Bipin Rawat: दर्दनाक मौत की उड़ान

फीचर राष्ट्रीय

अजय भट्टाचार्य
हेलिकॉप्टर
के बिखरे-बिखरे पुर्जे और जलते हुए मानवीय शरीर दुर्घटना की भीषणता को समझने के लिए काफी हैं। आज देश अपने रक्षाकर्मियों के पहले प्रमुख जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी मधुलिका रावत सहित 13 सेनाकर्मियों को नम आँखों से विदाई दे रहा है। बुधवार को हुई एक दुर्घटना ने हमसे हमारे वीर सेनानायकों को छीन लिया है। सबसे बड़ा आश्चर्य इस बात को लेकर है कि एमआई-17वी-5 हेलिकॉप्टर दुनिया के श्रेष्ठ हेलिकॉप्टरों में एक है। दुर्घटना की त्रि-स्तरीय जाँच के आदेश दिए जा चुके हैं।

प्रारंभिक सूचनाओं के अनुसार चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत के हेलिकॉप्टर हादसे की वजह खराब मौसम को माना जा रहा है। अभी तक सामने आए संकेत और दिल्ली में उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक घने जंगल, पहाड़ी इलाका और लो विजिबिलिटी की वजह से ही हेलिकॉप्टर क्रैश हुआ। वेलिंगटन का हेलिपैड जंगल और पहाड़ी इलाके के तुरंत बाद पड़ता है इसलिए पायलट के लिए इसे दूर से देख पाना मुश्किल होता है। ऐसे में खराब मौसम में हेलिकॉप्टर की लैंडिंग यहां हमेशा ही चुनौतीपूर्ण रहती है। बचाव व राहत कार्य चलाने के लिए चॉपर के आसपास से पेड़ की टहनियों को हटाते रेस्क्यू दल के लोग और पुलिस के जवान दुर्घटना संबंधी वीडियो में देखे गये हैं। शुरुआती संकेतों के मुताबिक खराब मौसम के दौरान बादलों में विजिबिलिटी कम होने की वजह से हेलिकॉप्टर को कम ऊंचाई पर उड़ान भरनी पड़ी। लैंडिंग पॉइंट से दूरी कम होने की वजह से भी हेलिकॉप्टर काफी नीचे था। नीचे घने जंगल थे, इसलिए क्रैश लैंडिंग भी फेल हो गई। इस हेलिकॉप्टर के पायलट ग्रुप कैप्टन और सीओ रैंक के अधिकारी थे। ऐसे में मानवीय भूल की आशंका न के बराबर है।
हेलिकॉप्टर दो इंजन वाला था। ऐसे में अगर एक इंजन फेल हो जाता तो भी बाकी बचे दूसरे इंजन से लैंडिंग की जा सकती थी। चश्मदीदों के बयानों के मुताबिक हेलिकॉप्टर काफी नीचे उड़ रहा था. सुलूर से उड़ान भरने के बाद इसने 94 किमी की यात्रा तय कर ली थी मगर मंज़िल पर पहुंचने से कुछ मिनट पहले क्रैश हो गया। जहां पर दुर्घटना हुई है उस जगह से वेलिंगटन का आर्मी कैंप 16 किलोमीटर की दूरी पर बताया जा रहा है। जहां यह घटना हुई है उसका नाम नांचापा चथारम है। कट्टेरी इलाका है। तस्वीरें बता रही हैं कि ढलान पर दुर्घटना हुई है। कारणों का पता ब्लैक बॉक्स, डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकार्डर या कॉकपिट वाइस रिकार्डर से ही पता चलेगा। मौसम और अन्य कारणों की क्या भूमिका होगी यह सब जांच के बाद ही पता चलेगा। भारतीय वायु सेना के एमआई-17वी-5 हेलीकॉप्टर की घातक दुर्घटना जिसमें चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बिपिन रावत, उनकी पत्नी और 11 अन्य की मौत हो गई, ने कई पूर्व सैन्य अधिकारियों को हैरान कर दिया है। जो विमान की विश्वसनीयता की पुष्टि करते रहे हैं। “सुलूर से वेलिंगटन के लिए उड़ान का समय केवल 20 से 25 मिनट है। इतनी छोटी उड़ान अवधि में क्या गलती हो सकती है, यह निर्धारित करना बहुत मुश्किल है।” यह बात भारतीय वायु सेना के पूर्व प्रमुख एयर चीफ मार्शल फली एच मेजर ने एक निजी चैनल से बात करते हुए कही है। लैंडिग में किसी तरह की समस्या नहीं आने की बात कहते हुए उन्होंने बताया कि वेलिंगटन में हेलीपैड की ऊंचाई भी ज्यादा नहीं थी, लगभग 5,000 फीट थी। सेना के पूर्व अधिकारियों का भी कहना है कि एमआई-17वी-5 हेलीकॉप्टर वायु सेना का बेहद विश्वसनीय कामकाजी वाहन हैं। यह बेहतर उड़ान वाहन के साथ रूसी निर्मित एमआई 17 हेलिकॉप्टरों के बेड़े का नवीनतम संस्करण है और भारत के पास इनका एक बड़ा बेड़ा है, जिसे 2008 और 2018 के बीच खरीदा और सेना में शामिल किया गया था। इन्हें “उत्कृष्ट” और “सुरक्षित” बताते हुए पूर्व सैन्य अधिकारियों और रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सियाचिन ग्लेशियर जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों और स्थानों में इनका उपयोग सैकड़ों घंटों से किया जा रहा है। उनकी विश्वसनीयता और सुरक्षा ने उन्हें राष्ट्रपति और प्रधान मंत्री सहित वीआईपी के लिए पसंदीदा परिवहन बना दिया था। यह पूछे जाने पर कि क्या गलत हुआ, हम कैसे जान सकते हैं, पूर्व वायु सेना प्रमुख ने कहा कि हेलिकॉप्टर में एक वॉयस रिकॉर्डर और एक फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर है, जो हमें इसका पता लगाने में मदद करेगा।
( लेखक देश के जाने माने पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

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