Bihar MLC Election: बिहार एमएलसी चुनाव में राजग जीता, घटक हारे

फीचर राष्ट्रीय

अजय भट्टाचार्य
बिहार
विधान परिषद की 24 सीटों पर हुए चुनाव के नतीजे आ गये हैं जिनमें भाजपा को 7, जदयू को 5, लोजपा (पारस) को 1, राजद को 6 और निर्दलियों को 4 और कांग्रेस को एक सीट मिली है। सरसरी तौर पर देखा जाये तो सत्तारूढ़ गठबंधन राजग के खाते में आधी से ज्यादा 13 सीटें आई हैं। इसके बावजूद इन चुनाव परिणामों से बिहार की राजनीति के तीन प्रमुख दल-भाजपा, जनता दल यूनाइटेड और राष्ट्रीय जनता दल में उदासी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय जायसवाल और विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने परिणामों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है जो इस बात का प्रमाण हैं कि चुनाव परिणाम उनकी उम्मीद के प्रतिकूल रहे और वो इसका राजनीतिक विश्लेषण करने से बचेंगे। चुनाव में धनबल जीत का सबसे मज़बूत या एकमात्र आधार होता हैं लेकिन भाजपा जो 12 सीटों पर मैदान में थी उसे 7 सीटों पर जीत मिली। मतलब यह कि उसे शेष 5 सीटों पर हार का मुंह देखना पड़ा। नीतीश कुमार की जदयू के 11 प्रत्याशी मैदान में थे, पर मात्र पांच प्रत्याशी जीते जिसमें मुज़फ़्फ़रपुर से दिनेश सिंह और भोजपुर से राधा चरण सेठ जैसे विजेता रहे जिन्होंने चुनाव का सारा प्रबंधन खुद संभाल रखा था। राजग के एक और सहयोगी पशुपति पारस की लोक जनशक्ति का खाता खुल गया और वैशाली की सीट से इनके उम्मीदवार भूषण राय जीतने में कामयाब रहे। राष्ट्रीय जनता दल और उसके नेता तेजस्वी यादव ने सर्वाधिक 23 उम्मीदवार उतारे थे, मगर पार्टी के हिस्से सिर्फ 6 सीटें ही आईं।
तेजस्वी के प्रचार करने के बावजूद नवादा, मोतिहारी और मधुबनी से पार्टी के अधिकारिक प्रत्याशी के ख़िलाफ़ बाग़ी उम्मीदवार जीते। तेजस्वी के लिए संतोष की बात यह रही कि ऊंची जाति के पटना, सहरसा और मुंगेर से उनके प्रत्याशी जीत गए. कांग्रेस के एक उम्मीदवार बेगूसराय से पार्टी का खाता खोलने में कामयाब रहे। भाजपा के नेताओं के लिए ये बात निश्चित रूप से परेशान करने वाली रही कि सारण सीट से बाग़ी उम्मीदवार सच्चिदानंद राय फिर जीते। सभी दल इस हार के पीछे जीतने वाले प्रत्याशी के बेहतर या अधिक खर्च करने की क्षमता को मुख्य कारण बता रहे हैं लेकिन चुनावी प्रबंधन में सभी पुराने दल कहीं न कहीं मात खाते दिखे। नीतीश कुमार के लिए परेशानी का कारण न सिर्फ भाजपा का उनसे अधिक सीटों पर जीतना रहा बल्कि तेजस्वी की पार्टी का उनकी पार्टी से एक सीट अधिक जीतना उनकी नींद उड़ाने के लिए काफी है। जदयू के नेताओं की मानें तो राजग के घटक दलों में एकजुटता का अभाव और परस्पर बयानबाज़ी के कारण मतदाताओं में भ्रम की स्थिति हुई हैं। जदयू के वरिष्ठ नेता और मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव के अनुसार हर दिन भाजपा के नेताओं की बयानबाज़ी के कारण एक भ्रम की स्थिति बन गयी कि बिहार राजग में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। गठबंधन धर्म का पालन सभी दलों को करना चाहिए लेकिन हर दिन भाजपा के कुछ नेताओं के बयान से एक ग़लत संदेश खुद राजग के वोटर के बीच गया है। अगर राजग के सभी नेता एकजुट होकर चुनाव मैदान में जाते तो परिणाम और बेहतर हो सकता था। निश्चित रूप से विजेंद्र यादव के बयान से बिहार राजग ख़ासकर भाजपा और जदयू में सब कुछ सामान्य नहीं चल रहा, उसकी पुष्टि होती है लेकिन जदयू को इस बात का मलाल है कि पार्टी उम्मीदवारों को वो चाहे पटना सीट हो या मुंगेर या पश्चिम चंपारण सब जगह भीतरघात का सामना करना पड़ा। मुंगेर तो जदयू अध्यक्ष ललन सिंह की लीलाभूमि रही है मगर वहां राजद ने बाजी मार ली। पटना में राजद उम्मीदवार कार्तिक कुमार ने जीत हासिल की है। उन्हें पहली वरीयता के 1800 वोट मिले हैं जबकि जदयू उम्मीदवार बाल्मीकि सिंह को 1400 और निर्दलीय उम्मीदवार लल्लू मुखिया को 1500 वोट हासिल हुए हैं। मतलब यहाँ भी जदयू तीसरे नंबर पर रही। दूसरी तरफ भाजपा के नेता कहते हैं कि भाजपा जिन सीटों पर हारी, वहाँ जदयू के नेता उनके प्रत्याशी के प्रति बहुत उत्साह से काम करते कहीं नहीं दिखे।

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