Arpita mukharjee: दुर्गा पांडाल से घोटाले के जाल तक

फीचर राष्ट्रीय

अजय भट्टाचार्य
शिक्षक
भर्ती घोटाले के सिलसिले में ईडी ने बंगाल के उद्योग मंत्री पार्थ चटर्जी और उनकी करीबी बांग्ला फिल्मों की एक्ट्रेस अर्पिता मुखर्जी को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी से दोनों से करीब 26 घंटे तक पूछताछ के बाद हुई। अर्पिता मुखर्जी के घर से 21 करोड़ रुपये नकद, 20 से अधिक मोबाइल फोन और 50 लाख रुपये का सोना भी बरामद किया गया है।

जाहिर है इन दिनों सुर्ख़ियों में आई अर्पिता मुखर्जी का बंगाल के मंत्री पार्थ चटर्जी से नाते पर सवाल और उत्सुकता चरम पर है। अर्पिता बांग्ला फिल्मों में काम कर चुकी हैं पर उन्हें कोई खास पहचान फिल्मों में अब तक हासिल नहीं हो पायी है। अर्पिता ने बांग्ला के अलावा उड़िया और तमिल फिल्मों में भी काम किया है। वह बांग्ला फिल्मों की सुपरस्टार प्रोसेनजीत की फिल्मों में भी काम कर चुकी है। भर्ती घोटाले में अर्पिता के शामिल होने की खबरें भी सामने आ रही हैं। ऐसे में बंगाल की फिजाओं में यह सवाल तैरने लगा है कि आखिर बंगाली सिनेमा की एक साइड अभिनेत्री सरकार के एक दिग्गज मंत्री की करीबी कैसे हो गई?

तृणमूल कांग्रेस के नेता और ममता बनर्जी की सरकार में उद्योग मंत्री पार्थ चटर्जी दक्षिण कोलकाता में एक दुर्गा पूजा समिति के संरक्षक हैं। यह कोलकाता की बड़ी दुर्गापूजा समितियों में एक है। अर्पिता भी इसी दुर्गापूजा समिति से जुड़ी रही हैं। दुर्गा पूजा के दौरान कई बार पूजा पांडालों में लगे पोस्टरों पर उनका नाम अध्यक्ष के रूप में लिखा देखा गया था। बंगाल भाजपा के नेता और विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने अर्पिता के घर पर 20 करोड़ रुपये नकद मिलने की खबर के बाद सोशल मीडिया पर कई तस्वीरें शेयर की है जिनमें दुर्गापूजा उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान ममता बनर्जी, पार्थ चटर्जी, टीएमसी के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी के साथ अर्पिता मुखर्जी भी दिख रही है।
तृणमूल कांग्रेस ने आधिकारिक बयान जारी कर खुद को इस मामले से दूर करने में देरी नहीं की। पार्टी की ओर से कहा गया है कि उसका अर्पिता के घर पर बरामद पैसों से कोई लेना देना नहीं है। जिन लोगों के नाम आए हैं उन्हें जवाब देना चाहिए। मामले पर भाजपा तृणमूल व ममता बनर्जी के खिलाफ अधिक हमलावर हो गई है। इस बीच भाजपा नेता और कभी ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी रहे शुभेन्दु अधिकारी ने कहा, “यह तो ट्रेलर है, पिक्चर अभी बाकी है।”
पश्चिम बंगाल स्कूल सर्विस कमीशन के ग्रुप सी व ग्रुप डी कर्मचारियों और शिक्षकों की बहाली में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां सामने आईं थीं। मामले की जांच कोलकाता हाईकोर्ट ने सीबीआई को सौंपी थी। इस मामले में रुपयों के लेने की जांच के लिए अब ईडी की इंट्री हुई है। इस मामले में पार्थ चटर्जी से बीते 26 अप्रैल और 18 मई को सीबीआई ने पूछताछ की थी।
पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी के बाद ईडी की वक्र दृष्टि अब पार्थ की एक और करीबी मोनालिसा दास पर है। मोनालिसा 10 फ्लैटों की ‘मालिक’ है। मोनालिसा को भी पार्थ चटर्जी की करीबी के रूप में जाना जाता है। ईडी ने मोनालिसा के नाम पर कम से कम 10 फ्लैटों का पता लगाया है। मोनालिसा ने 2014 में आसनसोल में काजी नजरूल विश्वविद्यालय में एडमिशन लिया था और वर्तमान में उसी विश्वविद्यालय में बंगाली विभाग की प्रमुख हैं। मोनालिसा की प्रोफेसर के तौर पर नियुक्ति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। उन्हें कथित तौर पर प्रभाव के माध्यम से नौकरी मिलने का आरोप लगाया जा रहा है। कहा जा रहा है कि इनकी नियुक्ति के पीछे पार्थ चटर्जी की विशेष भूमिका थी। मोनालिसा दास को शिक्षिका बताया जा रहा है और इनका घर शांतिनिकेतन में है। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि पार्थ चटर्जी के साथ उनके रिश्ते अब कैसे हैं, लेकिन एक साधारण प्रोफेसर के नाम इतने फ्लैट कैसे हो गए? यह सवाल उठ रहे हैं।

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