राजनीति के चूल्हे पर अमित शाह के साथ क्या पका रहे पवार?

राजनीति

विजय यादव
मुंबई। अहमदाबाद में NCP सुप्रीमो शरद पवार और अमित शाह की मुलाकात को लेकर राजनीति का चूल्हा कुछ ज्यादा ही गर्म हो गया है। लोग अलग – अलग कयास लगा रहे हैं। चूल्हे की आंच को शिवसेना के मुखपत्र सामना में भी देखा जा रहा है। सामना मे अनिल देशमुख को एक्सीडेंटल गृह मंत्री बता कर इशारा कर दिया गया है कि सबकुछ ठीक नहीं है।
शरद पवार अपने खास प्रफुल्ल पटेल के साथ गुजरात के अहमदाबाद में शनिवार व रविवार की बीच वाली रात एक निजी फार्म हाउस में मुलाकात की। इस गुजरात यात्रा के लिए शरद पवार ने एक निजी जेट विमान का इस्तेमाल किया। इस मुलाकात पर पत्रकारों ने जब अमित शाह से सवाल किया तो वह मुस्कुराते हुए सिर्फ इतना जवाब दिए कि सबकुछ सार्वजनिक नहीं किया जाता। गृह मंत्री की इसी मुस्कुराहट मे चूल्हे पर पकने वाले पकवान की रेसिपी छुपी है।
शरद पवार राजनीत मे कैरम बोर्ड के उस सफल खिलाड़ी की तरह हैं जो स्ट्राइकर से सीधे गोटी पर वार नहीं करता। वह वार कहीं करता है और निशाना किसी गोटी पर। शरद पवार की यह मुलाकात ऐसे समय पर अमित शाह से हुई है जब परमबीर सिंह के लेटर को लेकर अनिल देशमुख की कुर्सी खतरे में पड़ी है। इस मामले की जांच केन्द्रीय एजेंसी NIA कर रही है। देशमुख को लेकर शिवसेना से तनाव भी बढ़ता जा रहा है, क्योंकि इस मुद्दे को लेकर राज्य मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लगातार विपक्ष के हमले का सामना करना पड़ रहा है।
अब सवाल यह उठता है कि आखिर अचानक पवार को अमित शाह से मिलने की जरूरत क्यों पड़ी। इसका हल खोजने से पहले पवार के कुछ पुराने राजनीति निर्णयों को देखना और समझना होगा। यही शरद पावर हैं जो कांग्रेस के शीर्ष नेता थे। कई दफा राज्य के मुख्यमंत्री होने के साथ केंद्र मे भी कांग्रेस सरकार मे मंत्री रहे। लेकिन जब सोनिया गांधी को पार्टी अध्यक्ष बनाने की बात आई तो तुरंत विदेशी महिला का मुद्दा बनाकर कांग्रेस से अलग हो गए और नया दल बना किया। कांग्रेस की तुलना में अभी शिवसेना के साथ इनकी इतनी प्रगाढ़ता नहीं है कि इन्हे कोई नया निर्णय लेने में कोई हिचक हो। हां महाराष्ट्र की राजनीति में इस बात की हमेशा चर्चा रही की शरद पवार का बाला साहब ठाकरे के साथ अच्छे संबंध हैं। सही मायने में देखा जाए तो NCP कुछ राजनीतिक मजबूरियों के चलते शिवसेना के साथ सत्ता में आई थी। अजित पवार पर लगे सिंचाई घोटाला आरोप, लवासा प्रोजेक्ट कुछ उदाहरण हैं।
क्या समझा जाय कि पवार पाला बदल सकते हैं? या परमबीर सिंह द्वारा अनिल देशमुख को दिए दर्द की दवा खोजने अमित शाह के पास गए थे। बात चाहे जो हो, फिलहाल बस इतना ही कहा जा सकता है कि राजनीति की हांडी कुछ ऐसा जरूर पक रहा है जो शिवसेना का स्वाद खराब कर सकता है।

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