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राम वन गमन और भरत मिलाप प्रसंग से भाव-विभोर हुए श्रद्धालु

न्यूज स्टैंड18 नेटवर्क
कल्याण।
कल्याण पश्चिम के परदेसी ग्राउंड में उत्तर विकास सामाजिक संस्था (रजि.) द्वारा आयोजित तुलसीकृत श्री रामचरितमानस कथा में मंगलवार को राम वन गमन और भरत मिलाप का अत्यंत मार्मिक एवं भावपूर्ण वर्णन किया गया। अयोध्या के प्रसिद्ध कथा वाचक पूज्य गायत्री नंदन महाराज जी के सजीव चित्रण से पूरा पांडाल भाव-विभोर हो उठा।
कथा के दौरान महाराज जी ने बताया कि जब माता कैकेयी के वरदान के कारण भगवान श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास मिला, तब उन्होंने पिता की आज्ञा को सर्वोपरि मानते हुए बिना किसी विरोध के वन गमन स्वीकार कर लिया। राम के साथ माता सीता और भ्राता लक्ष्मण भी वन को प्रस्थान करते हैं। अयोध्या की प्रजा, राजा दशरथ और पूरा राजमहल इस वियोग में शोकमग्न हो जाता है। श्रीराम का त्याग, मर्यादा और कर्तव्यपालन का यह प्रसंग मानव जीवन के लिए आदर्श प्रस्तुत करता है।
इसके बाद भरत मिलाप का प्रसंग सुनाते हुए महाराज जी ने कहा कि जब भरत को वनवास की घटना का पता चला, तो वे अत्यंत व्यथित हो उठे और तुरंत श्रीराम को वापस लाने के लिए चित्रकूट पहुंचे। यहां राम-भरत मिलन का दृश्य इतना करुण और प्रेममय था कि सुनकर श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। भरत ने राज्य स्वीकार करने से इनकार करते हुए श्रीराम की चरण पादुकाएं सिंहासन पर रखकर खुद सेवक के रूप में राज्य संचालन करने का संकल्प लिया। यह प्रसंग भाईचारे, त्याग और आदर्श शासन का अद्वितीय उदाहरण है।
महामंडलेश्वर चन्द्रदेवदास जी की गरिमामय उपस्थिति और डॉ. विजय पंडित के मार्गदर्शन में आयोजित इस कथा को सफल बनाने में संस्था के अध्यक्ष रवि गुप्ता, उपाध्यक्ष बृजेश गुप्ता, कोषाध्यक्ष मिलिंद सिंह, महासचिव दिनेश अग्रहरि, कमलेश तिवारी सहित सभी सदस्य सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
कथा के मुख्य यजमान कासट परिवार हैं। कथा में आए विशेष अतिथियों का स्वागत किया गया।
हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा का श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं, जिससे पूरा वातावरण राममय हो गया है।

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