खतरे का संकेत बढ़ता व्यापार घाटा

फीचर राष्ट्रीय

अजय भट्टाचार्य
दो
देशों के बीच आयात और निर्यात के अंतर को व्यापार संतुलन कहते हैं। व्यापार संतुलन ही किसी भी देश के विदेशी मुद्रा भंडार की धुरी है। जब कोई देश निर्यात की तुलना में आयात अधिक करता है तो उसे व्यापार घाटे का सामना करना पड़ता है। इसके विपरीत आयात की तुलना में अधिक निर्यात व्यापार लाभ को इंगित करता है। विदेशी मुद्रा भंडार को फोरेक्स रिज़र्व या आरक्षित निधियों का भंडार भी कहा जाता है भुगतान संतुलन में विदेशी मुद्रा भंडारों को आरक्षित परिसंपत्तियाँ’ कहा जाता है तथा ये पूंजी खाते में होते हैं। यह किसी देश की अंतर्राष्ट्रीय निवेश स्थिति का एक महत्त्वपूर्ण भाग हैं। श्रीलंका का विदेशी मुद्रा भंडार भी धीरे धीरे खाली कर दिया गया था। आज उसके भयावह हालात दुनिया के सामने हैं।
अपने देश भारत का व्यापार घाटा लगातार तेज़ी से बढ़ रहा है। इस वर्ष अप्रैल में देश का व्यापार घाटा 20.4 अरब डॉलर था जो मई में 2.9 अरब डॉलर बढकर 23.3 अरब डॉलर हो गया। जून में भी देश के व्यापार घाटे में 2.3 अरब डॉलर का इजाफा हुआ और देश का व्यापारघाटा 25.6 अरब डॉलर हो गया। इसका मतलब यह हुआ कि हमारा देश अपने यहाँ के लोगों की मांग के अनुरूप वस्तुओं और सेवाओं का पर्याप्त उत्पादन नहीं कर पा रहा है। इसलिये उसे अन्य देशों से इनका आयात करना पड़ रहा है। भारत का सर्वाधिक व्यापार घाटा पड़ोसी देश चीन के साथ 63 अरब डॉलर है। हमारे देश के व्यापार घाटे की वजह से चीन व्यापारिक लाभ की स्थिति में है क्योंकि हमारी सरकार चीन से बहुतायत में विभिन्न समान आयात कर रही है। मतलब ये की चीन के साथ व्यापार भारत के हित में कम तथा चीन के लिये अधिक फायदेमंद है। केवल मोबाईल फोन उत्पाद को ही लें तो 2014 के पहले ओप्पो वीवो भारत के मार्केट में मौजूद ही नही थे। श्याओमी बस घुसने की कोशिश कर ही रहा था लेकिन भारत की देशी कंपनिया उसे तगड़ी टक्कर दे रही थी। भारतीय बाजार का एक स्वदेशी ब्रांड माइक्रोमैक्स बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहा था। 2014 के दूसरे तिमाही में जब मोदी ने सत्ता संभाली ही थी माइक्रो मैक्स की बिक्री सैमसंग के बराबर हो गई थी। लगभग 17 प्रतिशत बाजार पर माइक्रोमैक्स का कब्जा था इसके अलावा लावा, कार्बन, ओर इंटेक्स जैसे भारतीय ब्रांड भी मार्केट में छाए थे। मोदी सरकार की नीतियों ने चीनी ब्रांड को प्रमोट करना शुरू कर दिया। नतीजा यह हुआ कि 2019 में भारत के 72 फीसद स्मार्टफोन बाजार पर चीनी ब्रांड का कब्जा हो गया। 2021 में चीनी कंपनी बीबीके ग्रुप (ओप्पो, वीवो, रीयलमी और वनप्लस ) ओर श्याओमी ( रेडमी और पोको ) भारत के लगभग 85 प्रतिशत बाजार पर कब्जा कर चुकी हैं। आप अंदाज लगाइए कि भारत में सिर्फ स्मार्ट फोन बाजार 38 बिलियन डॉलर है जिसमे लगभग 85 फीसदी पर चीनी कंपनियाँ कब्जा करके बैठी हैं और हम मेक इन इण्डिया का नारा लगाकर काम चला रहे हैं।
व्यापार घाटे का सीधा असर देश की आर्थिक स्थिति विशेषकर चालू खाते, रोज़गार सृजन, विकास दर और मुद्रा के मूल्य पर पड़ता है। यदि किसी देश का व्यापार घाटा लंबे समय तक बना रहता है तो हमारा देश भी गंभीर आर्थिक संकट की तरफ बढ़ सकता है। इसी महीने एक जुलाई को समाप्त हुए कारोबारी सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 5.008 अरब डॉलर घटकर 588.314 अरब डॉलर रह गया है। इसके अलावा आलोच्य सप्ताह में अरक्षित स्वर्ण का मूल्य 50.4 करोड़ डॉलर घटकर 40.422 अरब डॉलर रह गया।

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