मिशन बिहार पर सीबीआई…!

समाचार

अजय भट्टाचार्य
फ्लोर
टेस्ट से पहले सक्रिय हुई सीबीआई ने कथित जमीन-रेलवे नौकरियों के मामले में बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद अशफाक करीम, फ़ैयाज़ अहमद और विधान पार्षद सुनील सिंह के घर कल छापामारी की जो कि अपेक्षित ही था। केंद्रीय सत्ता के इस प्रयोग संयोग का नंगा नाच हर उस प्रदेश में हो रहा है जहाँ भाजपा की सत्ता नहीं है। डराने-धमकाने की यह राजनीति एक दिन भाजपा के लिए भी मुसीबत बनेगी क्योंकि लोकतंत्र में सत्ता स्थायी नहीं होती। आज नहीं. कल नहीं मगर एक दिन ऐसा जरुर आयेगा जब जनता इस तरह की कारगुजारियों से नाराज होकर भाजपा को उसी तरह सत्ता से बाहर करेगी जैसे कांग्रेस को किया था। छापेमारी पर राजद एमएलसी और बिस्कोमान पटना के अध्यक्ष सिंह ने कहा है कि यह जानबूझकर किया जा रहा है। इसका कोई मतलब नहीं है। वे यह सोचकर ऐसा कर रहे हैं कि डर के मारे विधायक उनके पक्ष में आएंगे। सुनील सिंह के घर के अलावा करीब 24 जगहों पर पर सीबीआई ने छापामारी की है। इसमें दिल्ली, गुरुग्राम, पटना, कटिहार, मधुबनी शामिल है। गुरुग्राम में अर्बन क्यूब 71 मॉल है, ये तेजस्वी यादव और उनके करीबियों का बताया जा रहा है, वहां भी सीबीआई जुटी हुई थी/है। यूपीए-1 सरकार में लालू यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान हुए घोटाले के मामले में सीबीआई ने 18 मई 2022 को एफआईआर दर्ज कर लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, मीसा भारती, हेमा यादव समेत अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा कायम किया था। इस मामले में सीबीआई ने लालू यादव के करीबी भोला यादव को गिरफ्तार किया था। जब लालू यादव रेल मंत्री थे तब भोला यादव उनके विशेष कार्य अधिकारी थे। सीबीआई की कार्रवाई पर जदयू के प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने बड़े सवाल उठाये हैं कि जहां जहां सत्ता परिवर्तन होता है भाजपा की मित्र पार्टियां अलग होती हैं वहां इस तरह के प्रयोग किए जाते हैं। ऐसा प्रयोग पहले महाराष्ट्र में भी हो चुका है। कई नेताओं का कहना था कि अब बिहार में छापेमारी शुरू होगी। जो हमारा अनुमान था वह सही साबित हुआ, लेकिन एक चीज जरूर कहना चाहता हूं कि हम इन जांच एजेंसियों का सम्मान करते हैं. ये एजेंसियां निष्पक्ष जांच के लिए बनी हैं। अगर इनके इरादों का विस्फोट पहले ही हो जाता है, या इनकी टाइमिंग का पता पहले ही चल जाता है तो निष्पक्षता पर ही सवाल खड़े होते हैं। जब महाराष्ट्र में विधानसभा अध्यक्ष पर प्रस्ताव होना था तो वहां पर विधानसभाध्यक्ष को भाजपा इस्तीफा देने के लिए कह रही थी। लेकिन आज हम बहुमत की विधानसभा में हैं और वहां चुनाव की आवश्यकता भी नहीं है और वहां पर विधानसभाध्यक्ष के भाषण की बात कर रहे थे। भाजपा देश की सबसे बड़ी पार्टी है। उसके द्वारा ही इस तरह की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को छिन्न-भिन्न किया जाएगा तो लोकतंत्र कमजोर पड़ेगा इसलिए भाजपा को उदाहरण पेश करना चाहिए। जो स्थापित परंपराएं हैं उसे स्वीकार करें। जांच एजेंसी के बारे में जरूर करना चाहता हूं आपके इरादे पहले से ही एक्सपोज हो जाते हैं। अगर छापे जिनके यहां डालने हों उनको पहले ही पहले ही पता लग जाता है तो आप की जांच की प्रतिबद्धता पर भी सवाल उठेंगे। यह भी एक राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है, जो नहीं होना चाहिए। हमारे संविधान के निर्माताओं ने और जो पहले के प्रधानमंत्री थे और जो मुख्यमंत्री थे उनके कार्यकाल में इस तरह की कार्यवाही पर रोक रहती थी, यह आम चलन में नहीं थी।

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