Bihar Politics: नीतीश नाराज…! खुलासा आज

राजनीति समाचार

अजय भट्टाचार्य
रविवार
को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नीति आयोग की बैठक से गैरहाजिर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के तेवर बदले हुए हैं। कोरोना से हाल ही में ठीक हुए नीतीश अपने उप-मुख्यमंत्री को बैठक में भेजना चाहते थे, लेकिन उनसे कहा गया कि इसमें केवल मुख्यमंत्री ही शामिल हो सकते हैं, उनका कोई प्रतिनिधि नहीं। नीतीश कुमार नीति आयोग की रैंकिंग से नाराज रहते हैं, जिसमें बिहार को विकसित राज्यों में हमेशा सबसे नीचे रखा जाता है। इससे पहले नीतीश कुमार तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के सम्मान में पीएम मोदी द्वारा आयोजित भोज से भी दूर रहे थे। फिर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के शपथ समारोह में भी शामिल नहीं हुए। इसके अलावा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा बुलाई गई मुख्यमंत्रियों की बैठक में भी उन्होंने खुद न जाकर अपने उप-मुख्यमंत्री को भेज दिया था।
अब बिहार की राजनीति में जल्द ही किसी बड़े हेर-फेर की चर्चा चरम पर है। निवर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की विदाई और नई राष्ट्राध्यक्ष बनीं द्रौपदी मुर्मू के शपथ ग्रहण समारोह से दूर रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रविवार को प्रधानसेवक द्वारा आहूत मुख्यमंत्रियों की बैठक में भी नही गये। नीतीश कुमार ने आज मंगलवार को अपनी पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) के सभी विधायकों और सांसदों की एक बैठक बुलाई है।
नीतीश चाहते है कि भाजपा विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा की जगह किसी अन्य विधायक को सदन की सर्वोच्च कुर्सी पर बिठाये। विजय कुमार सिन्हा पर कई बार नीतीश ने अपना आपा खोया है। उन पर अपनी सरकार के खिलाफ सवाल उठाकर संविधान का खुले तौर पर उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। नीतीश कुमार अपनी पार्टी जदयू को जून 2019 में नरेंद्र मोदी सरकार में केवल एक ही मंत्री पद की पेशकश की बात से भी नाराज हैं। उन्होंने बिहार के विस्तारित मंत्रिमंडल में अपनी पार्टी के आठ सहयोगियों को शामिल कर पलटवार किया था और एक को भाजपा के लिए खाली छोड़ दिया था। पार्टी की तरफ से की गई हालिया घोषणा कि जदयू मोदी मंत्रीमंडल में शामिल नहीं होगी, इस बात का साफ संकेत है कि राजग में भीतरखाने सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। राम चंद्र प्रसाद की राज्यसभा पारी खत्म होने से उनका मंत्री पद खाली हुआ है जो जदयू कोटे के लिए है।
इसके अलावा नीतीश राज्य और राष्ट्रीय चुनाव एक साथ कराने के खिलाफ हैं। मोदी ने राज्यों और संसद के चुनाव एक साथ कराने का विचार किया था, जिसका विपक्ष ने कड़ा विरोध किया है। यह उन मुद्दों में से एक है, जहां जद (यू) को विपक्ष के साथ आम जमीन मिली। सूत्रों के अनुसार नीतीश कुमार अपने मंत्रिमंडल में भाजपा कोटे के मंत्री अपनी पसंद के चाहते हैं। यह कदम गृह मंत्री अमित शाह की बिहार पर कथित पकड़ को कमजोर करेगा, जिसे उनके करीबी के रूप में देखा जाता है। नीतीश के साथ लंबे समय तक उपमुख्यमंत्री रहे भाजपा नेता सुशील मोदी को बिहार से बाहर किया जाना भी नीतीश को पसंद नहीं था/है। शनिवार को जदयू को टाटा कर गये पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह ने केंद्रीय मंत्री बनने के लिए नीतीश कुमार को दरकिनार करते हुए, भाजपा नेतृत्व से सीधे तौर पर बातचीत की थी। भाजपा ने आरसीपी के नाम पर नीतीश से पूछा भी नहीं, तब से ही नीतीश नाराज हैं। बहरहाल यह संयोग मात्र नहीं है कि राजद की भी आज ही (मंगलवार) एक बड़ी बैठक हो रही है जिसमें पार्टी के विधायक शामिल होंगे। कांग्रेस भी अब इसको लेकर हरकत में आ गई है। कांग्रेस के प्रभारी भक्त चरण दास पटना पहुंचकर पार्टी के विधायकों से चर्चा करेंगे। कुल मिलाकर देखें तो बिहार में राजनीतिक हालात बहुत तेजी से बदल रहे हैं। भाजपा फिलहाल सभी को खामोशी से देखती नजर आ रही है। उसकी तरफ से ऐसा कोई बयान भी नहीं आ रहा है जिससे लगे कि गठबंधन में वाकई कोई दरार है।

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