Bihar: ऑपरेशन आरसीपी

समाचार

अजय भट्टाचार्य
अंततः
जनता दल यूनाइटेड सुप्रीमो और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक समय में उनके करीबी रहे और अब उनकी कोपभाजन के शिकार पूर्व केंद्रीय मंत्री रामचंद्र प्रसाद सिंह को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है या यूँ कहें कि इस तरह का पांसा फेंका कि खुद आरसीपी ‘बड़े बेआबरू होकर तेरी गली से हम निकले’ वाले अंदाज में जदयू से इस्तीफ़ा देकर मुक्त हो गये। इसलिए ही दो दिन पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन के इशारे पर पार्टी की बिहार इकाई के अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने आरसीपी सिंह को पत्र लिखकर उनसे जवाब मांगा था। उनसे पूछा गया कि बताएं कि कैसे नालंदा जिले के दो प्रखंड में उन्होंने चालीस बीघा जमीन खरीदी और क्या ये आपकी नियमित आमदनी से खरीदी गई है। इस नोटिस में यह तो माना गया कि अधिकांश भूखंड उन्होंने अपनी पत्नी या बेटी के नाम से खरीदी है, लेकिन पार्टी ने इस संपत्ति को चुनावी हलफनामे में नहीं दिखाने पर सवाल उठाये थे। नीतीश कुमार ने पिछले दो महीने के दौरान आरसीपी सिंह को ना केवल राज्यसभा की सदस्यता से वंचित किया बल्कि पटना में वे जिस घर में रहते थे उस घर को भी मुख्य सचिव को आवंटित कर खाली करने पर मजबूर कर दिया। आरसीपी के मुताबिक अधिकांश भूखंड उनकी बेटियों या पत्नी के नाम पर हैं, जो आयकर जमा करती हैं। विभाग में उन्होंने खरीद-बिक्री की जानकारी दे रखी थी. इसके अलावा उनके खाते या उनके नाम से कोई भूखंड की खरीद-बिक्री नहीं हुई। ऐसे में ये आरोप लगाना कहां से उचित हैं कि लालू स्टाइल में उन्होंने जमीन अर्जित की।
सिंह ने जदयू मेंशामिल होने के लिए 12 वर्ष पहले भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी। उन्होंने करीब डेढ़ वर्ष पहले जदयू का नेतृत्व भी किया।
जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सिंह को पार्टी द्वारा राज्यसभा का एक और कार्यकाल देने से इनकार करने के बाद केंद्रीय मंत्रिपद छोड़ना पड़ा था।
अब आरसीपी सीधे नीतीश कुमार पर हमलावर है और नीतीश कुमार की प्रधानमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा पर तंज कसते हुए बोले, ‘‘वह (प्रधानमंत्री) नहीं बनेंगे, भले ही उनका सात बार पुनर्जन्म हो। ये आरोप उन लोगों द्वारा एक साजिश है, जिन्होंने मुझे केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किये जाने से ईर्ष्या की थी। मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि कांच के घरों में रहने वालों को दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकने चाहिए। मैं पार्टी की अपनी प्राथमिक सदस्यता भी छोड़ रहा हूं।’’
इधर कुशवाहा ने कहा कि जांच एजेंसियां इस मामले में स्वत: संज्ञान लेने के लिए स्वतंत्र हैं, जिसके बारे में उन्हें मीडिया के जरिए पता चला होगा। हालांकि, यह पूछे जाने पर कि क्या यह घटनाक्रम पार्टी के पूर्व अध्यक्ष के लिए पार्टी में दरवाजे बंद होने का संकेत है, कुशवाहा ने कहा, ‘‘यह एक राजनीतिक सवाल है। पार्टी इस मामले को राजनीतिक रूप से नहीं देख रही है।’’ भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के उत्तर प्रदेश कैडर के पूर्व अधिकारी सिंह ने 1990 के दशक के अंत में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर रहते हुए नीतीश कुमार का विश्वास जीता था, जब कुमार केंद्रीय मंत्री थे। सिंह ने राजनीति में आने के लिए 2010 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी।

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