लाल रंग और राजनीतिक नफा नुकसान

राजनीति लेख

अजय भट्टाचार्य
मंगलवार
को दोपहर दो बजे पीएमओ इंडिया के वैरिफाइड ट्विटर हैंडल से किए गए “लाल टोपी” वाला ट्वीट राजनीतिक अखाड़े में आने के बाद विपक्षी दल हमलावर रुख में आ गए हैं। पीएमओ इंडिया के वैरिफाइड ट्विटर हैंडल से प्रधानसेवक नरेंद्र मोदी के समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए बयान के कई ट्वीट किए गए थे। विपक्षी दलों का कहना है कि यह सरकारी हैंडल है, निजी नहीं। सरकार को यह भाषा प्रयोग नहीं करना चाहिये। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने एक निजी टीवी चैनल से कहा कि, ‘प्रधानमंत्री के ऑफिशियल टि्वटर हैंडल से इस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जाना गलत है। खुद मोदी जी काली टोपी लगाते हैं, उनकी पार्टी काली टोपी लगाती है, उनकी मातृ संस्था भी काली टोपी लगाती है। यह काली टोपी लगाने वाले काले दिमाग के साथ काला कानून लाते हैं। मुझे हैरानी नहीं होगी अगर वह लाल किला का नाम बदलकर काला किला कर दें। क्या वह 15 अगस्त को काला किले पर झंडा फहराएंगे?’ सपा सांसद जया बच्चन के मुताबिक प्रधानमंत्री घबराए हुए हैं, इसलिए कुछ भी बोल रहे हैं। यह उनके लिए रेड अलर्ट है, उत्तर प्रदेश में लाल टोपी आने वाली है। तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा ने भी सवाल दागा है कि पीएमओ के हैंडल से ऐसे ट्वीट कैसे कर सकते हैं। ये जनता के पैसे से चलता है, पार्टी फंड से नहीं। पीएमओ सरकारी दफ्तर है, निजी नहीं। पीएमओ के हैंडल से इस तरह की भाषा वाले ट्वीट करने का कोई तुक ही नहीं बनता। अगर आपको ये ट्वीट करने हैं तो पर्सनल हैंडल से करें। इधर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘लाल टोपी’ वाले बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाषा बिगाड़ रहे हैं, क्योंकि उन्होंने अपने वादे पूरे नहीं किए, इसलिए उन्हें भाषा बदलनी पड़ी है। यह लाल रंग भावनाओं का रंग है, लाल रंग क्रान्ति का प्रतीक है, लाल रंग बदलाव का प्रतीक है। वो जानते हैं इस बार उप्र में बदलाव होने जा रहा है। ये एक रंगी लोग भावनाएं नहीं समझ सकते।‘ राजद सांसद मनोझ झा ने कहा, ‘राजनीति शर्मायी हुई है। जाने क्या हुआ आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर रहे है। हमने कभी भगवा पर टिप्पणी नहीं की। इस तरह लाल रंग पर टिप्पणी चुनाव को जोड़ना प्रधानमंत्री पद की मर्यादा के अनुरूप नहीं है। प्रधानमंत्री चुनाव के दौरान ज़्यादा ही बदल जाते है। देश को दो पीएम चाहिए एक चुनाव कराए दूसरे सरकार चलाये। पीएमओ इंडिया के वैरिफाइड ट्विटर हैंडल से 7 दिसंबर को लड़ीवार ट्वीट किए गए थे जिसमें समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए लिखा गया है, “आज पूरा यूपी भली-भांति जानता है कि लाल टोपी वालों को लाल बत्ती से मतलब रहा है, आपकी दुख-तकलीफों से नहीं। लाल टोपी वालों को सत्ता चाहिए, घोटालों के लिए, अपनी तिजोरी भरने के लिए, अवैध कब्जों के लिए, माफियाओं को खुली छूट देने के लिए। दूसरे ट्वीट में भी लगभग यही भाषा इस्तेमाल की गई थी जिसमे लिखा गया, “लाल टोपी वालों को सरकार बनानी है, आतंकवादियों पर मेहरबानी दिखाने के लिए, आतंकियों को जेल से छुड़ाने के लिए। और इसलिए, याद रखिए, लाल टोपी वाले यूपी के लिए रेड अलर्ट हैं यानि खतरे की घंटी।
दरअसल जिसे विपक्ष प्रधानमंत्री की भाषा का गिरता स्तर कह रहा है, वह भाजपा की सोची समझी रणनीति का ही हिस्सा है। उत्तर प्रदेश के चुनाव में बताने के लिए भाजपा के पास बड़ा सा जीरो है। जो बताया जा रहा है उससे एक वर्ग विशेष को अपने पाले में बनाये रखने के लिए धार्मिक, सामुदायिक और सांप्रदायिक विषय चुनावी विमर्श में लाना जरुरी भी है। यह चुनाव भी धीरे-धीरे धार्मिक ध्रुवीकरण की तरफ ले जाने की नीति पर भाजपा के रणनीतिकार लगातार लगे हुए हैं। इसलिये आम जनता से जुड़े गरीबी, बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, किसान आदि के मुद्दे चुनावी चर्चा से गायब किये जा रहे हैं।

जहाँ तक लाल टोपी का सवाल है तो इन तस्वीरों पर भी गौर करना चाहिये। क्या लाल टोपी पहनने वाले लोग वाकई खतरा है?
(लेखक देश के जाने माने पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

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