खादी से GST हटाने की मांग, उन्नाव के अधिवक्ता फारूक अहमद ने लिखा प्रधानमंत्री को पत्र

उत्तर प्रदेश समाचार

रईस खान
उन्नाव (बांगरमऊ)।
संपूर्ण भारत में ब्रिटिश शासन से गांधी आश्रमों में बिकने वाले टैक्स मुक्त खादी वस्त्रों से जीएसटी हटाए जाने की मांग फारूक अहमद एडवोकेट ने भारत के प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री व वित्त सचिव भारत सरकार के साथ ही देश के सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर की है।
तहसील क्षेत्र के ग्राम इस्माइलपुर आंबापारा निवासी उच्च न्यायालय खंडपीठ लखनऊ के वरिष्ठ अधिवक्ता तथा यश भारती सम्मान से सम्मानित प्रमुख समाजसेवी फारूक अहमद एडवोकेट ने भारत के प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री व वित्त सचिव भारत सरकार सहित देश के सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर संपूर्ण भारत में ब्रिटिश शासन से गांधी आश्रमों में बिकने वाले टैक्स मुक्त खादी वस्त्रों से GST हटाए जाने की मांग की है। फारूक अहमद एडवोकेट ने अपने पत्र में कहा है कि गुलाम भारत में जब देश की आजादी की लड़ाई भारत वासियों द्वारा लड़ी जा रही थी तब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने खादी वस्त्रों को स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन से जोड़कर शुरुआत की थी। महात्मा गांधी ने खादी वस्त्रों को कुटीर उद्योग के रूप में संपूर्ण भारत में स्थापित किया था। महात्मा गांधी स्वयं भी चरखे से सूत कातते थे, कस्तूरबा गांधी भी चरखे से कातती थीं और संपूर्ण भारत के लोग भी चरखे से सूत कातते थे, और उसी सूत से खादी वस्तुओं का निर्माण होता था। जब गुलाम भारत में ब्रिटिश सरकार ने देखा कि खादी कुटीर उद्योग ही नहीं बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलन में काफी सहायक हो रहा है, तब ब्रिटिश सरकार ने खादी वस्त्रों पर टैक्स लगाया था। जिसके विरुद्ध ब्रिटिश सरकार के खिलाफ आंदोलन के साथ-साथ मुकदमे बाजी भी हुई। जिसमें अंततः गुलाम भारत की आम जनता की ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध जीत हुई। ब्रिटिश सरकार को खादी वस्त्रों को टैक्स मुक्त करना पड़ा था।


आगे पत्र में फारूक अहमद एडवोकेट ने लिखा है कि वर्ष 1947 में देश की आजादी के बाद राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व देश के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े राजनेताओं ने खादी वस्त्रों को कुटीर उद्योग के रूप में स्थापित करने के लिए खादी वस्त्रों पर अधिक से अधिक सब्सिडी राशि भी प्रदान की और खादी ग्रामोद्योग अपनी चरम सीमा पर पहुंच गया था। खादी ग्राम उद्योग के दो व्यापक फायदे थे। पहला यह कि देश की आम जनता को रोजगार मिलता था, दूसरा देश की आम जनता को सस्ते खादी वस्त्र पहनने को मिलते थे। 1947 से देश में जीएसटी लागू होने तक गांधी आश्रम के खादी वस्त्रों पर कोई टैक्स नहीं था। साथ ही साथ भारत सरकार खादी ग्रामोद्योग को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी भी देती थी। भारत सरकार ने जब GST लागू किया तो खादी वस्त्रों पर भी लागू कर दी जिससे कि खादी ग्रामोद्योग कमजोर हुआ और कमजोर होकर लगभग बर्बादी की कगार पर पहुंच गया। साथ ही साथ खादी वस्त्र संपूर्ण भारत की गरीब आम जनता की पहुंच से बाहर हो गया। अब जीएसटी लागू हो जाने के उपरांत देश की आम जनता खादी वस्त्र महंगा होने के कारण खादी वस्त्रों का इस्तेमाल नहीं कर सकती है।
उन्होंने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में यह भी कहा है कि भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जीएसटी काउंसिल की अध्यक्षा हैं, और संपूर्ण भारत के समस्त मुख्यमंत्री जीएसटी काउंसिल के सदस्य हैं, इसलिए उन्होंने सभी को पत्र लिखकर गांधी आश्रमों में बिकने वाले समस्त खादी वस्त्रों से GST हटाए जाने की मांग की है। प्रधानमंत्री को लिखे पत्र की प्रतिलिपि वित्त मंत्री व वित्त सचिव भारत सरकार के साथ ही देश के समस्त 28 मुख्यमंत्रियों को भी प्रेषित की गई है।

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