कांग्रेस का नया पाटीदार

राजनीति समाचार

अजय भट्टाचार्य
पाटीदार
आंदोलन से उपजे नेता और गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी (जीपीसीसी) के कार्यकारी अध्यक्ष हार्दिक पटेल राज्य नेतृत्व के रवैये की वजह से नाराज चल रहे हैं। पिछले दिनों उन्होंने खुद को रामभक्त हिंदू बताया तो उनके भाजपा में शामिल होने की अटकलें बढ़ गईं। बाद में उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि वे कांग्रेस आलाकमान से नहीं, बल्कि राज्य के नेतृत्व से नाराज हैं। अब जबकि हार्दिक पटेल पार्टी के राज्य नेतृत्व से नाराज चल रहे हैं, तो कांग्रेस को नरेश पटेल के रूप में एक नया पाटीदार नेता मिल गया है जो संभवत: कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं।
गुजरात में पाटीदार समुदाय के नेता नरेश पटेल लेउवा पटेल समाज के खोडलधाम के अध्यक्ष हैं। नरेश भले इस समय सक्रिय राजनीति में नहीं हैं, लेकिन गुजरात के पाटीदार समुदाय में पिछले एक दशक से उनकी खास पहचान है। खोडलधाम में भव्य मंदिर के निर्माण में उनकी भूमिका अहम रही है और पाटीदार समुदाय के लोगों पर उनका खास वर्चस्व भी है। उनकी गुजरात की राजनीति में हमेशा निर्णायक भूमिका रही है।
गुजरात के राजनीतिक पंडितों के अनुसार कच्छ, राजकोट, जामनगर, अमरेली, भावनगर, जूनागढ़, पोरबंदर और सुरेंद्र नगर जिलों में लेउवा पटेल समुदाय के लोगों की संख्या अच्छी है। लेउवा समाज में खासा वर्चस्व होने की वजह से गुजरात के सभी सियासी दलों की नजर नरेश पटेल पर टिकी रहती है। गुजरात के चुनावी समीकरण को बनाने और बिगाड़ने में पटेलों और पाटीदार समुदाय के लोगों की भूमिका हमेशा निर्णायक ही रही है। ऐसे में, नरेश पटेल सभी दलों के पसंदीदा नेता माने जाते हैं। बताया यह जा रहा है कि गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले नरेश पटेल जिस दल के साथ जाएंगे, पटेल और पाटीदार समाज उसी के समर्थन में खड़ा हो जाएगा।
गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ नेताओं के साथ चल रही खटपट की वजह से पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष हार्दिक पटेल इस समय राज्य नेतृत्व से नाराज चल रहे हैं। उनका कहना है कि राज्य नेतृत्व न तो खुद काम करता है और न ही किसी को करने देता है। उनके इस आरोप के बाद गुजरात कांग्रेस वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें पार्टी की अंदरुनी बातों को सार्वजनिक नहीं करने की चेतावनी दी थी। इसके बाद पार्टी के राज्य नेतृत्व की शिकायत लेकर हार्दिक पटेल ने दिल्ली में पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल से मुलाकात भी की थी। इस मुलाकात के बाद उन्होंने खुद को हिंदू और रामभक्त बताकर सियासत को गरमा दिया। बहरहाल चुनाव के मुहाने पर खड़े गुजरात में कांग्रेस की भीतरी उठापटक क्या रंग लायेगी, यह देखना बाकी है।
जहाँ तक नरेश पटेल का सवाल है तो उनके समाज के बुजुर्ग उन्हें राजनीति में नहीं देखना चाहते जबकि समाज का युवा और महिलायें चाहती हैं कि नरेश सक्रिय राजनीति में उतरें। बीते शनिवार को नरेश पटेल की दिल्ली में चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर से मुलाकात भी हुई थी। उस समय प्रशांत किशोर के कांग्रेस में शामिल होने की खबरें हवा में तैर रही थीं। अब पीके की कांग्रेस में शामिल होने की संभावना खत्म हो चुकी है। मगर यह भी सच है कि नरेश पटेल और पीके की गहरी मित्रता है। पटेल ने कहा भी है कि मैं अगर राजनीति में उतरूंगा तो पीके उसे सराहेंगे।

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