Bihar Politics: ‘भूराबाल’ के कमाल से राजद निहाल

राजनीति समाचार

अजय भट्टाचार्य
लालू
प्रसाद यादव के पुत्र व बिहार विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अपने पिता द्वारा खिंची गई सामाजिक दीवार को तोडकर नई राजनीति की तरफ कदम बढ़ा दिए हैं। वे अब राजद को एमवाई (मुस्लिम-यादव) समीकरण के चोले से बाहर निकालने में जुटे हैं।
कभी राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव ‘भूराबाल’ साफ करने को कहा करते थे। अब हाल ही में संपन्न विधान परिषद चुनाव में राजद ने ‘भूराबाल’ से दुश्मनी के बजाय दोस्ती गांठ ली और नतीजा फायदे का रहा। चुनाव जीतने वाले छह में से चार ‘भूराबाल’ से आये हैं। बिहार में 1990 में लालू प्रसाद यादव ने सत्ता संभाली तो ‘भूराबाल’ साफ करने का नारा बुलंद किया। इसमें भूमिहार , राजपूत , ब्राह्मण और कायस्थ ( लाला ) को लक्षित कर एमवाई समीकरण का झंडा बुलंद करते हुए पंद्रह सालों तक सत्ता में काबिज रहे। लेकिन समय बदला तो सता से दूर हो गए। तेजस्वी ने जब राजद का कमान संभाली तो सार्वजनिक मंच से इसको लेकर कई बार माफी मांगी । इसी लिए राजद की माय ( यादव – मुस्लिम ) वाली सोंच बदल गयी है। इस चुनाव में ‘भूराबाल’ने हीं तेजस्वी की इज्जत बचायी। बिहार स्थानीय प्राधिकार की 24 सीटों के चुनाव में भाजपा ने दो ऐसी सीटें हारी है, जहां उसके उम्मीदवार पहले से काबिज थे। इस चुनाव में छह सीटों पर राजद ने कब्जा जमाया है। भाजपा को चार सीटों का नुकसान और राजद को दो सीटों का फायदा हुआ है। जदयू, कांग्रेस और लोजपा का प्रदर्शन 2015 जैसा रहा। 24 में 17 नये उम्मीदवार ने जीत दर्ज किया है। राजद ने इस चुनाव में यादव-राजपूत-भूमिहार पर बड़ा दांव खेलकर एक तीर से सभी को साधने का काम किया।
शनिवार को बोचहाँ विधानसभा उपचुनाव का मतदान हुआ है। इस उपचुनाव के प्रचार में भी तेजस्वी यादव ने खुलकर मंच से सवर्ण समाज के वोटरों को अपने साथ लेकर चलने की बात की। राजद को अब ए टू जेड की पार्टी बताने वाले तेजस्वी यादव ने फिर एकबार अपनी शादी की चर्चा खुले मंच से की। तेजस्वी यादव ने राजद को एटूजेड फ्रेम में ढालने की रफ्तार तेज कर दी है। बोचहां उपचुनाव में भी वे भूमिहार समेत अन्य सवर्ण समाज के वोटरों को साधने में लगे दिखे। उनके संबोधन को देखें तो ऐसा दो बार हुआ जब हाल में ही तेजस्वी यादव ने अपनी शादी की जिक्र लोगों के बीच किया। अपने विवाह को भी उदाहरणस्वरूप पेश किया। मुजफ्फरपुर के सरफुद्दीनपुर हाइस्कूल के प्रांगण में आयोजित चुनावी सभा में तेजस्वी चुटकी लेते हुए कहा था कि मैं और मेरे यहां के प्रत्याशी अमर पासवान की शादी ने यह साबित कर दिया है कि यह अब किसी एक जात की पार्टी नहीं है। ए टू जेड की पार्टी है, जिसमें सब को सम्मान दिया जाता है। बता दें कि इससे पहले भी तेजस्वी यादव ने इसका जिक्र किया था। तेजस्वी यादव की पत्नी ईसाई धर्म की अनुयायी रही हैं। विवाह के बाद उनका नाम परिवर्तन किया गया। बिहार की राजनीति में जहां यादव समाज के वोटरों को राजद का कैडर वोटर माना जाता रहा वहीं भूमिहार समाज के वोटरों को लेकर माना जाता रहा है कि वो दूसरी छोर पर खड़े रहते हैं। वैसे भी बिहार विधान परिषद् चुनाव के नतीजे ने साफ कर दिया है कि लीक पर चलकर चुनाव नहीं जीते जा सकते। इसलिये राजद उस समाज को साधने के जुगाड़ में लग गया है, जो राजद से नाराज है।

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