Bihar Politics: वीआईपी सर्जरी से भाजपा का सपना पूरा

राजनीति राष्ट्रीय

अजय भट्टाचार्य
बिहार
में विकासशील इन्सान पार्टी (वीआईपी) के तीन विधायकों को भाजपा में शामिल कर पार्टी ने बिहार में सबसे बड़ी पार्टी होने का सपना भी पूरा कर लिया है। अब तक राजद 75 विधायकों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में कायम थी। वीआईपी सर्जरी के बाद भाजपा 77 विधायकों वाली पार्टी हो गई है। साथ ही वीआईपी से ज्यादा बड़ा झटका जनतादल यूनाइटेड को दिया है। एमएलसी चुनाव को लेकर जिस तरह कि अलग व्यूह रचना जदयू ने की थी, वीआईपी के तीनों विधायकों ने पाला बदलकर उसमें पलीता लगा दिया है। वीआईपी के मुखिया मुकेश सहनी ने सात उन सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए जो भाजपा के कोटे में आई थीं। सबसे बड़ी रार बोचहा उपचुनाव को लेकर है जहाँ वीआईपी के मुखिया मुकेश सहनी ने अपना उम्मीदवार उतार दिया है। सहनी के इस कदम से भाजपा तिलमिलाई हुई थी और मौका मिलते ही उसने सर्जिकल स्ट्राइक कर वीआईपी को निपटा दिया। अब सदन में वीआईपी का कोई विधायक नहीं है। नीतीश कुमार वीआईपी के विधायकों को अपना मानकर चल रहे थे मगर भाजपा उन्हें भी ले उड़ी और अपनी पार्टी के विधायकों की संख्या बढ़ाने का नीतीश का ख्वाब अधुरा रह गया। इधर चिराग पासवान ने बोचहा में भाजपा को समर्थन देने का फैसला कर नीतीश को मुंह चिढ़ाया है। चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (रामविलास) ने भाजपा उम्मीदवार बेबी कुमारी के खिलाफ अपना कोई प्रत्याशी खड़ा नहीं किया है। भाजपा द्वारा विधायक ले उड़ने के बाद नाराज सहनी ने गुरुवार को कहा कि इससे मैं हार नहीं मानने वाला हूं। गरीबों के लिए मेरी लड़ाई जारी रहेगी। साथ ही उन्होंने साफ कर दिया कि फिलहाल वे मंत्रिपद से इस्तीफा नहीं देंगे। मंत्री पद से इस्तीफे के सवाल पर सहनी का कहना है कि मेरा इस्तीफा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का विशेषाधिकार है, इसलिए जैसा वो कहेंगे मैं वैसा ही करूंगा। सहनी का कहना है कि बिहार भाजपा के नेता शुरू से ही उनकी पार्टी को कमजोर करने और तोड़ने की साजिश कर रहे हैं। बोले- मैंने जब भी आगे बढ़ने की कोशिश की है लोगों की आंखों में खटका हूं। इसके बाद भी मैं आखिरी सांस तक अपने लोगों के लिए लड़ाई लड़ता रहूंगा। उन्होंने संजय जायसवाल पर बहुत झूठ बोलने का आरोप लगाया.

सहनी के मुताबिक डीलिंग मेरे और अमित शाह जी के बीच हुई थी। संजय जायसवाल तब कमरे के बाहर भी नही खड़े थे। संजय जायसवाल और बीजेपी के दूसरे नेता जो बात बोल रहे हैं, अगर वही बात केंद्रीय गृह मंत्री बोल दें तो मैं सही मान लूंगा। जो पार्टी दूसरे की पार्टी के विधायकों को छीनकर सबसे बड़ी पार्टी बन जाये उस पार्टी को नैतिकता के आधार पर मेरे से इस्तीफा मांगने का अधिकार नहीं है। सहनी ने कहा कि बोचहां सीट पर पहला अधिकार हमारा था। लेकिन भाजपा ने अपने मन से वहां पर प्रत्याशी उतार दिया। उप्र चुनाव लड़ने के बाद से ही भाजपा हमें बेइज्जत कर रही है।

मुकेश सहनी को भाजपा ने बड़ा झटका दिया तो वहीं दूसरी तरफ तक उनके के समर्थन में बोलने वाली जीतन राम मांझी के हिन्‍दुस्‍तानी आवाम मोर्चा ने भी अपना पल्ला झाड़ लिया है। दूसरी तरफ चिराग पासवान लंबे वक्त के बाद भाजपा के साथ खुलकर खड़े होते नजर आ रहे हैं। अब तक चिराग पासवान यह कहते थे कि अगले चुनाव के समय ही गठबंधन के बारे में सोचेंगे। विधानसभा चुनाव के बाद जो भी उपचुनाव हुए उसमें भी चिराग की पार्टी अकेले दम पर चुनाव लड़ती नजर आई। मगर अब तस्वीर बदली-बदली सी नजर आ रही है। चिराग को भाजपा के साथ लाने में भाजपा सांसद अजय निषाद की भी भूमिका रही है। अजय निषाद ने नई दिल्ली में चिराग पासवान से मुलाकात की थी और उनसे उपचुनाव में उम्मीदवार न उतारने का आग्रह किया था।

हैरान कर देने वाला फैसला मांझी की पार्टी का रहा। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता दानिश रिजवान ने कहा कि यह वीआईपी और भाजपा के बीच का मामला है और इससे राजग के दूसरे घटक दलों को इससे कुछ लेना देना नहीं है।

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