श्रीमाली समाज का गौरव है “अखिल भारतीय श्रीमाली महासभा”

लेख

विजय यादव
माला
अर्थात फूलों से गुथी सुंदर सी वह कच्चे धागे की डोर जो ईश्वर को प्रसन्न करने के लिए चढ़ाई जाती है तो कभी मानव सम्मान में किसी के गले का हार बन जाती है। इसी माला शब्द से बना है माली। माली शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के शब्द “माला” से हुई है। फूल उगाने के अपने व्यवसाय के कारण इन्हें “फूलमाली” भी कहा जाता है। माली जाति के इसी गौरवशाली इतिहास को देखते हुए इन्हें ब्राह्मणों से भी श्रेष्ठ बताया गया है। अपनी श्रेष्ठता की वजह से काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग की पहली पूजा का अधिकार माली समाज को है। माली भारतीय जन मानस में पाई जाने वाली एक ऐसी श्रेष्ठ जाति है, जिसके बगैर हर शुभ प्रसंग अधूरा है। यह समाज पारंपरिक रूप से बागवानी, फूल उगाने तथा कृषि कार्य करते हैं।
पौराणिक कथाओं, इतिहास, पांडुलिपियों, दंत कथाओं, विभिन्न ग्रंथों, ताम्र पत्रों और शिलालेखों के आधार पर माली समाज की उत्पत्ति की कहानी बहुत रोचक है। पौराणिक कथा के अनुसार, माली भगवान शिव और माता पार्वती के मानस पुत्र हैं। ऐसी मान्यता है कि सृष्टि के आरंभ के समय माता पार्वती ने भगवान शिव से एक सुंदर बाग बनाने की जिद कर ली। तब भगवान शंकर ने अनंत चौदस के दिन अपने कान के मैल से एक पुरुष पुतला बनाकर उसमें प्राण डाल दिए। यही पुरुष माली समाज का आदि पुरुष मनंदा कहलाया। इसी तरह से मां पार्वती ने डाभ के पुतले में प्राण फूंक कर एक सुंदर कन्या को उत्पन्न किया जो आदि कन्या सेजा कहलायी। तत्पश्चात इन दोनों को सोने और चांदी से निर्मित औजार, कुदाल आदि देकर एक सुंदर बाग के निर्माण करने का कार्य सौंपा गया। मनंदा और सेजा ने दिन- रात परिश्रम कर एक निश्चित समय सीमा के अंदर एक अत्यंत ही सुंदर बाग का निर्माण किया। यह बाग महादेव और माता पार्वती के कल्पना से भी सुंदर था। भगवान शिव और माता पार्वती इस सुंदर बाग को देखकर अत्यंत प्रसन्न हुए। महादेव ने प्रसन्न होकर कहा आज से तुम्हें माली के रूप में जाना जाएगा। इस तरह से मनंदा और सेजा का विवाह करा कर के उन्हें पृथ्वी लोक में अपना काम संभालने के लिए कहा गया। कालांतर में उनके एक पुत्री और 11 पुत्र हुए जो आगे चलकर माली जाति 12 उप जातियों में विभक्त हो गए।
ऐसे ही प्रतिष्ठित और गौरवशाली समाज का प्रतिनिधित्व “अखिल भारतीय श्रीमाली महासभा ( रजि.)” कर रहा है। यह संगठन भारत की सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी से देश की आर्थिक राजधानी मुंबई सहित पूरे देश में सराहनीय सामाजिक कार्य कर रहा है। यह सामाजिक संगठन समय-समय पर समाज सेवा में लगे रहते हैं।
अखिल भारतीय श्रीमाली महासभा के वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद श्रीमाली हैं। महाराष्ट्र अध्यक्ष के रूप में अरुण कुमार श्रीमाली समाज सेवा में जुटे हैं। इनके साथ हरिशंकर माली (महाराष्ट्र सचिव), लल्लन भगत (महाराष्ट्र संयोजक), रविन्द्र माली (महाराष्ट्र कोषाध्यक्ष), सुरेश पंडा (महाराष्ट्र प्रचार मंत्री), शिवपूजन माली (मुंबई अध्यक्ष) व रवि शंकर माली (मुंबई कोषाध्यक्ष) जैसे कर्मठ पदाधिकारी समाज के उत्थान के लिए कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं।
कोरोना काल में संस्था समाज के लोगों को घर-घर जाकर राशन पहुंचाया। बिमार लोगों के लिए मेडिकल सहायता उपलब्ध कराना। गरीब बच्चों को शिक्षा के लिए सहयोग करना। सामाजिक सम्मेलन करना व फ्री मेडिकल चेकअप कैंप लगवाना। ऐसी तमाम समाजिक सेवाओं में अखिल भारतीय श्रीमाल महासभा सदैव कार्यरत रहता है।

माली समाज की भारत में बड़ी जनसंख्या है। भारतीय अर्थव्यवस्था में इनकी एक बड़ी भागीदारी है। माली समाज हमेशा एक शांतिपूर्ण समाज के रूप में पहचाना जाता है।
अखिल भारतीय श्रीमाली महासभा की स्थापना 14 जनवरी 2007 को हुआ था। इस नाते इसी दिन स्थापना दिवस समारोह मनाया जाता है। आगामी 25 दिसंबर 2022 को रमाशंकर श्रीमाली के सुपुत्र के विवाह की खुशी में श्री दुर्गा माता मंदिर, तारांगन होटल के सामने, ससुनवघर नायगांव, किनारा होटल के आगे, मुंबई गुजरात हाईवे पर बाटी-चोखा व मासिक बैठक का आयोजन किया गया है, जो सुबह 9 बजे से 5 बजे तक चलेगा।

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