विजयवर्गीय को जेल या बेल !

फीचर राष्ट्रीय

अजय भट्टाचार्य
भारतीय
जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पश्चिम बंगाल प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय के लिए आज का दिन महत्वपूर्ण है। पश्चिम बंगाल में महिला के यौन शौषण के मामले में उनकी गिरफ्तारी पर आज फैसला होना है। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने विजयवर्गीय की याचिका पर महिला और पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी कर कलकत्ता हाईकोर्ट को विजयवर्गीय को गिरफ्तारी से संरक्षण को आगे बढ़ाने पर विचार करने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में महिला शिकायतकर्ता की भी सुनवाई जरूरी है, 16 नवंबर को इस मामले की सुनवाई होनी है। इस मामले की पिछली सुनवाई 25 अक्टूबर को हुई थी जिसमें जस्टिस एमआर शाह ने कहा था कि हाईकोर्ट अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई जारी रख सकता है। वो विजयवर्गीय व अन्य दो को गिरफ्तारी से संरक्षण आगे बढ़ा सकता है।

उधर, विजयवर्गीय की ओर से कहा गया कि शुरुआत में यौन शोषण के आरोप नहीं थे। इन आरोपों को बाद में जोड़ा गया। पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से कपिल सिब्बल ने कहा कि वो इस मामले में कुछ कहना नहीं चाहते। इस मामले को अदालत पर छोड़ते हैं। कलकत्ता हाईकोर्ट ने अलीपुर में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द कर दिया था। साथ ही भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय, आरएसएस सदस्य जिष्णु बसु और प्रदीप जोशी के खिलाफ यौन उत्पीड़न के मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। कुछ दिन पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी नेता कैलाश विजयवर्गीय, आरएसएस सदस्य जिष्णु बसु और प्रदीप जोशी को मारपीट के एक मामले में अग्रिम जमानत दे दी थी। हाईकोर्ट ने उक्त नेताओं अग्रिम जमानत इस आधार पर दी कि मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है।


हाईकोर्ट ने कहा कि तीनों को 25 अक्टूबर तक जमानत दी जानी चाहिए, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मामले की सुनवाई होनी है। न्यायमूर्ति हरीश टंडन और न्यायमूर्ति कौशिक चंदा की पीठ विजयवर्गीय सहित अन्य जमानत याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इसमें मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अलीपुर के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें पीड़ित महिला द्वारा दायर शिकायत को एफआईआर के रूप में मानने का निर्देश दिया गया था। दरअसल पीड़ित महिला ने आरोप लगाया था कि विजयवर्गीय ने उसे अपने फ्लैट पर बुलाया, जहां जमानत के आवेदकों ने एक के बाद एक उसके साथ रेप किया। फिर उसे फ्लैट छोड़ने के लिए मजबूर किया गया। इसके अलावा, यह आरोप लगाया गया कि उसके बाद से उसे कई मौकों और स्थानों पर 39 बार से ज्यादा शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। इसके बाद उसने दिनांक 20 दिसंबर, 2019 को तहत दो शिकायतें दर्ज कराई। हालांकि, कोई भी एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इसके बाद, 12 नवंबर, 2020 को एफआईआर दर्ज करने की याचिका की जिसे सीजेएम, अलीपुर ने खारिज कर दिया। उक्त आदेश को हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी गई। सीजेएम, अलीपुर के आदेश को रद्द कर दिया गया और इसके बाद मामले को सीजेएम, अलीपुर को पुनर्विचार के लिए वापस भेज दिया गया। अक्टूबर, 2021 को हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेशों के आधार पर सीजेएम कोर्ट ने शिकायत को एफआईआर के रूप में मानने का निर्देश दिया। अदालत के समक्ष याचिकाकर्ताओं के वकील द्वारा यह तर्क दिया गया कि महिला द्वारा दर्ज की गई दो शिकायतों में निचली अदालत के समक्ष उसके आवेदन में कथित अपराध की गंभीरता के बारे में कोई चर्चा नहीं की गई।

तीनों पर 29 नवंबर 2018 को शरत बोस रोड स्थित एक फ्लैट में एक महिला के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म करने का आरोप लगा है। घटना के बाद से कथित रूप से आरोपी ने उनके और उनके परिवार पर धमकी देने का आरोप लगाया था। धमकी के इसी आरोप के आधार पर 2019 में सरसुना और 2020 में बोलपुर में शिकायत दर्ज कराई गई थी। हालांकि पुलिस ने सरसुना थाने की शिकायत (क्लोजर रिपोर्ट दाखिल) का निस्तारण कर दिया है। उक्त महिला ने 2000 में अलीपुर निचली अदालत का दरवाजा खटखटाया था। वहां उन्होंने गैंग रेप का आरोप लगाया। उन्होंने जज से एफआईआर दर्ज करने की अपील की थी।

अलीपुर कोर्ट ने महिला की अपील की खारिज कर दी थी। इस साल 1 अक्टूबर को कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विवेक चौधरी ने निचली अदालत को उनकी अपील पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया। न्यायाधीश ने आठ अक्टूबर को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था। उसी दिन कैलाश विजयवर्गीय समेत तीन लोगों के खिलाफ भवानीपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। तीनों ने अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कहा कि उन्हें जांच शुरू किए चार दिन हुए हैं। शरत बोस रोड स्थित उस फ्लैट के दो पर्यवेक्षकों के बयान लिए गए हैं। फ्लैट पर कैलाश विजयवर्गीय समेत एक से अधिक लोग पार्टी का काम करने आते थे। जांच में पता चला कि फ्लैट पवन रुइयां के नाम पर है और कैलाश विजयवर्गीय ने किराए पर लिया था।


(लेखक देश के जाने माने पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

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