हे अंतरिक्ष मे फेंक देगा। सभी लोग पुलिस, डाक्टर और सरकार का साथ दें। सभी के सहयोग से ही हमे कोरोना पर विजय मिलेगी। 

Leave a Reply

Your email address will not be published.