Bengal news: दीदी बड़े सियासी धमाके की तैयारी में

राजनीति राष्ट्रीय

अजय भट्टाचार्य
दो
साल तक वर्चुअल होने के बाद इस बार तृणमूल कांग्रेस 21 जुलाई को बड़ा धमाका करने वाली है। नबान्न (मुख्यमंत्री कार्यालय) में इस दिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हाथों कई हस्तियां तृणमूल का झण्डा थाम सकती हैं। इनमें जो सबसे अहम नाम उभरकर सामने आ रहे हैं वे भाजपा की रूपा गांगुली, लॉकेट चटर्जी के अलावा शोभन चटर्जी और वैशाखी बनर्जी हैं। उनके अलावा भाजपा से कुछ और विधायक व टॉलीवुड सेलिब्रिटीज के इस दिन तृणमूल में आने की चर्चा है।
भाजपा की राज्यसभा से सांसद रहीं रूपा गांगुली की सांसद पद की मियाद गत अप्रैल महीने में समाप्त हो गयी थी। हालांकि पिछले कुछ समय से उनके बगावती तेवर स्पष्ट देखने को मिल रहे हैं। कभी पार्टी की वर्चुअल बैठक का बहिष्कार तो कभी फेसबुक पर पोस्ट को लेकर रूपा गांगुली हमेशा चर्चा में रहीं। लगभग 3 सप्ताह पहले रूपा गांगुली ने फेसबुक पर पोस्ट किया था, ‘राजनीति में नहीं आने पर जान ही नहीं पाती कि बेवजह कितना समय लोग बर्बाद करते हैं।’ इससे पहले दिलीप घोष समेत अन्य भाजपा नेताओं के साथ चल रही वर्चुअल बैठक से अचानक वह निकल गयी थीं और कहा था कि इस तरह की बैठकों में उन्हें ना बुलाया करें। 6 जुलाई को रूपा गांगुली की मुलाकात तृणमूल के प्रवक्ता कुणाल घोष से हुई थी। इसे भले ही दोनों ने सौजन्य मुलाकात बताया हो, लेकिन इसके बावजूद इसे लेकर जोरों पर चर्चा थी। वर्ष 2015 में रूपा गांगुली भाजपा में शामिल हुई थीं और प्रदेश महिला मोर्चा की अध्यक्ष बनी थीं। वर्ष 2016 में उन्हें राज्यसभा में भेजा गया था।
गत वर्ष विधानसभा चुनाव में हुगली से भाजपा सांसद लॉकेट चटर्जी को चुंचुड़ा विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया था। हालांकि चुनाव में भाजपा की करारी हार के बाद प्रदेश नेतृत्व से उनकी दूरियां बढ़ने लगी। आलम कुछ ऐसा भी हो गया कि हुगली जिले में रैली निकाली गयी, लेकिन अपने ही क्षेत्र की रैली में सांसद की उपस्थिति नहीं थी। केंद्रीय नेतृत्व द्वारा लॉकेट चटर्जी को उत्तराखण्ड चुनाव की जिम्मेदारी जरूर दी गयी, लेकिन प्रदेश नेतृत्व से उनके रिश्तों में कोई सुधार नहीं आया। हाल में संघ के बांग्ला मुखपत्र स्वास्तिका में यह बात प्रकाशित हुई थी कि संभवतः लॉकेट चटर्जी तृणमूल में जा सकती हैं। भाजपा से तृणमूल में जाने के बाद एक सांसद ने भी लॉकेट का नाम लेकर दावा किया था कि लॉकेट समेत कई और नेता तृणमूल में आने की कतार में हैं। इस बयान का लॉकेट ने खण्डन जरूर किया था, लेकिन कहते हैं कि राजनीति में कभी दो और दो चार नहीं होते हैं। लॉकेट चटर्जी वर्ष 2015 में भाजपा में शामिल हुई थीं। इसके बाद वह प्रदेश भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष रहीं। 2019 के लोकसभा चुनाव में वह हुगली सीट से जीतकर सांसद बनी थीं।
शोभन चटर्जी और वैशाखी बनर्जी ने गत 22 जून को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात कर तृणमूल में आने की राह पक्की कर ली है। मुलाकात के बाद वैशाखी बनर्जी ने कहा था, ‘भाई-बहन के बीच अहंकार की दीवार ढह गयी है।’ ऐसे में कयास जोरों पर हैं कि 21 जुलाई को ही शोभन और वैशाखी तृणमूल में वापस आ सकते हैं। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव के पहले से ही शोभन और वैशाखी ने पार्टी से दूरियां बढ़ा ली थीं। उनका दावा था कि प्रदेश नेतृत्व द्वारा उनकी अहमियत नहीं समझी गयी। प्रदेश भाजपा के लिए फिलहाल सबसे बड़ा चैलेंज अपने सांसदों व विधायकों को पार्टी में बनाये रखना है। गत विधानसभा चुनाव के बाद से केंद्रीय मंत्री रहे बाबुल सुप्रियो से लेकर सांसद अर्जुन सिंह व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहे मुकुल राय तक तृणमूल में जा चुके हैं। उनके अलावा कई तृणमूल नेताओं जैसे कि राजीव बनर्जी, सव्यसाची दत्ता भी ने भी तृणमूल में वापसी कर ली है। अब तक भाजपा के 2 सांसद समेत 7 विधायकों ने तृणमूल का झण्डा थाम लिया है।

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