Andheri by-election: अँधेरी उपचुनाव में इस्तीफे की फांस

मुंबई लेख

अजय भट्टाचार्य
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नाम और चुनाव निशान मिल जाने के बाद भी उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) नीत शिवसेना (Shivsena) की मुसीबतें कम नहीं हो रही हैं। मुखौटे कू आगे कर भाजपा अपनी कुटिल चालें चलती जा रही है। कल अँधेरी पूर्व विधानसभा (Andheri East constituency) सीट पर उपचुनाव (by-election) के नामांकन की आखिरी तारीख है और शिवसेना उद्धव गुट द्वारा इस सीट पर ऋतुजा लटके (Rutuja latke) का नाम आगे किया गया है। ऋतुजा दिवंगत शिवसेना विधायक रमेश लटके (Ramesh latke) की पत्नी हैं। रमेश लटके की इसी साल मई महीने में ह्रदयाघात से मृत्यु होने के बाद इस सीट पर उपचुनाव होना है।
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के लिए परेशानी यह है कि बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) (BMC) ने अभी तक पार्टी की उम्मीदवार ऋतुजा लटके का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है, जो अंधेरी (पूर्व) विधानसभा क्षेत्र उपचुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल करने के लिए तैयार हैं।
उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 14 अक्टूबर है। बीएमसी के मुताबिक ऋतुजा लटके नगर निकाय की तीसरी श्रेणी की कर्मचारी हैं और उन्होंने पिछले महीने इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, उसकी एक महीने की नोटिस अवधि अभी पूरी नहीं हुई है। दूसरी तरफ शिवसेना के एक नेता ने कहा है कि ऋतुजा को जल्द से जल्द राहत दी जा सकती है क्योंकि उन्होंने अपनी नोटिस अवधि के खिलाफ नगर निकाय के पास एक महीने का वेतन जमा कर दिया था। चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, ऋतुजा तब तक चुनाव लड़ने के लिए अपना नामांकन दाखिल नहीं कर सकती जब तक कि उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं कर लिया जाता, क्योंकि वह सरकार से लाभ का पद नहीं रख सकती हैं। यह पहला उपचुनाव है जिसमें शिवसेना अपने नए चुनाव चिह्न ‘मशाल’ (ज्वलंत मशाल) (Mashal) पर चुनाव लड़ रही है, और मुंबई में पहला उपचुनाव है कि महा विकास अघाड़ी (एमवीए) कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के रूप में एक साथ चुनाव लड़ेगी।
इस हफ्ते उद्धव ठाकरे को समर्थन देने की घोषणा की है। इस उपचुनाव से एक बात और साफ होती दिख रही है कि जिस तरह से भाजपा ने अपनी सहयोगी बागियों वाली शिवसेना से बिना सलाह मशविरा किये अपना उम्मीदवार उतार दिया है उससे सूबे की सरकार के मुखिया एकनाथ शिंदे की भी औकात पता चल रही है। शिवसेना की सीट पर स्वभावत: बागी शिवसेना को ही दावा करना चाहिये था जो शिवसेना को बढ़ने/बढ़ाने के नाम पर मूल पार्टी से अलग होकर सत्ता में आई है।
वैसे इस सीट पर भाजपा ने जिस उम्मीदवार को उतारा है उससे स्थानीय भाजपा में भी दो-फाड़ है। जाहिर है ऋतुजा को सहानुभूति वोट न मिलें इसलिए पर्दे के पीछे से सत्ता का नंगा खेल जारी है। अन्यथा अब तक उनके इस्तीफे पर निर्णय क्यों नहीं लिया गया!

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