बापू फिर निशाने पर…!

लेख

अजय भट्टाचार्य
मुझे
नही पता कि देश की कितनी हिंदू आबादी अखिल भारतीय हिंदू महासभा से सहमत है कि महात्मा गाँधी की महिषासुर से तुलना की जाये! अगर हिंदू महासभा को लगता है कि उसके कहने/करने मात्र से गांधीजी की छवि देश के हिंदुओं में मलिन हो जाएगी, तो यह उसका भ्रम है। 30 जनवरी को जिस गाँधी के सीने पर गोली दागी गई थी वह गाँधी अब भी हिंदू महासभा जैसे संगठनों की आँखों की किरकिरी है। कोलकाता के दुर्गा पांडाल में हिंदू महासभा की करतूत ने हर हिंदू का सर शर्म से झुका दिया है।
पंडाल में महिषासुर को महात्मा गांधी के रूप में चित्रित किया गया। महिषासुर के रूम में गांधी जैसी प्रतिमा को देखकर लोग भकड़ गये और आरोप लगाया कि गांधी जयंती के दिन ऐसा करना गांधी जी का अपमान हैं। गृह मंत्रालय के दबाव के बाद, पूजा के आयोजकों ने गांधी जी जैसी प्रतिमा से चेहरा हटा दिया। कोलकाता में दुर्गा पूजा में ‘महिषासुर’ की जगह महात्मा गांधी की तरह दिखने वाली एक प्रतिमा ने राष्ट्रपिता की जयंती पर विवाद खड़ा कर दिया। दक्षिण पश्चिम कोलकाता के रूबी क्रॉसिंग के निकट, अखिल भारतीय हिंदू महासभा पूजा के आयोजकों ने शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस के निर्देशानुसार गांधी की तरह दिखने वाली मूर्ति के रूप में बदलाव कर दिया। आयोजकों ने कहा कि समानताएं होना ‘‘केवल एक संयोग’’ था। मजाक यह है कि अपनी करनी पर शर्मिंदा होने की बजाय हिंदू महासभा की पश्चिम बंगाल राज्य इकाई के कार्यकारी अध्यक्ष चंद्रचूर गोस्वामी दलील देते हैं कि पूजा आयोजकों की मंशा किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने की नहीं थी। पुलिस ने हमें इसे बदलने के लिए कहा, और हमने इसे मानते हुए महिषासुर की मूर्ति पर मूंछें और बाल लगा दिए।
लेकिन दूसरी तरफ गोस्वामी यह भी कहते हैं कि हम गांधी को सच्चे असुर के रूप में देखते हैं। वह असली असुर हैं। इसलिए हमने इस तरह की मूर्ति बनाई। इससे भी बड़ा मजाक यह है कि देश का मुखिया जिस दिन राष्ट्रपिता की जयंती मनाने में देश का प्रतिनिधित्व कर रहा था और दुनिया के सबसे बड़े समावेशी त्योहारों में से एक की महिमा पर आधारित उत्सव के लिए बंगाल देश का प्रतिनिधित्व कर रहा था, उस दिन हिंदू महासभा कोलकाता के केंद्र से 10 किमी से अधिक दूर बने पांडाल में दुर्गा को दानव पर विजय प्राप्त करते हुए दिखाती है, जिसे धोती, चश्मे और एक छड़ी के साथ एक गंजे व्यक्ति के रूप में चित्रित किया गया। जाहिर है हिंदू महासभा गाँधी को महिषासुर बनाकर पेश कर रही थी। तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस, वाम दलों, भाजपा जैसे राजनीतिक दलों ने भी गांधी के ‘महिषासुर’ के रूप में कथित चित्रण की आलोचना की। भाजपा ने इसकी उसी तरह आलोचना की जिस तरह पार्टी और प्रधानसेवक ने अपनी भोपाल सांसद और आतंकी आरोपी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की निंदा की थी, जब उन्होंने गोडसे को “देशभक्त” कहा था। बाद में उन्होंने माफी मांगी लेकिन एक संसदीय पैनल से हटाए जाने के अलावा, भाजपा ने उनके खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की है। यह सीधे हिंदुत्व प्लेबुक का एक पत्ता है। जब विवाद अस्थिर, व्यापक और असंगत हो जाते हैं तो परिवार तथाकथित अवांछित (फ्रिंज) तत्वों से खुद को दूर करके उच्च नैतिक आधार लेना चाहता है जो कारण के कम खुशगवार घटकों को निष्पादित कर “मुख्यधारा” में मुखौटा को आगे कर अस्वीकार्यता बनाए रखता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.