परिवारवाद से नहीं बच पाई भाजपा और कांग्रेस

फीचर राजनीति

अजय भट्टाचार्य
उत्तराखंड
में कांग्रेस और भाजपा के प्रत्याशियों की सूचियां जारी हो चुकी हैं। परिवारवाद के नजरिए से देखें तो भाजपा ने एक परिवार-एक टिकट के सिद्धांत का पालन तो किया है लेकिन परिवार में ही टिकट देने की परंपरा से छुटकारा नहीं पा सकी। खानपुर में भाजपा ने विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन की पत्नी कुंवरानी देवयानी को प्रत्याशी बनाया है। देहरादून कैंट में कार्यकर्ताओं के विरोध के बीच भाजपा ने दिवंगत विधायक हरबंस कपूर की पत्नी सविता कपूर को टिकट दिया है। पिथौरागढ़ में भाजपा ने दिवंगत वरिष्ठ नेता प्रकाश पंत की पत्नी चंद्रा पंत, सल्ट में दिवंगत विधायक सुरेंद्र सिंह जीना के भाई महेश जीना, कोटद्वार में पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी की बेटी ऋतु भूषण खंडूड़ी, सितारगंज में भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के बेटे सौरभ बहुगुणा, काशीपुर में भाजपा के वरिष्ठ नेता व विधायक हरभजन सिंह चीमा के बेटे त्रिलोक सिंह चीमा को टिकट देकर यह साफ हो गया कि इस बार भाजपा परिवार में ही राजनीतिक विरासत संभालने की पंरपरा से पीछा नहीं छुड़ा पाई है। परिवारवाद के मामले में कांग्रेस न तो को एक परिवार-एक टिकट के सिद्धांत का पालन कर पाई और न ही परिवारवाद से छुटकारा हासिल कर पाई। कैंट सीट पर वैभव वालिया और अभिनव थापर भी युवा कोटे से टिकट चाह रहे थे, लेकिन उनके अरमान पूरे नहीं हो पाए। यशपाल आर्य बाजपुर से लड़ेंगे जबकि उनका बेटा संजीव आर्य नैनीताल से चुनाव मैदान में है। पूर्व सांसद केसी सिंह बाबा के बेटे नरेंद्र चंद सिंह को पार्टी ने काशीपुर से टिकट दिया है। लैंसडोन विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने पूर्व मंत्री व वरिष्ठ नेता हरक सिंह रावत की पुत्रवधू अनुकृति गुसाईं को टिकट दे दिया है। कुल मिलाकर देखें तो परिवारवाद की छाया से कांग्रेस भी बच नहीं पाई।
भाजपा ने आठ और कांग्रेस ने पांच महिलाओं को टिकट दिए। युवा मुख्यमंत्री की अगुवाई में चुनाव लड़ने जा रही भाजपा ने भाजयुमो के एक भी नेता पर भरोसा नहीं जताया जबकि कांग्रेस ने युवा कांग्रेस के दो नेताओं को टिकट दिया है। भारतीय जनता पार्टी इस बार युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अगुवाई में युवा सरकार के दावे के साथ चुनाव मैदान में ताल ठोक चुकी है। डोईवाला को छोड़कर अभी तक 69 सीटों पर प्रत्याशी घोषित हो चुके हैं। इन प्रत्याशियों में भारतीय जनता युवा मोर्चा के नेताओं पर केंद्रीय नेतृत्व ने भरोसा नहीं जताया। एक भी भाजयुमो नेता को भाजपा ने टिकट नहीं दिया है, जबकि सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जैसी अहम जिम्मेदारी से आगे बढ़े हैं।
महिलाओं के नजरिए से देखें तो कांग्रेस के मुकाबले भाजपा का स्कोर बेहतर रहा है। भाजपा ने आठ महिलाओं को मैदान में उतारा है। विधानसभा चुनाव की तैयारी की शुरुआत एक परिवार-एक टिकट के दावे के साथ करने वाली कांग्रेस भी इससे पीछा नहीं छुड़ा पाई। खुद जिन पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के नेतृत्व में चुनाव लड़ा जा रहा है, उनकी ही बेटी को टिकट दे दिया गया। वैसे कांग्रेस ने अपने युवा कांग्रेस संगठन पर भरोसा जताया है। महिलाओं के नजरिए से देखें तो कांग्रेस इस बार पांच महिलाओं पर भरोसा जता पाई है जबकि दो महिलाओं के नाम की घोषणा करने के बाद उन्हें सूची से हटा दिया गया। कांग्रेस ने हरिद्वार ग्रामीण में हरीश रावत की बेटी अनुपमा रावत, मसूरी में गोदावरी थापली, भगवानपुर में ममता राकेश, रुद्रपुर से मीना शर्मा औ लैंसडोन से अनुकृति गुसाईं को टिकट दिया है। जबकि हरिद्वार जिले की ज्वालापुर सीट पर बरखा रानी और लालकुआं सीट पर संध्या डालाकोटि का टिकट देने के बाद नाम वापस ले लिया गया। भाजपा की आठ महिला प्रत्याशियों के मुकाबले कांग्रेस ने पांच महिलाओं को टिकट दिए। युवाओं पर भरोसे की बात करें तो कांग्रेस ने दो टिकट युवाओं को दिए हैं। इनमें युवा कांग्रेस कोटे से जयेंद्र चंद रमोला को ऋषिकेश सीट से और ज्वालापुर से रवि बहादुर को टिकट दिया गया।
(लेखक देश के जाने माने पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

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