आत्माराम चाचे ने ‘धनुष-बाण’ रख ‘ढाल-तलवार’ उठाया, क्या दिंडोशी में खत्म हो रही है उद्धव सेना?

मुंबई राजनीति

विजय यादव
मुंबई।
उद्धव ठाकरे एक ओर जहां पार्टी बचाने के लिए तमाम संघर्ष कर रहे हैं, वहीं इनकी सेना के एक के बाद एक सिपाही विरोधी खेमे में शामिल होते जा रहे हैं। ताजा मामला उत्तर पश्चिम मुंबई के दिंडोशी विधानसभा का है, जहां वार्ड 38 के नगरसेवक आत्माराम चाचे अपने तमाम समर्थकों के साथ वर्षों पुराना ‘धनुष-बाण’ रख ‘ढाल और तलवार’ उठा लिया है।
दिंडोशी विधानसभा उत्तर पश्चिम जिला के उस संसदीय क्षेत्र में आता है, जहां के सांसद गजानन कीर्तिकर हाल ही में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व को नकार कर एकनाथ शिंदे को अपना प्रमुख बना लिया।
दिंडोशी विधानसभा से वर्तमान विधायक सुनील प्रभु हैं। वर्तमान में इन्हे उद्धव ठाकरे का सबसे करीबी माना जाता है। उद्धव ठाकरे से सुनील प्रभु की नजदीकियों का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि, गजानन कीर्तिकर पार्टी छोड़ने के बाद उद्धव पर आरोप लगाया था कि, मातोश्री में इनसे ज्यादा इनके चपरासी को महत्व दिया जा रहा था। कीर्तिकर का इशारा सुनील प्रभु की ओर था। सुनील प्रभु शिवसेना में सबसे निचली पायदान से ऊपर आए हैं। पार्टी के साधारण कार्यकर्ता से नगरसेवक और विधायक बनने वाले सुनील प्रभु पिछले कुछ समय से गजानन कीर्तिकर के निशाने पर रहे। सुनील प्रभु का भले ही मातोश्री दरबार में रूतबा बढ़ा हो लेकिन अपने निर्वाचन क्षेत्र में लगातार कमजोर होते जा रहे हैं। आत्माराम चाचे की जीत में सुनील प्रभु का ही सबसे बड़ा सहयोग माना जाता है। आत्माराम चाचे की जीत के बाद ऐसी उम्मीद जगी थी कि, यहां सुनील प्रभु की ताकत बढ़ेगी लेकिन हुआ इसके एकदम विपरित। सुनील प्रभु को दिंडोशी में पिछले महानगर पालिका चुनाव से ही कई लोगों की नाराजगी झेलनी पड़ रही थी। इनमे पूर्व नगरसेवक प्रशांत कदम का भी एक नाम शामिल है।
प्रशांत कदम के पिता दशरथ कदम कुरार विलेज में शिवसेना के जमीनी नेता रहे हैं। पिछले मनपा चुनाव में प्रशांत कदम का टिकट काटे जाने का कारण सुनील प्रभु को ही ठहराया गया था। हालांकि प्रशांत कदम ने सार्वजनिक तौर कभी कोई नाराजगी जाहिर नही की और चुनाव में सुनील प्रभु के साथ मिलकर ईमानदारी और निष्ठा से काम करते रहे।
आत्माराम चाचे के शिंदे गुट में जाने के बाद दिंडोशी विधानसभा में एकनाथ शिंदे गुट मजबूत हुआ है क्योंकि इनके पहले भी एनसीपी के युवा नेता वैभव भरडकर अपनी पत्नी नगरसेविका धनश्री भरडकर के साथ एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो गए थे। वैभव भरडकर की दिंडोशी विधानसभा के अप्पापाड़ा, कुरार विलेज, अंबेडकर नगर, संजय नगर आदि इलाकों में एक मजबूत पकड़ मानी जाती है। शिंदे गुट में इनके शामिल होने से क्षेत्र में एकनाथ शिंदे की ही नही बल्कि गजानन कीर्तिकर की भी ताकत बढ़ी है। दिंडोशी में आगे भी यह सिलसिला जारी रहा तो, सुनील प्रभु के लिए मनपा चुनाव में कड़ी चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

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