Bihar Politics: क्या फिर पलटी मारेंगे सुशासन बाबू!

राजनीति राष्ट्रीय

अजय भट्टाचार्य
क्या
नीतीश कुमार फिर से पलटी मारने की तैयारी कर रहे हैं? यह सवाल आजकल बिहार की राजनीतिक गलियारों की सबसे बड़ी पहेली बनकर उभरा है। यह तस्वीर संभालकर रखिये जिसमें इस सवाल का जवाब भी कहीं न कहीं छिपा है। किसी समय खुद को पीएम मैटेरियल मानने/कहलाने वाले नीतीश कुमार पांच साल बाद शुक्रवार की शाम राबड़ी आवास पहुंचे थे। यह सब ठीक तब हुआ जब लंबे अर्से बाद भाजपा के दूसरे सबसे बड़े नेता अमित शाह बिहार के दौरे पर आने वाले थे और उनके आगमन के कुछ घंटे पहले नीतीश कुमार इफ्तार की दावत के बहाने लालू-राबड़ी के आवास पहुंच गये। पटना में नीतीश कुमार जहां रहते हैं वहां से चंद कदमों पर लालू-राबड़ी का आवास है जहां आयोजित दावत-ए-इफ्तार में शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री पैदल ही पहुंच गये। इस इफ्तार की खास बात यह थी कि तेजस्वी यादव और चिराग पासवान ने पांव छूकर सुशासन बाबू से आर्शीवाद ग्रहण किया।
राबड़ी देवी के घर हुई इफ्तार पार्टी में शामिल होकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कुछ दिन के लिए भाजपा के बड़बोलों को शांत कर दिया है। संदेश यह गया कि विकल्प मौजूद है। बाकी की कसर तेजप्रताप यादव ने यह कहकर पूरी कर दी कि उनकी नीतीश कुमार से सीक्रेट बातचीत हुई है, बिहार में खेला होगा, हम सरकार बनाएंगे। नीतीश कुमार से क्या सीक्रेट बात हुई है यह तेजप्रताप ही जानें। लेकिन इफ्तार पार्टी में उन्होंने नीतीश कुमार के ठीक बगल में अपनी जगह बना ली और अंत तक बैठे रहे। वह टू सीटेड सोफा था। तेजस्वी उसके बाद बैठे। ज्यादातर समय तेजस्वी खड़े दिखे। इस बीच लालू प्रसाद की सांसद बेटी मीसा भारती ने नीतीश कुमार के पास जाकर उनसे देर तक बातचीत की।
वैसे ध्यान रहे कि राजद नेता शिवानंद तिवारी ने एक हिंदी दैनिक को दिए साक्षात्कार में कहा था कि ‘नीतीश कुमार के बारे में आप लोगों को गलतफहमी है। उस आदमी ने कभी रिस्क नहीं लिया। सदन में संकल्प लेकर पलट जाने वाले को देश की जनता अब पीएम मटेरियल मानेगी यह असंभव चीज है। वे जानते हैं कि नरेन्द्र मोदी क्या चीज हैं। वे जैसे इधर से उधर होंगे कि ईडी और सीबीआई की जांच शुरू हो जाएगी। तुरंत अंदर कर दिए जाएंगे। 22 घोटाले का जिक्र नरेन्द्र मोदी ने खुद 2014 के चुनाव में गांधी मैदान में किया था।’ इफ्तार के बाद नीतीश कुमार को बाहर तक छोड़ने की बात हो या फिर अन्य बड़े नेताओं को तेजस्वी यादव ने ही इस आतिथेय को निभाया। वे कई बार अंदर से बाहर सड़क तक आए-गए। पूरा आयोजन तेजस्वी यादव के इर्द-गिर्द ही दिखता रहा। इस बीच दिनों बाद उनके रणनीतिकार संजय यादव भी दिखे। तेजप्रताप यादव, तेजस्वी यादव के करीबी जिन लोगों से खफा रहते हैं उनमें से जगदानंद सिंह, शिवानंद तिवारी, सुनील सिंह, संजय यादव आदि आयोजन में ज्यादा सक्रिय दिखे।

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