यह जीत मोदी की : देवेगौड़ा दे रहे है मंत्र

लेख समाचार

अजय भट्टाचार्य
जाति
न पूछो साधु की पूछ लीजिये ज्ञान’ की तर्ज पर जनता दल (एस) के पुरोधा और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा चाहते हैं कि जिस तरह उप्र सहित चार राज्यों में जीत हासिल कर प्रधानसेवक दो दिन गुजरात की (चुनाव पूर्व तैयारी) यात्रा पर गये उसी तरह की गुणवत्ता की उनकी अपनी पार्टी के नेताओं से और कार्यकर्ताओं में हो। साथ ही यह भी कहा है कि यह अच्छा होगा अगर कांग्रेस एवं सभी क्षेत्रीय दल देशहित के लिए एकजुट हों। उन्होंने मोदी की उनकी भाजपा का विस्तार पूरे देश में करने की प्रतिबद्धता को लेकर भी प्रशंसा की। देवेगौड़ा ने इस दौरान मोदी के गुजरात दौरे को रेखांकित किया जहां पर इस साल के अंत में चुनाव होने हैं।
देवेगौड़ा के अनुसार उनके सामने केवल एक एजेंडा है और वह है मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में अपनी पार्टी को बचाकर रखें।. आज कांग्रेस की स्थिति क्या है? वह कुछ इलाकों में क्षेत्रीय पार्टी की तरह सिमट गई है।यह अच्छा होगा अगर कांग्रेस और सभी धर्मनिरपेक्ष क्षेत्रीय पार्टियां राष्ट्रहित में एकजुट हों। उन्होंने इस संबंध में फैसला दलों के नेताओं पर छोड़ दिया है। उनके बेटे और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के वर्ष 2018 में हुए शपथ ग्रहण समारोह के दौरान छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों और 15 दलों के नेताओं को एकजुट करने की कोशिश की थी लेकिन वह असफल रही। शायद दूसरी बार इस तरह की कोशिश करने के बारे में नहीं सोचेंगे।
पांच राज्यों के चुनाव नतीजों पर गौड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपनी पार्टी का पूरे देश में विस्तार करने की प्रतिबद्धता की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह जीत (पांच में से चार राज्यों में) उनकी (मोदी की) है। नतीजों के तुरंत बाद वह गुजरात चले गए। देश के सभी क्षेत्रों में पार्टी के विस्तार की उनकी यह इच्छा और प्रतिबद्धता है। मैंने टीवी पर देखा वह कई बैठकें और कार्यक्रम कर रहे हैं। हम में भी ऐसा ही भाव होना चाहिए। दरअसल खुद देवेगौड़ा या कुमारस्वामी यह उपलब्धि नहीं हासिल कर सकते। जद (एस) के सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर काम करने का मंत्र देने का मकसद केवल अपनी पार्टी को राज्य में बचाना है। इस संबंध में रणनीति बनाने के लिए 30 मार्च को बेंगलुरु के पैलेस मैदान में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाई गई है। वैसे अगले साल कर्नाटक में विधान सभा चुनाव होने हैं। इसलिये पार्टी का माहौल बनाने के लिए सीनियर देवेगौड़ा हर महीने दो जिलों का दौरा करेंगे। देवेगौड़ा के अनुसार कांग्रेस की आंतरिक विवाद को सुलझाने में अक्षमता और सभी को एक साथ ले चलने में नाकामी से पंजाब में उसे हार मिली और आम आदमी पार्टी को लाभ हुआ। देवेगौड़ा ने यह भी साफ कर दिया है कि अगले साल होने वाले चुनाव से पहले किसी तरह का गठबंधन नहीं क्रेगेंगे और उनकी पार्टी दोनों राष्ट्रीय दलों के खिलाफ चुनाव लड़ेगी। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए वे बोले-एक समय देश पर शासन करने वाली पार्टी, जलन, असंयम और कई अन्य कारणों से आज की स्थिति में है। उसके भीतर के लोग कन्नड़ भाषी के प्रधानमंत्री बनने को बर्दाश्त नहीं कर सकते। मैं कोई नाम नहीं लेना चाहता लेकिन मैं लोगों के पास अपने काम के साथ जाऊंगा।

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