अमृतकाल में चारण चैनल

राष्ट्रीय

अजय भट्टाचार्य
वायनाड
कांग्रेस कार्यालय पर हुए हमले के संदर्भ में राहुल गाँधी के बयान को जी न्यूज ने जिस तरह उदयपुर की घटना से जोडकर समाचार प्रसारित किया, यह भारत की स्वतंत्रता के अमृतकाल में चारण चैनलिया पत्रकारिता का उत्कृष्ट उदाहरण है। बाद में शोर शराबा होने पर चैनल ने माफ़ी भी मांग ली। जब इस मामले में छत्तीसगढ़ में मामला दर्ज हुआ और चैनल के समाचार प्रस्तोता के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ तब चारण चैनल के बचाव में आका की पुलिस आ गई। नोएडा पुलिस ने चैनल के एंकर को हिरासत में लिया है। नोएडा सेक्टर- 16ए में स्थित जी-मीडिया के एक अधिकारी बी आर वेंकटरमन ने थाना सेक्टर 20 में, संस्थान के एक वरिष्ठ प्रोड्यूसर और एक प्रशिक्षु प्रोड्यूसर के खिलाफ एक शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के अनुसार, दोनों प्रोड्यूसर ने, केरल के वायनाड में राहुल गांधी के कार्यालय में हुई तोड़फोड़ के बारे में दिए गए उनके (राहुल के) बयान को तोड़-मरोड़ कर चैनल पर प्रसारित कर दिया। पुलिस इस मामले में धारा 505 (2) के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच कर रही है। उक्त समाचार को पढ़ने वाले एंकर को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। ज़ी टीवी के एक न्यूज़ एंकर, रोहित रंजन पर यह कार्रवाई चैनल द्वारा कांग्रेस नेता राहुल गांधी के भ्रामक वीडियो चलाने के बाद की गई है। इस वीडियो के लिए चैनल ने माफी भी मांगी थी। अब इस खबर के निहितार्थ समझिये। चैनल ने माफ़ी मांगने के साथ ही अपने मुलाजिमों पर कार्रवाई क्यों नहीं की! शायद चैनल को लगा कि जब माफ़ी मांग ही ली है तो संबंधित मुलाजिमों को भी माफ़ी मिल गई। फिर अचानक चैनल अपने कर्मचारियों के खिलाफ नोएडा के एक थाने में शिकायक लिखवाकर उन्हें गिरफ्तार भी करा देता है, क्यों?
इस क्यों में ही चारण के माई-बाप परोक्षत: नजर आ जाते है।
दरअसल रोहित रंजन ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, एसएसपी गाजियाबाद और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक लखनऊ को टैग करते हुए ट्वीट किया, ‘बिना लोकल पुलिस को जानकारी दिए छत्तीसगढ़ पुलिस मेरे घर के बाहर मुझे अरेस्ट करने के लिए खड़ी है, क्या ये क़ानूनन सही है।’ चूँकि पुलिस अच्छी तरह जानती है कि गिरफ्तारी वारंट पर कार्रवाई कैसे होती है, इसलिये एंकर को छत्तीसगढ़ पुलिस से बचाने की रणनीति के तहत इधर चैनल ने शिकायत दर्ज कराई उधर तुरंत गाजियाबाद में पुलिस एंकर को कहीं ओर लेकर निकल गई। एंकर के ट्वीट पर छत्तीसगढ़ पुलिस का जवाब भी आ गया कि अगर वारंट है तो किसी को सूचित करने की जरूरत नहीं है। रायपुर पुलिस ने ट्वीट करते हुए लिखा, ‘सूचित का ऐसा कोई नियम नहीं है। हालांकि, अब उन्हें सूचना मिल चुकी है। पुलिस टीम ने आपको कोर्ट का गिरफ्तारी वारंट दिखाया। आपको सहयोग करना चाहिए, जांच में शामिल होना चाहिए और अपना बचाव अदालत में रखना चाहिए।’ छत्तीसगढ़ पुलिस टीम द्वारा एंकर को गिरफ्तारी से बचाने के लिए गाजियाबाद पुलिस उन्हें अपने साथ ले गई। वह उप्र पुलिस की हिरासत में हैं, और जिस मामले में उन्हें हिरासत में लिया गया है, उसमें हल्की धाराएं लगाई गई हैं। राहुल गांधी के बयान को एंकर रोहित रंजन ने उदयपुर दर्जी के हत्यारों पर राहुल गांधी के बयान के तौर पर चलाया था। इसके बाद एंकर के खिलाफ राजस्थान और छत्तीसगढ़ में मामले दर्ज किए हुए हैं। इस वीडियो को राज्यवर्धन राठौर जैसे भाजपा नेताओं ने भी शेयर किया था, उनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज हुई है।
यह केवल एक चैनल का मामला नहीं है। कुछ गिने-चुने चैनलों को छोड़ दें तो लगभग हर चैनल केंद्रीय सत्ता प्रतिष्ठान की चाकरी करता दीखता है। उसे देश के हालात नजर नहीं आते! महंगाई, अशिक्षा, बेरोजगारी के मुद्दे नही दीखते। दीखते हैं तो वे मुद्दे जिनसे एक दल विशेष का फायदा हो। आज जितनी चीख पुकार उदयपुर और अमरावती कांड पर मची है क्या शंभूलाल रैगर मामले में भी इतना शोर मचाया था?

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