गीता जयंती पर राजभवन में माहेश्वरी मण्डल भायन्दर का अदभुत कार्य्रकम

मुंबई

न्यूज स्टैंड18 नेटवर्क
मुंबई।
गीता जयंती के उपलक्ष में रविवार 4 दिसंबर को माहेश्वरी मण्डल भायन्दर के तत्वावधान में, संस्कार–संस्कृति संवर्धन का विशेष कार्यक्रम राजभवन (मुंबई) में रखा गया, जिसमें महाराष्ट्र के राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी के समक्ष छोटे बच्चों द्वारा नित्य पठनीय 5 श्लोक व गीताजी के 12 वें अध्याय के पठन के साथ संस्कारों, गौ रक्षा और गंगाजल के महत्व और गंगा शुद्धिकरण पर प्रस्तुति दी गई।
दीप प्रज्वलन व राष्ट्रगान से कार्यक्रम की शुरुआत के पश्चात माहेश्वरी मण्डल भायन्दर के अध्यक्ष नटवर डागा व सचिव नारायण तोषनीवाल द्वारा राज्यपाल महोदय का राजस्थानी साफा, श्रीफल व श्रीमद्भागवत गीता की पुस्तक भेंट स्वरूप देकर स्वागत किया गया।
नटवर डागा द्वारा स्वागत भाषण, समाज परिचय के बारे में बताते हुए कहा की हम भगवान महेश के वंशज है, इसलिए माहेश्वरी कहलाते है। सेवा, त्याग व सदाचार के सिद्धांतों पर जीवन व्यतीत करने वाले हमारे समाज में एक से बढ़कर एक रत्न है, जिन्होंने हर क्षेत्र में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। लोकसभा स्पीकर ओमजी बिड़ला, आदित्य बिरला समूह, श्री सीमेंट के बांगड़ ग्रुप, डीमार्ट के दम्मानी आदि हमारे समाज के बहुमूल्य रत्न है। पुरे विश्व में 12 लाख से भी कम की आबादी वाला हमारा समाज, प्राणी मात्र की हर संभव सेवा एवं सनातन धर्म के प्रसार को अपना प्रथम कर्तव्य समझता है। भारत वर्ष के लगभग सभी तीर्थस्थानों पर और बड़े शहरों में समाज भवन स्थापित है। पुरे देश में हमारे समाज के लगभग 155 भवन है। मण्डल का लक्ष्य–”नित्य करो गीता पठन, हर दिन गंगा आचमन” के बारे में बताया। साथ ही साथ उन्होंने बताया की सम्पूर्ण भारतवर्ष में पहली बार माहेश्वरी समाज भायंदर द्वारा राजभवन जैसे उच्चतम स्थान पर गरीमामय राज्यपाल महोदय की उपस्थिति में गीता जयंती के उपलक्ष पर विशेष आयोजन रखा गया जिसमें नन्हे बच्चों द्वारा गीताजी के पाठ को कंठस्थ पठन किया गया है।

राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी के समक्ष छोटे बच्चे।

राज्यपाल ने अपने उद्बोधन में माहेश्वरी समाज को सेवा, त्याग व सदाचार की मूर्ति बताते हुए, 6 वर्ष से 17 वर्ष के 80 बच्चों का समावेश था, जिनके मुख से कंठस्थ गीताजी के 12 वें अध्याय के पठन की प्रशंसा की। साथ ही साथ उन्होंने गीताजी के 12 वें अध्याय की विशेषता बताते हुए कहा की यह अध्याय विशेषतौर से भक्ति का ज्ञान देता है। भगवान की भक्ति सर्वोपरी है,आप जो भी कार्य करेंगे व आपके हित में ही उसका परिणाम आयेगा। आप भगवान की भक्ति इस प्रकार करें जैसे आप भगवान के प्रसाद को ग्रहण कर रहे हों। नन्हे बच्चों को कहा की जब आप कोई परीक्षा देते हो तो उसमें कभी आपको कम नंबर आते है तो उसकी चिंता मत करो और अधिक नंबर आये तो उसका हर्षोउल्लास ना करे। सिर्फ यह समझ के चलो की आपके ऊपर भगवान की विशेष कृपा है। जब आप सभी कार्य भगवान की कृपा को समझ के करेंगे तब निश्चित ही आप सभी का मंगल ही होगा। बारहवें अध्याय के पठन से प्राप्त भक्ति व भगवान पर विश्वास की महत्ता के साथ उन्होंने बच्चों को कहा कि भगवान पर पूर्ण विश्वास रखकर कार्य करने से सब कार्य सफलतापूर्वक सम्पन्न होते है। बच्चों द्वारा प्रस्तुत इस रंगारंग भक्तिमय कार्यक्रम की बहुत ही भूरी भूरी प्रशंसा की। अंत में मंजू मालपानी द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव दिया गया । कार्यक्रम समाप्ति के पश्चात बच्चों को राजभवन भ्रमण करवाया गया।

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