Bihar news: नो टोलरेंस पर अडिग तेजस्वी

लेख समाचार

अजय भट्टाचार्य
भ्रष्टाचार
के आरोप लगाकर राज्य सरकार को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा कर बिहार के कृषि मंत्री सुधाकर सिंह का बिना किसी औपचारिक घोषणा के अपने पद से इस्तीफा देना इस बात का सबूत है कि उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव अब पार्टी के नए टॉप बॉस हैं। सुधाकर सिंह का हालिया इस्तीफा तेजस्वी की उन लोगों के प्रति सख्ती को दर्शाता है जो उनके और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नो-टॉलरेंस के स्टैंड को धूमिल करते हैं।
तेजस्वी यादव सुधाकर सिंह को अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा नहीं करने की सलाह देते थे। जब सुधाकर नहीं माने तब तेजस्वी का धैर्य खत्म हो गया और उन्हें मंत्रिमंडल से हटाने का मन बना लिया। उन्होंने अपने पिता राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को अपने फैसले से अवगत कराया। पिता की सहमति मिलते ही सुधाकर सिंह के पिता और राज्य पार्टी अध्यक्ष जगदानंद सिंह को अपने बेटे से इस संबंध में बात करने को कहा।
सुधाकर सिंह के इस्तीफे के बाद कृषि मंत्रालय अब पर्यटन मंत्री कुमार सर्वजीत को दिया गया है। तेजस्वी यादव पर्यटन मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभालेंगे। जगदानंद सिंह ने दावा किया कि उनके बेटे ने राज्य के किसानों के साथ हो रहे ‘अन्याय’ को लेकर इस्तीफा दे दिया है।
केवल जूनियर सिंह ही नहीं, तेजस्वी ने सीनियर सिंह पर भी सख्ती की है। तेजस्वी यादव ने जगदानंद सिंह की भी निंदा की, जिन्होंने नीतीश कुमार के भविष्य के बारे में कुछ विवादास्पद राजनीतिक टिप्पणी की थी। उन्होंने पहले उनके बयान को नकारा, फिर यह सुनिश्चित किया कि वे भविष्य में इस तरह के कोई भी बयान ना दें। वरिष्ठ नेता जगदानंद सिंह ने पंद्रह वर्षों तक लालू यादव और पत्नी राबड़ी देवी के अधीन राजद सरकारों में मंत्री के रूप में कार्य किया। वे लालू यादव और उनके बेटे दोनों के करीबी सहयोगी थे, जो सुधाकर सिंह को कैबिनेट में शामिल करने के पीछे एक महत्वपूर्ण कारक था। पहली बार विधायक होने के बावजूद सुधाकर ने कृषि जैसा एक बड़ा विभाग प्राप्त किया. यह तब हुआ जब जूनियर सिंह एक चावल घोटाले में भी उलझे हुए हैं। भाजपा उनके कैबिनेट में शामिल होने के बाद लगातार निशाना साध रही थी/है। सुधाकर सिंह तेजस्वी यादव की पसंद थे, इसलिए सभी ने उन्हें हटाने की मांग को खारिज कर दिया। तेजस्वी यादव ने कथित तौर पर पिछले गुरुवार को जगदानंद सिंह की टिप्पणी का भी मुद्दा उठाया, जहां उन्होंने कहा था कि नीतीश कुमार को अगले साल जूनियर यादव के लिए रास्ता बनाना चाहिए, और 2024 के संसदीय चुनावों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इससे नाराज तेजस्वी यादव ने कहा कि यह अनावश्यक है और सभी वरिष्ठ नेताओं को इस तरह के बयान देने से बचना चाहिए। अगले ही दिन जगदाबाबू के दस्तखत वाला एक बयान जारी हुआ, जिसमें भविष्य में इस तरह के किसी भी बयान को प्रतिबंधित किया गया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि पिछले दिनों हुई ये दो घटनाएं तेजस्वी यादव के ‘नो- नॉनसेंस’ मूड को साफ तौर पर दर्शाती हैं। उपमुख्यमंत्री उनकी चापलूसी और नीतीश कुमार की आलोचनात्मक बयान देने वाले नेताओं से अतिरिक्त सतर्क रहते हैं, जिसमें उनकी पार्टी के संबंधित कोर वोट बैंकों को भ्रमित करने वाले संकेत भेजने की क्षमता है।

तेजस्वी यादव इस बात को लेकर खासे सतर्क हैं भाजपा की मशीनरी नीतीश कुमार के मुख्य आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (ईबीसी) मतदाताओं के बीच यह संदेश फैलाने के लिए ओवरटाइम काम कर रही है कि राजद तेजस्वी यादव को ताज पहनाने की जल्दी में है, और किसी भी समय नीतीश कुमार की पीठ में छुरा घोंप सकती है। भाजपा यह भी जानती है कि अमित शाह के दावों के बावजूद हकीकत यही है कि महागठबंधन के वोटों का गणित और नीतीश कुमार व तेजस्वी यादव की नई केमिस्ट्री गठबंधन को राज्य में लगभग अजेय बना देती है।

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