आधी रोटी खाएं लेकिन बच्चों को जरूर पढाएं: हज़रत अफ़ज़ाल मोहम्मद फारूकी

मुंबई

रईस खान
मुंबई।
बुजुर्गों से मुहब्बत और उनके मानने का मतलब है कि उनके बताए रास्ते पर चलना। नमाज़ पढ़ना, दूसरों से अखलाक और मुहब्बत से पेश आना और लोगों को खाना खिलाना ही सूफी हज़रात से असली मुहब्बत है। ये बातें खानकाहे सफविया के हज़रत अफ़ज़ाल मोहम्मद फारूकी ने एक कार्यक्रम में कही।

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ख्वाजा गरीब नवाज़ मोइनुद्दीन चिश्ती रह० के 810 वें उर्स के मौके पर गुरुवार को ठाणे के वासिंद में आयोजित किया गया था। ये प्रोग्राम खानकाहे सफविया के हज़रत मोहम्मद नवाज़िश फारूकी की सरपरस्ती में मुनक्किद हुआ। इस मौके पर हज़रत अफ़ज़ाल मोहम्मद फारूकी ने इकट्ठा हुए लोगों को दीन और दुनिया के साथ साथ तालीम पर सबसे ज्यादा तवज्जो देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में इंजीनियर, डॉक्टर, आईएएस और पीसीएस बनना भी जरूरी है। उन्होंने बताया कि खानकाहे सफाविया की ओर से चलाए जा रहे एजुकेशनल मिशन के तहत आलिम और हाफ़िज़ बच्चे आई आई टी में क्वालीफाई किए हैं और आई ए एस के लिए तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वक़्त की जरूरत है चाहे आधी रोटी खाएं लेकिन बच्चों को जरूर पढाएं।
इस मौके पर प्रोग्राम की शुरुवात में मुंबई के मौलाना अनीस अशरफी ने हज़रत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती अजमेरी रह की जिंदगी के बारे में जानकारी दी। इस प्रोग्राम में सूफिया कराम से मुहब्बत करने वाले मुंबई के तमाम लोगोंं ने शिरकत की. ये प्रोग्राम वसीक अली ने आयोजित किया।

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