भ्रष्टाचार के खिलाफ पहले आत्महत्या का रास्ता चुना, अब भूख हड़ताल पर, फिर भी अधिकारियों की मोटी खाल को कोई असर नहीं

उत्तर प्रदेश समाचार

न्यूज स्टैंड18 नेटवर्क
बस्ती (उत्तर प्रदेश)
। जिले के बेहिल विकास खंड अंतर्गत बेहिल ग्राम पंचायत का एक युवा पिछले लंबे समय से ग्राम पंचायत के भ्रष्टाचार की जांच की मांग को लेकर संघर्ष कर रहा है, लेकिन जिले के उच्चाधिकारियों के कान में जूं तक नहीं रेंग रही। बेहिल ग्राम पंचायत का यह युवा गंगाराम यादव आज (28 दिसंबर) से गांव में ही भूख हड़ताल पर बैठ गया है। इस युवा को लेकर बेहिल का अन्ना हजारे भी कहने लगे हैं।
इस युवक ने 1 दिसंबर को जिला कलेक्ट्रेट परिसर में अपनी मांग को लेकर आत्महत्या का प्रयास किया, जिसे मौके पर तैनात पुलिस वालों ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इसके बाद जिलाधिकारी की ओर से आश्वासन दिया गया कि, उसके लगाए आरोपों की जांच होगी, लेकिन खानापूर्ति के अलावा ऐसा कुछ नही हुआ।
भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष कर रहे गंगाराम यादव ने बताया कि, अभी तक किसी जांच का कोई परिणाम नही निकला। अफसर कितने जिम्मेदार हैं इस बात का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि ग्रामीण पेयजल योजना के तहत बने वाटर हेड टैंक से पानी की सप्लाई महज स्टार्टर खराब होने के नाते 18 महीने से बंद है। शिकायत पर शिकायत की गई, कोई फर्क नहीं पड़ा। इसी तरह मनरेगा, पीएम आवास सहित तमाम योजनाओं में जमकर लूट खसोट की गई है। पात्रों की अनदेखी, स्वजनों को लाभ पहुंचाने वाली कार्यशैली तथा जांच के नाम पर लीपापोती आम बात है।
गंगाराम का आरोप है कि सभी अधिकारी आपस में मिले हैं। कोई किसी किसी के खिलाफ कार्यवाही नही करना चाहता। एक दूसरे की कमियों पर परदा डालने की कार्य संस्कृति लगातार सरकार की छबि खराब कर रही है। मनमानेपन का आलम ये है कि ग्राम प्रधान ने पड़ोस के ग्राम पंचायत में नाला खोदवाकर पैसा निकाल लिया। मौके पर काम भी नही हुआ है। दूसरे ग्राम पंचायत के प्रधान ने लिखित रूप से कहा है कि ये उनका कराया काम नही है । गंगाराम का कहना है लोकतंत्र में बेबस असहाय जनता के सामने धरना प्रदर्शन के अलावा कोई रास्ता नही है। गंगाराम ने कहा धरने के दौरान उसके साथ किसी भी प्रकार के अनहोनी होती है तो इसकी जिम्मेदारी जिलाधिकारी की होगी।

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