अनुब्रत मंडल: मोदीखाना से जेल तक

समाचार

अजय भट्टाचार्य
गौ
तस्करी के मामले मे गिरफ्तार अनुब्रत मंडल को विशेष अदालत ने 10 दिनों की हिरासत में भेज दिया है। जब सीबीआई की टीम उन्हें आसनसोल में विशेष अदालत में पेशी के बाद कोलकाता ले जा रही थी, तब मंडल कभी परेशान दिखे, तो कभी पसीना पौंछते। सीबीआई के मुताबिक 2015 से 2017 के दौरान बीएसएफ ने 20,000 पशुओं के सिर बरामद किए थे। इनकी सीमा पार तस्करी होनी थी। इस मामले में मंडल का बॉडीगार्ड हुसैन पहले ही गिरफ्तार हो चुका है। मंडल को 10 बार नोटिस भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया गया था, लेकिन वे नहीं पहुंचे। सीबीआई की टीम तीन दिनों से कोलकाता में डेरा डाले बैठी थी।
सीबीआई से लंबी लुकाछुपी के बावजूद अनुब्रत मंडल खुद को बचा नहीं सके। सीबीआई ने गुरुवार सुबह सात बजे बोलपुर स्थित उनके घर को घेर लिया था। उनके बॉडीगार्ड ने गिरफ्तारी से जुड़े कागजात पर हस्ताक्षर किए। गिरफ्तारी के बाद अनुब्रत मंडल की आंखों में आंसू दिखाई दिए। गौ तस्करी के मामले में अनुब्रत मंडल के बॉडीगार्ड सहगल हुसैन की गिरफ्तारी के बाद मुर्शिदाबाद के कई नेताओं का नाम सामने आया है। अब अनुब्रत मंडल की गिरफ्तारी के बाद मुर्शिदाबाद के कई तृणमूल नेताओं को लेकर अफवाह और तेज हो गई है।
अनुब्रत मंडल मतलब बीरभूम में नाम ही काफी रहा है। जिले में जिसकी तूती बोलती रही और वह जो कहते थे उसे टालना आसान नहीं था। केस्टो के नाम से मशहूर अनुब्रत की किस्मत रातोंरात नहीं बदली थी और ना ही अचानक जिले में बादशाह कहलाने लगे। उसके जमीन से आसमान छूने तक की कहानी काफी लंबी है। एक समय था जब अनुब्रत मंडल मोदीखाना यानी किराने की दुकान संभाला था। राजनीति में आने से पहले आठवीं पास अनुब्रत ने अपने पिता की किराने की दुकान संभालना शुरू की थी। अनुब्रत के पिता कृपासिन्धु मंडल की दुकान थी। यह भी कहा जाता है कि उनकी एक ग्रिल फैक्ट्री थी। तीन भाईयों में से अनुव्रत मंझले हैं। अनुब्रत अब बोलपुर के निचुपट्टी क्षेत्र के वार्ड नंबर 15 में रहते हैं हालांकि उनका पैतृक घर नानूर थाने के हटसेरंडी गांव में था जहां उन्होंने अपना बचपन बिताया। कुछ दिनों तक उन्होंने मछली का व्यवसाय भी किया है। हालांकि कुछ लोगों ने इससे इनकार भी किया। अनुव्रत जब 30 साल के थे, तब उन्हें पड़ोस की लड़की ‘छबी’ से प्यार हो गया। बाद में उनसे ही शादी हुई। अनुब्रत की एक मात्र संतान लड़की है।
राजनीतिक जीवन की तो शुरूआत में अनुब्रत मंडल कांग्रेस में थे। 1998 में, जब तृणमूल कांग्रेस की स्थापना हुई, तो दिवंगत डॉक्टर सुशोभन बनर्जी बीरभूम जिला तृणमूल अध्यक्ष बने। इसके अलावा अनुब्रत मंडल को जिला युवा तृणमूल अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। सुशोभन के बाद आशीष बनर्जी जिलाध्यक्ष बने। इसके बाद अशीष जब चेयरमैन बने तब 2009 में अनुब्रत मंडल जिलाध्यक्ष बने। बीरभूम का दायित्व लेने के बाद वामपंथियों के लाल गढ़ कहे जाने वाले बीरभूम में अपना दमखम दिखाना शुरू किया। 2011 में जब तृणमूल राज्य में सत्ता में आयी तो पार्टी में केष्टो का प्रभाव भी बढ़ा।
अनुब्रत मंडल कभी भी विधायक व मंत्री नहीं बने। इसके बाद भी पार्टी के अहम नेताओं में अनुब्रत मंडल का नाम आता रहा है। अनुब्रत के करीबियों ने पहले भी कहा है कि उन्होंने कभी भी मंत्री बनने की इच्छा नहीं जतायी। मंत्री नहीं होने बावजूद जिले के बाहर भी उनका प्रभाव बना रहा।
अनुब्रत एक दो नहीं बल्कि कई मामलों में विपक्ष के निशाने पर रहे है। पंचायत चुनाव, लोकसभा चुनाव में कई तरह से विपक्ष ने उन पर आरोप भी लगाया। वोट के बाद हिंसा के कथित आरोपों में भी अनुव्रत का नाम आया था। पशु तस्करी से लेकर कोयला घोटाले से भी नाम जोड़ा गया। केंद्रीय जांच एजेंसी ने अनुव्रत को कई बार बुलाया मगर उन्होंने शारीरिक अस्वस्थ्ता का हवाला देते हुए पेश नहीं हुए। आखिरकार गुरुवार को सीबीआई की टीम उनके घर पहुंची और उन्हें गिरफ्तार किया।

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