याददाश्त ने छीन लिए 25 साल

लेख

अजय भट्टाचार्य
नियति
निगल गई 25 साल
अपने माँ-बाप के बीच बैठे 47 साल के फरीदुल इस्लाम मियां को 25 साल बाद यह मौका मिला है। कानून की पेचीदगियों ने फरीदुल इस्लाम की जिन्दगी के 25 बेहतरीन साल निगल लिए। अब वास्तविक और सीधे तौर पर रील लाइफ से बाहर यादों से भरे अतीत के साथ इस्लाम पश्चिम बंगाल अलीपुरद्वार स्थित अपने घर लौटे हैं। उन्हें एक व्यवसायी की हत्या और पाकिस्तानी नागरिक होने के झूठे आरोपों में दो बार गिरफ्तार किया गया था। अपनी याददाश्त खो दी और अंत में इसे हाल ही में याददाश्त वापस आने पर उसे अपनी जड़ों का पता लगाने में मदद मिली।
जिले के फलकता प्रखंड के चेंगमरीतारी गांव निवासी फरीदुल 25 साल पहले नौकरी की तलाश में दिल्ली गया था। जहाँ गोकुलपुरी में एक व्यवसायी के लिए काम करना शुरू किया, लेकिन कुछ वर्षों के बाद, व्यवसायी की हत्या कर दी गई। फरीदुल को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और वह 10 महीने के लिए जेल में बंद था। जहाँ उसे अवसाद ने घेर लिया। इसके बाद फरीदुल के दोस्त ने पानीपत की एक लड़की से उसका निकाह करवा दिया। लेकिन उसकी जिन्दगी से स्थिरता काफी दूर रही। कुछ साल बाद फरीदुल को एक बार फिर गिरफ्तार कर लिया गया क्योंकि किसी ने शिकायत की थी कि वह एक पाकिस्तानी नागरिक है। मजबूरी यह कि अपने भारतीय होने का उसके पास एकमात्र सबूत मतदाता पहचान पत्र था जो उस व्यापारी ने अपने पास रख लिया था जिसकी हत्या हुई थी और इल्जाम फरीदुल के मत्थे मढ़ दिया गया था। व्यापारी के शत फरीदुल कि नागरिकता संबंधी पहचान भी मर गई। नतीजतन फरीदुल पांच महीने तक तिहाड़ जेल में रहा। तभी अचानक एक फ़रिश्ता उसकी जिन्दगी में वकील बनकर आया और बिना एक पैसा लिए उसका मामला उठाने का फैसला किया। इधर में काम करने से फरीदुल के स्वास्थ्य पर असर पड़ा। फरीदुल एक बेटे और एक बेटी का पिता बन गया और पानीपत में अपने परिवार के पास लौट आया, लेकिन वह अचानक सब कुछ भूल गया और उसका लगातार इलाज चल रहा था। मानो या न मानो, परिवार के सदस्यों ने कहा कि कुछ महीने पहले, फरीदुल ने अचानक अपने गाँव का नाम लिया और यहाँ तक कि अपने स्कूल का नाम नथुनी सिंह हायर सेकेंडरी स्कूल भी याद आ गया। उनके बेटे ने तुरंत गूगल पर स्कूल का पता लगाया और अपने पिता को स्कूल की तस्वीर दिखाई। हैरानी की बात है कि तस्वीर देखकर फरीदुल को सब कुछ याद आ गया। फरीदुल ने फौरन अपनी वापसी की तैयारी शुरू कर दी। फरीदुल के पिता पहिरुद्दीन मिया की आंखों में आंसू थे। उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था कि फरीदुल वापस आ गया था क्योंकि वे यकीन कर चुके थे कि उसे अपने जीवनकाल में नहीं देख पाएंगे। वे हमेशा सोचते थे कि उनके बेटे साथ ऐसा क्या हुआ होगा कि वह इतने सालों तक उसने अपने माँ-बाप, परिवार से संपर्क नहीं किया। अब घर वापस आने के बाद फरीदुल का कहना है, “मैं अब इस जगह को कभी नहीं छोड़ूंगा। मुझे उम्मीद है कि किसी को भी इस तरह की परीक्षा से नहीं गुजरना पड़ेगा।“

(लेखक देश के जाने माने पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

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