अनारुल : राजमिस्त्री से नरसंहारक तक

राष्ट्रीय

अजय भट्टाचार्य
रामपुरहाट
काण्ड में स्थानीय ब्लॉक तृणमूल अध्यक्ष अनारुल हुसैन का नाम आने के बाद मृतकों के रिश्तेदारों ने उनके खिलाफ आरोप लगाया था। ऐसे में सीएम के निर्देश पर उसे गिरफ्तार भी कर लिया गया। हालांकि अब सवाल उठ रहा है कि अनारुल हुसैन कौन है? बीरभूम के रामपुरहाट से सटे संधिपुर इलाके का निवासी अनारुल लगभग 52 वर्ष का है। एक समय में वह इलाके में राजमिस्त्री का काम करता था। उस समय वह कांग्रेस का समर्थक था। बाद में अनारुल तृणमूल छोड़ कांग्रेस में शामिल हो गया था। राजनीति के मैदान में उतरकर बीरभूम में अनारुल ने दक्ष संगठक के रूप में अपनी पहचान बना ली थी। वह रामपुरहाट के विधायक व राज्य के पूर्व मंत्री तथा विधानसभा के डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी का करीबी बन गया था। इसके अलावा तृणमूल के बीरभूम जिलाध्यक्ष अनुव्रत मण्डल के करीबियों में भी अनारुल शामिल हो गया था। पार्टी में धीरे – धीरे उसकी प्रतिष्ठा बढ़ रही थी। उसे रामपुरहाट एक नंबर ब्लॉक का अध्यक्ष पार्टी ने बना दिया था। सांगठनिक तौर पर बोगतुई गांव अनारुल के अधीन में ही था। बीरभूम में तृणमूल के एक वर्ग का कहना है कि अपने इलाके में अनारुल दबंग नेता बन चुका था।
ममता बनर्जी के निर्देश के एक-दो घण्टे के अंदर ही उक्त तृणमूल नेता को उसके मोबाइल टावर लोकेशन का पता कर गिरफ्तार किया गया। ममता के निर्देश की खबर पाकर अनारुल ने घर छोड़ दिया था। मुख्यमंत्री का निर्देश पाकर कुछ ही देर में पुलिस अधिकारी रामपुरहाट के संधिपुर में अनारुल के घर पहुंच गये। उसे वहां नहीं पाया जा सका। बीते गुरुवार की सुबह से ही अनारुल का मोबाइल फोन सक्रिय था। अनारुल के फोन का टावर लोकेशन पुलिस ने ट्रैक करना चालू किया। पता चला कि तारापीठ में एक होटल के पास वह ठहरा है। पुलिस ने वहां पहुंचकर अनारुल को गिरफ्तार कर लिया।
बोगतुई गांव के मृतकों के परिजनों का दावा है कि ब्लॉक अध्यक्ष होने के कारण अनारुल की प्रशासन के अधिकारियों से अच्छी जान-पहचान थी। मृतकों के रिश्तेदारों का दावा है कि अग्निकाण्ड के समय रिश्तेदारों की जान बचाने की अर्जी के साथ काफी लोगों ने अनारुल को फोन किया था, लेकिन आरोप है कि उसने कोई जवाब नहीं दिया था। यहां तक कि पुलिस को भी इस विषय में कुछ नहीं बताया गया। अनारुल समेत रामपुरहाट काण्ड में अब तक कुल 22 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया जा चुका है। अब चूँकि मामले की जाँच सीबीआई कर रही है लिहाजा इस मामले में कुछ पर नये फ्लू सामने आ सकते हैं।
अपने मृत कार्यकर्ता के परिजनों से नहीं मिलीं ममता
रामपुरहाट के पंचायत उप प्रधान भादू शेख की हत्या के बाद हुई आगजनी की घटना के बाद से ही पूरा का पूरा बोगतुई गांव वीरान हो गया है। भादू शेख की मौत ने उसके घर वालों को पूरी तरह तोड़ कर रख दिया। गुरुवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी गांव पहुंची थीं। उनके आने की खबर मिलते ही भादू का पूरा परिवार उनसे मिलने और अपनी आपबीती सुनाने व भादू के हत्यारों को सजा दिलाने की मांग लेकर मुख्यमंत्री से मिलना चाहता था। इसकी पूरी तैयारी भी कर ली गई थी ।घर वाले जो गांव से पलायन कर गए थे, वह दोबारा अपने घर आ गए थे। वहां मुख्यमंत्री का इंतजार कर रहे थे कि वह आएंगी और उनसे मुलाकात करेंगी मगर ऐसा हुआ नहीं। ऐसा नहीं है कि मुख्यमंत्री ने अपना दौरा रद्द किया बल्कि वह गांव में आयीं और लोगों से मिली भी लेकिन वह लोग भादू के घरवाले नहीं बल्कि आग से जलकर मरे मृतकों के घर वाले थे। ममता ने लोगों से मिलकर ना सिर्फ उनके आंसू पोछे बल्कि इस मामले में कड़ी कार्यवाही करने का आश्वासन भी दिया। हालांकि ममता बनर्जी ने भादू के किसी भी परिजन से बात नहीं की, जिसे लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर क्यों मुख्यमंत्री ने अपने तय कार्यक्रम को अंतिम समय में बदल दिया।

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