शिक्षा के लिये उम्र बाधा नहीं

राष्ट्रीय शिक्षा

अजय भट्टाचार्य
कहते
हैं सीखने और शिक्षा ग्रहण करने की कोई उम्र नहीं होती। पिछले दिनों तमिलनाडु के मदुरै जिला स्थित वेलम्मल विद्यालय केंद्र में राष्ट्रीय प्रवेश पात्रता परीक्षा (एनईईटी) लिखने के लिए जब 55 साल किसान के के. राज्यकोडी कतार में खड़े हुए, तो उनकी आँखों में डॉक्टर बनने का उनका सपना और इसे हासिल करने का संघर्ष सामने आया।

परीक्षा केंद्र के दरवाजे पर खड़े सुरक्षा रक्षकों ने उन्हें अधिक उम्र का होने का हवाला देकर केंद्र में प्रवेश करने से रोक दिया। जब उन्होंने उन्हें हॉल टिकट दिखाया, तो अन्य उम्मीदवारों और उनके माता-पिता के चेहरे पर राज्यकोडी के प्रति अविश्वास और श्रद्धा दिखाई दी।

अंबट्टैयनपट्टी के रहने वाले राज्यक्कोडी ने 1984 में जरुरी परीक्षा उत्तीर्ण की थी और एक निजी मेडिकल कॉलेज में दाखिला भी ले लिया था, लेकिन वह पाठ्यक्रम में शामिल होने में असमर्थ थे क्योंकि वे फीस का खर्च वहन नहीं कर सकते थे। परिवार की आर्थिक तंगी ने के चलते उन्हें उसिलमपट्टी के पासुमपोन थेवर आर्ट्स एंड साइंस कॉलेज में बी.एससी भौतिकी पाठ्यक्रम से बाहर कर दिया। असफलताओं के बावजूद उनके भीतर डॉक्टर बनने के लिए पढ़ने की आग दशकों बाद फिर से धधक उठी जब पिछले साल उन्होंने सुना कि उड़ीसा के एक 64 वर्षीय व्यक्ति ने एक मेडिकल कॉलेज में सीट हासिल की थी। इस खबर ने राज्यकोडी का हौसला बढ़ाया और उन्होंने अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए रोजाना कम से कम तीन घंटे समर्पित करने का संकल्प लिया। एक और प्रेरणा उन्हें उनके घर में ही मिली जब उनके छोटे बेटे आर वासुदेवन ने अपने नीट परीक्षा के दूसरे प्रयास में 521 अंक हासिल किए और कुड्डालोर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की सीट हासिल की। राज्यकोडी ने अपने बेटे की अध्ययन सामग्री का उपयोग करते हुए पिछले एक साल में परीक्षा की तैयारी की और कई नमूना टेस्ट दिए।
55 वर्षीय राज्यकोडी जब परीक्षा भवन में प्रश्न पत्र हल करने बैठे तो उन्होंने भौतिकी और रसायन विज्ञान के नीट के प्रश्नों को आसान पाया, और 460 से अधिक अंक प्राप्त करने की उम्मीद की। अगर उन्हें किसी सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट मिलती है तो वह अपने सपने को आगे बढ़ाने की योजना बना रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published.