EWS Quota Verdict : सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला,10 प्रतिशत आर्थिक आरक्षण पर मुहर

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Supreme court: सुप्रीम कोर्ट ने आज (7 नवंबर) आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) को नौकरियों और शिक्षा प्रवेश में 10 प्रतिशत आरक्षण की वैधता पर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 103वें संविधान संशोधन के जरिए किया गया आरक्षण प्रावधान वैध है। आरक्षण सहित संवैधानिक संशोधन की वैधता को विभिन्न याचिकाओं के माध्यम से चुनौती दी गई थी। इन याचिकाओं पर सुनवाई के बाद प्रधान न्यायाधीश उदय ललित की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने यह फैसला सुनाया है।
सितंबर में बेंच ने आर्थिक रूप से कमजोरों के लिए आरक्षण और संविधान के उल्लंघन के दो मुद्दों पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। उसके बाद कोर्ट ने इस मामले में 27 सितंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। 2019 में ‘जनहित अभियान’ ने इस मामले में मुख्य याचिका दायर की थी। याचिका में 103वें संशोधन की वैधता को चुनौती दी गई थी।
अदालत में अन्य 40 याचिकाओं के साथ इस याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद अब कोर्ट ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण बनाए रखने का फैसला सुनाया है।
2019 में केंद्र सरकार ने 103वें संविधान संशोधन के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए नौकरियों और प्रवेश में आरक्षण का प्रावधान किया था। इस संवैधानिक संशोधन को कोर्ट में चुनौती देने के बाद केंद्र सरकार ने अपना पक्ष रखा था। केंद्र सरकार ने पहले अदालत को बताया था कि यह संवैधानिक संशोधन इसलिए किया गया है ताकि आर्थिक पिछड़ेपन के कारण किसी के साथ गलत व्यवहार न हो और साथ ही उच्च शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में समान अवसर मिल सके।

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