क्या आप भी जब चाहे तब तैसे तुलसी का पत्ता तोड़ते हैं, तो हो जाएं सावधान! जाने सही तरीका

धर्म-ज्योतिष

धार्मिक आस्था के साथ साथ तुलसी के पौधे का आयुर्वेद में स्वास्थ्य के लिहाज से बहुत ज्यादा उपयोग है। इससे तैयार दवाइयां तमाम रोगों में बहुत गुणकारी है। यही वजह है लोग तुलसी की पत्ती का अक्सर घरेलू उपयोग भी करते रहते हैं। लेकिन इसकी पत्ती तोड़ने का सही तरीका नहीं पता होने के कारण लाभ से ज्यादा बड़ा नुकसान कर बैठते हैं। आइए जानते हैं तुलसी की पत्ती को तोड़ने का सही धार्मिक मान्यता और तरीका।

तुलसी में मां लक्ष्मी का वास माना गया है। बिना स्नान किए तुलसी दल न ही स्पर्श करें, न ही तोड़े। इससे धन की देवी क्रोधित हो जाती हैं। स्नान के बाद तुलसी को प्रणाम कर ही पत्ता तोड़ें।

तुलसी का पत्ता सुबह या दिन में ही तोड़े। सूर्यास्त के बाद ऐसा करना दुर्भाग्य लाता है। मान्यता है इससे विष्णु जी नाराज होते हैं। कहते हैं इससे धन-दौलत की हानि होती है।

शास्त्रों में रविवार, एकादशी, चंद्र ग्रहण, सूर्य ग्रहण के दिन तुलसी पत्ता तोड़ना वर्जित हैं। इससे पूजा का फल नहीं मिलता. रविवार-एकादशी को जल भी न चढ़ाएं, कहते हैं इस दिन माता तुलसी विष्णु जी के निमित्त निर्जला व्रत रखती हैं।

तुलसी की पूजा में सुबह के समय ही जल अर्पित करें, संध्याकाल में सिर्फ घी का दीपक लगाकर परिक्रमा करने का विधान है। शाम को जल नहीं चढ़ाया जाता।

अक्सर घर के सभी सदस्य एक-एक कर कलशभर के तुलसी में जल अर्पित करते हैं जो ठीक नहीं है। अधिक जल से तुलसी सूख जाती। तुलसी का सूखना शुभ नहीं माना जाता। इसलिए थोड़ा ही जल अर्पित करें।

तुलसी दल को सिर्फ धार्मिक या स्वास्थ कारण से ही तोड़े लेकिन इसके लिए नाखून की मदद न लें। ऐसा करने पर पाप के भागी बन सकते हैं। तुलसी का पौधा कभी भी दक्षिण-पूर्व दिशा में ना रखें क्योंकि इस दिशा को अग्नि की दिशा माना जाता है।

अगर तुलसी के सूखे पत्ते जमीन पर गिर जाएं तो इसे धोकर पौधे में ही डाल दें। ध्यान रहे इन पर कभी पैर ना लगे और ना ही इन्हें इधर-उधर फेंके। तुलसी का अपमान घर में दरिद्रता ला सकता है।

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