स्वतंत्र पत्रकारिता के खतरे

लेख

अजय भट्टाचार्य
गुजरात
में दो साल पहले ‘फेस ऑफ नेशन’ न्यूज पोर्टल के साथ जुड़े एक पत्रकार धवल पटेल को अहमदाबाद पुलिस की अपराध शाखा द्वारा देशद्रोह अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने एक खबर लिखी थी कि गुजरात सरकार द्वारा कोविड संकट से कथित रूप से खराब तरीके से निपटने के कारण तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की कुर्सी जा सकती है और उनकी जगह केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया को मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। धवल पटेल गुजरात उच्च न्यायालय में बिना शर्त माफी मांगने के बाद अमेरिका चले गये। मगर एक साल बाद धवल की रिपोर्ट सही साबित हुई और विजय रूपाणी को बदलकर भूपेंद्र पटेल की ताजपोशी कर दी गई। कहने का मतलब यह है कि धवल ने जो जानकारी जुटाकर अपनी खबर छापी थी उसमे मात्र इतना अंतर था कि मंडाविया की जगह भूपेंद्र पटेल मुख्यमंत्री बनाये गये। मगर रूपाणी के हटाये जाने की बात तो सही थी, इसमें देश द्रोह कहाँ था!

ताजा खबर यह है कि राजकोट में सांध्यकालीन समाचार पत्र से जुड़े एक पत्रकार पर गुजरात में नेतृत्व परिवर्तन की संभावना वाली एक खबर लिखने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है, जिसमें मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की जगह केंद्रीय मत्स्य पालन, डेयरी और पशुपालन मंत्री राज्यसभा सांसद पुरुषोत्तम रूपाला को मुख्यमंत्री बनाये जाने की भविष्यवाणी की गई है।
पुलिस के अनुसार, 25 अगस्त को राजकोट ए डिवीजन पुलिस स्टेशन में ‘सौराष्ट्र हेडलाइन-असल काठियावाड़ी’ नामक सांध्यकालीन अखबार से जुड़े राजकोट के पत्रकार अनिरुद्ध नकम के खिलाफ उनकी खबर के बाद पहली सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज की गई थी। यह खबर अलविदा भूपेंद्रजी, स्वागत रूपाला’ 22 अगस्त की शाम को प्रकाशित हुई थी। पुलिस के अनुसार प्राथमिकी राजकोट शहर से बाबूभाई वाघेरा ने दर्ज कराई थी। वघेरा “निर्माण व्यवसाय” में है। इसके बाद, नाकुम को धारा 505 1 (बी) (जनता में भय या अलार्म पैदा करने के इरादे से कोई बयान, अफवाह, या रिपोर्ट बनाना, प्रकाशित करना या प्रसारित करना), 505 (2) (शत्रुता, घृणा पैदा करने या बढ़ावा देने वाले बयान या वर्गों के बीच दुर्भावना) और भारतीय दंड संहिता के 114 (अपराधकर्ता के उपस्थित होने पर किया गया अपराध) के तहत मामला दर्ज किया गया था। पुलिस के अनुसार आरोप लगाया गया है कि पत्रकार ने “भारतीय जनता में चिंता की भावना” पैदा करने और “विभिन्न राजनीतिक समूहों के समर्थकों के बीच घृणा पैदा करने” के लिए समाचार लिखा था। प्राथमिकी में रिपोर्ट के स्लग का भी उल्लेख किया गया – ‘आंतरिक उथल-पुथल: गुजरात भाजपा में अकल्पनीय मोड़, सीएम भूपेंद्रभाई जाने वाले हैं’ – और विशेष रूप से रिपोर्ट से वाक्यों को उद्धृत किया। इसमें कहा गया है कि, “रिपोर्ट ने राजनीतिक अस्थिरता के बारे में लोगों में तनाव पैदा करने और सौराष्ट्र क्षेत्र और गुजरात में कहीं और लोगों के बीच नफरत पैदा करने का कार्य किया है।” विदेशी मंचों पर भारत में स्वतंत्र पत्रकारिता की डींगें मारने वाले देश के प्रधानमंत्री को इस तरह की कार्रवाईयां स्वतंत्र पत्रकारिता लगती हैं शायद!
गुजरात ही क्यों पिछले दिनों ऑल्ट न्यूज के पत्रकार जुबैर हों, उप्र में नमक रोटी दिखाने वाला पत्रकार हो, हाथरसकांड कवर करने जा रहे पत्रकार की गिरफ्तारी से लेकर पर्चा लीक खबर लिखने वाले बलिया के पत्रकारों तक मोदी ब्रांड स्वतंत्र पत्रकारिता के दर्शन किये जा सकते हैं।
( लेखक देश जाने माने पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं। दोपहर का सामना सहित कई अखबारों के नियमित लेखक हैं।)
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