माँ का विश्वास जीता, 29 साल बाद मिला बेटा

लेख

अजय भट्टाचार्य
29 साल पहले 10 दिसंबर 1992 को रामकोट के मकवाल निवासी कुलदीप सिंह अचानक लापता हो गये थे। कई दिनों तक जब कुलदीप नहीं लौटा तो परिजन भी कई जगह पूछताछ करने लगे। जहां भी किसी ने उसके देखने की सूचना दी, घरवाले वहां पहुंच जाते, लेकिन कुलदीप की जानकारी नहीं मिली। उस समय कुलदीप की उम्र 24 साल थी। जबकि उसकी पत्नी उर्मिला की उम्र 21 साल थी। उस वक्त उसका एक बेटा केवल तीन माह का था।

परिवार के लोग कुलदीप को खोजकर थक चुके थे तभी अचानक चार साल बाद कुलदीप का 1996 में पहला सन्देश मिला तो परिवार की बिखरी उम्मीदें फिर से जीवित हो उठीं। मकवाल निवासी कुलदीप सिंह पाकिस्तान की कोट लखपत सेंट्रल जेल लाहौर के बैरक नंबर चार में बंद था। यही वह पता था जहां से परिवार को उसके बाद कुलदीप सिंह की जानकारी मिलती रही। कुलदीप से मिलने की उम्मीद में पिछले 29 सालों में मां की आंखें तरस गई थीं। इन आंखों से अब खुशी के आंसू बह रहे हैं। कुलदीप सिंह की मां कृष्णा देवी का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि सांस लेने से पहले वह अपने बेटे से मिल पाएंगी। मां ने कहा कि उनका बेटा बेहद साहसी है। वह नहीं जानता कि वह पाकिस्तान कैसे पहुंचा, लेकिन उसे उम्मीद थी कि उसका बेटा एक दिन लौट आएगा। इतने दिनों में कुलदीप की मां ने बेटे का चेहरा देखने की उम्मीदों को टूटने नहीं दिया। तीन दशक बाद ही सही भगवान ने उनकी प्रार्थना सुनी है। घर से लापता हुआ कुलदीप करीब तीन दशक के इंतजार के बाद पाकिस्तान से स्वदेश लौटा है। हालांकि, कुलदीप का अभी घरवालों से मिलना बाकी है। वे भी उस समय का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं जब वे उसे छू सकें और उसे गले लगा सकें। कुलदीप के वाघा बॉर्डर से भारत के प्रवेश के साथ ही मां की आंखों से खुशी के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। वह अपने बेटे को गले लगाने के लिए उत्सुक है। कुलदीप के तीन दशक बाद घर लौटने से उसे आशियानें में उत्सव का माहौल है। कुलदीप की 50 वर्षीय पत्नी उर्मिला की तो खुशी का ठिकाना नहीं है और पति के वापस लौटने पर वो दुल्हन की तरह संजने की तैयारी कर रही है। कुलदीप का बच्चा बढ़ते वक्त के साथ 29 बरस का हो गया।
(लेखक देश के जाने माने पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

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