श्रद्धांजलि का मजाक बनाती राजनीति

फीचर राष्ट्रीय

अजय भट्टाचार्य
“स्वर्णिम विजय पर्व’
के अवसर पर मैं भारतीय सेना के सभी बहादुर जवानों को हार्दिक बधाई देता हूं. भारतीय सेना की 1971 की लड़ाई में जीत की 50 वीं वर्षगाठ को हम विजय पर्व के तौर पर मना रहे हैं। मैं इस पावन पर्व पर सशस्त्र सेना के वीर जवानों को याद करते हुए उनके बलिदान पर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। 12 से 14 दिसंबर तक इंडिया गेट पर विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। यह बड़े सौभाग्य की बात है कि विजय पर्व अमर जवान ज्योति के लौ की छावों में आयोजित किया जा रहा है, जो कि हमारे वीर शहीदों की याद में स्थापित की गई थी। हम सभी देशवासियों को इस विजय पर्व के जश्न में सम्मिलित होने के लिए आमंत्रित करते हैं।

अपनी सेनाओं पर है गर्व, आओ मिलकर मनाए विजय पर्व। जय हिंद!” यह वह सन्देश है जिसे देश के पहले सैन्यकर्मियों के प्रमुख जनरल विपिन रावत (Bipin Ravat) ने अपनी म्रत्यु से एक दिन पहले रिकॉर्ड कराया था और जिसका प्रसारण कल दिल्ली स्थित इंडिया गेट (India Gate) पर आयोजित ‘स्वर्णिम विजय पर्व’ के उद्घाटन के अवसर पर किया गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उद्घाटन सत्र में कहा कि आज हम सभी इंडिया गेट पर 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध में मिली जीत पर इस पर्व को मनाने के लिए जुटे हुए हैं। भारत ने बांग्लादेश में लोकतंत्र की स्थापना में योगदान दिया है। दुर्योग से जनरल रावत अब हमारे बीच नहीं हैं मगर उनका वीडियो संदेश है। वैसे उल्लेखनीय यह भी है कि असली विजय पर्व 16 दिसंबर के दिन होता है जिस दिन 1971 में पाकिस्तानी सेनानायकों ने अपनी हार मानते हुए समर्पण के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किये थे।
इससे ठीक एक दिन पहले उत्तर प्रदेश के बलराम पुर में सरयू नहर परियोजना राष्ट्र को समर्पित करते हुए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनरल रावत सहितं उस दुर्घटना में मारे गये सभी सैन्य अधिकारियों/कर्मियों को श्रद्धांजलि भी दी। अपने सेना नायकों को श्रद्धांजलि देने में कोई गलत बात भी नहीं है। लेकिन श्रद्धांजलि देने में नियत साफ होना चाहिये। देश ने अपने शीर्ष सेनानायक सहित 12 सैन्यकर्मी खोये हैं। उनको श्रद्धांजलि देने के समय यदि राजनीतिक नारेबाजी होगी तो यह श्रद्धांजलि भी मगरमच्छ के आंसू ही कही जाएगी। घटना 9 दिसंबर की है जब तमिलनाडू में हादसे का शिकार हुए सीडीएस जनरल बिपिन रावत का अंतिम संस्कार (बीते शुक्रवार को) दिल्ली कैंट स्थित बराड़ चौक पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया। उन्हें श्रद्धांजलि देने राहुल गांधी व किसान नेता राकेश टिकैत जैसे अन्य गणमान्य भी पहुंचे। लेकिन इसी बीच उनके आवास के बाहर खड़े लोगों ने ‘राकेश टिकैत मुर्दाबाद’ (Rakesh Tikait) के नारे लगाने शुरू कर दिये।

इतना ही नहीं, लोगों ने उनके साथ धक्का-मुक्की तक की। राकेश टिकैत के साथ हुए इस व्यवहार को लेकर पूर्व आईएएस सूर्य प्रताप सिंह भड़के नजर आए, साथ ही उन्होंने मामले को लेकर भाजपा पर भी जमकर हमला बोला। पूर्व आईएएस ने राकेश टिकैत के साथ हुए व्यवहार का वीडियो साझा किया और लिखा, “जनरल बिपिन रावत के अंतिम संस्कार को भी भाजपाइयों ने किसानों के अपमान के लिए इस्तेमाल कर लिया। ये राकेश टिकैत का नहीं पूरे किसान मजदूर समाज के साथ-साथ सेना का भी अपमान है। सब याद रखा जाएगा।”राकेश टिकैत से जुड़े इस वीडियो में एक शख्स कहता सुनाई दिया, “राकेश टिकैत देश का दुश्मन है। देशवासियों को बहुत पीछे ले गया है, इसलिए ‘मुर्दाबाद’ के नारे लगाए जा रहे हैं।” वहीं दूसरे व्यक्ति ने कहा, “ऐसे लोगों को महान विभूति के अंतिम दर्शन के लिए नहीं आना चाहिए।”

अब जिन्हें किसान और उनके नेता गद्दार नजर आते हैं उन्हें यह भी जान लेना चाहिये कि किसान भी अपनी जान जोखिम में डालकर खेती करता है। नील गायों और अन्य जंगली जानवरों से खेती बचाने के लिए रात-रात भर खेत में मचान बांधकर पहरा देता है। जहरीले साँपों, बिच्छुओं से बचते हुए खेत की निराई-गुड़ाई-सिंचाई करता है। सिर्फ नारेबाजी देशभक्ति का पैमाना नहीं हो सकते। सेनानायकों की श्रद्धांजलि में खींसे निपोरते लोग देशभक्ति का ढोंग मात्र करते हैं। इस लेख के साथ संलग्न चित्र को देखें। देशभक्ति की स्वयंभू ठेकेदार संस्था द्वारा कानपुर के पुखराया में शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित मोमबत्ती यात्रा कार्यक्रम में जो सज्जन दांत चियार रहे हैं वे भोगनीपुर से भाजपा विधायक विनोद (Vinod Katiyar) कटियार हैं। इनकी इस खिलखिलाती श्रद्धांजलि के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे नहीं गूंजेंगे! वैसे अब विधायकजी ने इस फोटो को फर्जी बताते हुए एफआईआर करा दी है। चलिए मान लें विधायकजी नहीं हंस रहे थे लेकिन उनके ठीक सामने गले में लाल मफलर लपेटे सज्जन क्या मुस्कराते हुए रो रहे हैं!
(लेखक देश के जाने माने पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

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